पटना। बिहार में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) को और प्रभावी एवं जनोपयोगी बनाने की दिशा में सरकार ने पहल शुरू की है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने पीडीएस विक्रेताओं की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है। समिति यह अध्ययन करेगी कि राज्य में जन वितरण प्रणाली की दुकानों के माध्यम से खाद्यान्न के अलावा रोजमर्रा की जरूरत की किन अन्य उपयोगी वस्तुओं की बिक्री कराई जा सकती है। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत पात्र लाभुकों को बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था में PDS विक्रेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार का उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुचारु बनाने के साथ ही दुकानदारों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना है।
– दूसरे राज्यों की व्यवस्था का होगा अध्ययन
पीडीएस दुकानदारों की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के विशेष सचिव उपेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति राज्य में पीडीएस विक्रेताओं की आय बढ़ाने से जुड़े विभिन्न विकल्पों का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही समिति दूसरे राज्यों में पीडीएस दुकानों के माध्यम से खाद्यान्न के अतिरिक्त अन्य वस्तुओं की बिक्री की व्यवस्था और वहां किए जा रहे प्रयोगों की भी समीक्षा करेगी। इन व्यवस्थाओं का अध्ययन कर बिहार की परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी और व्यावहारिक मॉडल तैयार करने की कोशिश की जाएगी। समिति को 15 दिनों के भीतर अपना मन्तव्य और परामर्श विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
– एसओपी तैयार करने पर भी होगा मंथन
सरकार ने समिति को पीडीएस दुकानों के संचालन और अतिरिक्त वस्तुओं की बिक्री को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के लिए आवश्यक बैठकें और विचार-विमर्श करने को कहा है। समिति यह भी देखेगी कि अतिरिक्त वस्तुओं की बिक्री से पीडीएस दुकानदारों को किस तरह अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है और इसका लाभ राशन उपभोक्ताओं तक कैसे पहुंचाया जा सकता है। समिति में निगम मुख्यालय, अनुभाजन और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधिकारियों के साथ फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। सृष्टि प्रिया को सदस्य सचिव बनाया गया है।
– राशन दुकानों को बनाया जाएगा अधिक जनोपयोगी
मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पीडीएस व्यवस्था को केवल खाद्यान्न वितरण तक सीमित रखना नहीं है। इसे अधिक सक्षम, आर्थिक रूप से व्यवहार्य, पारदर्शी और जनोपयोगी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि पीडीएस विक्रेताओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से राशन वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी। वहीं, दुकानों पर रोजमर्रा की जरूरत की अतिरिक्त वस्तुएं उपलब्ध होने से लाभुकों को भी स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल सकती है। समिति की अनुशंसाओं और दूसरे राज्यों की व्यवस्थाओं के अध्ययन के आधार पर बिहार में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सरकार का जोर पीडीएस विक्रेताओं के हित और लाभुकों की सुविधा, दोनों को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक व्यवस्था विकसित करने पर है।









