प्रतिबंधित इंजेक्शन मामले में सियासत तेज, बीजेपी ने कांग्रेस नेता के खिलाफ जांच मांगी

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अजमेर: राजस्थान के इस ऐतिहासिक शहर में स्वापक औषधि और मनप्रभावी पदार्थ अधिनियम से जुड़े एक संवेदनशील प्रकरण में एक प्रमुख राजनीतिक दल से जुड़े पदाधिकारी का नाम संलिप्त पाए जाने के बाद से राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। विरोधी दल के नेताओं ने इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर तुरंत सख्त कदम उठाने का दबाव बढ़ा दिया है।

शासकीय तंत्र और पुलिस अधिकारियों को सौंपा गया ज्ञापन

स्थानीय भारतीय जनता पार्टी इकाई के शीर्ष पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं ने शनिवार के रोज एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में मिलकर प्रशासनिक मुखिया तथा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की गहराई से तहकीकात करने और सच्चाई सामने लाने की पुरजोर अपील की गई है।

अवैध दवा कारोबार और संदेहास्पद बिलिंग पर उठे गंभीर सवाल

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब औषधि नियंत्रण से जुड़े प्रशासनिक अमले ने शहर के चार अलग-अलग चिकित्सा प्रतिष्ठानों पर औचक निरीक्षण और कार्रवाई की थी। इस दौरान सामने आए साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया गया कि एक विपक्षी दल के पदाधिकारी की संलिप्तता इस अवैध नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।

वित्तीय लेनदेन और स्टॉक रजिस्टरों की विस्तृत जांच की मांग

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जिला संगठन प्रमुख ने मीडिया और प्रशासन के समक्ष यह बात रखी कि यह मसला केवल साधारण नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवा पीढ़ी को नशे की गर्त में धकेलने वाला एक बड़ा षड्यंत्र है। उन्होंने मांग की है कि सभी संबंधित गोदामों और वितरकों के बैंक खातों की आवाजाही तथा बिलिंग रिकॉर्ड की विशेष जांच होनी चाहिए।

दोषियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई और रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आग्रह

ज्ञापन के जरिए यह भी पुरजोर मांग की गई है कि इस प्रकरण में प्रारंभिक स्तर पर संलिप्त पाए जाने वाले तमाम जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून की सुसंगत धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं। साथ ही, इस पूरी जांच प्रक्रिया की अब तक की प्रगति को आम जनता के सामने स्पष्ट रूप से साझा किया जाना चाहिए।