कैबिनेट बैठक में बड़े फैसलों की तैयारी, 8 जुलाई को होगी साय सरकार की अहम बैठक

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णयकारी बैठक आगामी मंगलवार, 8 जुलाई 2026 को आयोजित की जाने वाली है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह बैठक सुबह ठीक 11:30 बजे से नवा रायपुर अटल नगर स्थित राज्य मंत्रालय (महानदी भवन) के कैबिनेट हॉल में शुरू होगी।

इस बैठक को आगामी विधानसभा सत्र और राज्य के विकास के रोडमैप के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। कैबिनेट की इस बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न जटिल प्रशासनिक, वित्तीय और दूरगामी नीतिगत विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही, अलग-अलग विभागों द्वारा तैयार किए गए जनहित से जुड़े कई कड़े और महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मंत्रिपरिषद की अंतिम मुहर लग सकती है। राज्य सरकार की ओर से इस महाबैठक की सभी प्रशासनिक तैयारियां युद्धस्तर पर पूरी कर ली गई हैं और मुख्य सचिव के माध्यम से सभी संबंधित विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों को आवश्यक एजेंडा नोट्स के साथ उपस्थित रहने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

अन्नदाताओं के लिए बड़ी सौगात: खरीफ 2026 की खेती के लिए यूरिया वितरण के कड़े नियम बदले

इस कैबिनेट बैठक से ठीक पहले, छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के रीढ़ माने जाने वाले किसानों के हित में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने चालू खरीफ सीजन 2026 की खेती और बोआई को ध्यान में रखते हुए किसानों के लिए यूरिया उर्वरक के वितरण नियमों में आमूलचूल बदलाव कर दिया है:

  • शत-प्रतिशत कोटा बहाल: नए नियमों के तहत अब किसानों को पिछले वर्ष यानी खरीफ 2025 में जितनी मात्रा में यूरिया आवंटित किया गया था, उतनी ही पूरी मात्रा इस वर्ष भी बिना किसी कटौती के उपलब्ध कराई जाएगी।

  • 80% की बंदिश खत्म: सरकार ने पूर्व में लागू उस दमनकारी नियम को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, जिसके तहत किसानों पर 80 प्रतिशत वितरण की अधिकतम सीमा थोपी गई थी। इस पुरानी सीमा के हटने से अब किसानों को ऐन बोआई के वक्त उर्वरक की भारी किल्लत और कालाबाजारी का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनकी खेती की तैयारियां समय पर पूरी हो सकेंगी।

शॉर्टेज होने पर भी सुरक्षित रहेगा किसानों का हक: बाद में मिलेगी शेष यूरिया की मात्रा

किसानों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई इस नई पारदर्शी व्यवस्था के तहत एक और बेहद संवेदनशील नियम जोड़ा गया है। यदि ग्रामीण क्षेत्रों की किसी प्राथमिक सहकारी समिति में अस्थायी रूप से यूरिया का बफर स्टॉक कम हो जाता है और कोई किसान समिति पहुंचता है, तो स्टॉक की कमी के कारण उसे खाली हाथ नहीं लौटना होगा।

ऐसी स्थिति में किसान को मौके पर उपलब्ध खाद दे दी जाएगी और उसकी पात्रता की जो शेष मात्रा बचेगी, उसे रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया जाएगा। जैसे ही समिति में नया यूरिया स्टॉक प्राप्त होगा, उस किसान को उसकी बची हुई शेष मात्रा प्राथमिकता के आधार पर तुरंत उपलब्ध करा दी जाएगी। सरकार का एकमात्र मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी छोटे या सीमांत किसान को केवल गोदामों में स्टॉक की कमी के कारण उसकी निर्धारित पात्रता और कोटे से वंचित न रहना पड़े।

जशपुर के दुलदुला में कलेक्टर रोहित व्यास का औचक छापा; खाद-बीज भंडारों की ली तलाशी

राज्य सरकार के इन कड़े निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। इसी कड़ी में जशपुर के जिला कलेक्टर रोहित व्यास ने अचानक भारी अमले के साथ दुलदुला स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति का औचक निरीक्षण और सघन दौरा किया। कलेक्टर ने अचानक पहुंचकर समिति के गोदामों को खुलवाया और वहां भौतिक रूप से मौजूद खाद, उन्नत बीजों की उपलब्धता और उनके भंडारण की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने सहकारी बैंक के माध्यम से किसानों को बांटे जा रहे शून्य प्रतिशत ब्याज वाले कृषि ऋण (केसीसी) के वितरण की प्रगति की भी समीक्षा की।

कलेक्टर रोहित व्यास ने मौके पर मौजूद प्रबंधकों और कृषि विस्तार अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि खरीफ सीजन के इस महत्वपूर्ण समय के दौरान किसी भी किसान को खाद, बीज और लोन प्राप्त करने के लिए सोसायटियों के चक्कर न काटने पड़ें। किसी भी स्तर पर यदि अनावश्यक देरी, लापरवाही या बाबूगिरी पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल निलंबन की सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने सीधे किसानों से की 'चौपाल चर्चा'; नैनो यूरिया अपनाने पर दिया विशेष जोर

अपने इस औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर रोहित व्यास ने केवल दफ्तर के कागजात ही नहीं देखे, बल्कि समिति परिसर में खाद लेने पहुंचे दूर-दराज के गांवों के किसानों के बीच जमीन पर बैठकर सीधे संवाद (चौपाल चर्चा) किया। उन्होंने किसानों से पूछा कि क्या उन्हें खाद-बीज सही कीमत पर और समय पर मिल रहा है? क्या कोई उनसे अतिरिक्त पैसों की मांग तो नहीं कर रहा? उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की हर छोटी-बड़ी तकनीकी शिकायत का २४ घंटे के भीतर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

आधुनिक खेती का मंत्र: कलेक्टर ने किसानों से पारंपरिक यूरिया की बोरियों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल और बेहद प्रभावी नैनो यूरिया (Nano Urea) और नैनो डीएपी (Nano DAP) जैसे आधुनिक तरल उर्वरकों के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की भावुक अपील की। उन्होंने वैज्ञानिकों के हवाले से किसानों को समझाया कि इन अत्याधुनिक नैनो उर्वरकों के छिड़काव से फसलों को सीधा और संतुलित पोषण मिलता है, जिससे फसल की गुणवत्ता सुधरती है। इसके इस्तेमाल से भारी-भरकम बोरियों के परिवहन की लागत कम होती है, उत्पादन लागत में भारी गिरावट आती है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारी धरती माता यानी मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और सेहत भी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है।

कालाबाजारी रोकने के लिए जिला स्तर पर बनेगी 'उड़नदस्ता टीम', हर समिति की होगी रोजाना मॉनिटरिंग

खरीफ सीजन 2026 के दौरान प्रदेश में उर्वरकों की कोई कृत्रिम कमी न पैदा की जा सके, इसके लिए जशपुर जिला प्रशासन सहित पूरे प्रदेश के कलेक्टर्स ने सभी सोसायटियों की दैनिक और डिजिटल निगरानी (रेगुलर मॉनिटरिंग) शुरू कर दी है। इसके लिए कृषि विभाग, राजस्व विभाग और सहकारिता विभाग के संयुक्त अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष 'उड़नदस्ता टीम' (Flying Squad) का गठन किया गया है।

यह टीम निजी लाभांश कमाने वाले खाद विक्रेताओं और सहकारी समितियों के स्टॉक रजिस्टरों का अचानक मिलान करेगी। सरकार का अंतिम और स्पष्ट लक्ष्य यही है कि मानसून की बारिश के साथ ही छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं को समय पर बिना किसी मानसिक और शारीरिक परेशानी के सभी आवश्यक कृषि इनपुट (संसाधन) मिल सकें, ताकि इस बार प्रदेश में धान की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार दर्ज की जा सके।