कोरबा: छत्तीसगढ़ के ऊर्जा और औद्योगिक केंद्र कोरबा में स्थित एसईसीएल (SECL) की प्रतिष्ठित गेवरा मेगा परियोजना के अंतर्गत साइलो (SILO) और कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) के निर्माण कार्य में एक बहुत बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है। निर्माण कार्य का ठेका संभालने वाली कंपनी बंसल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के अधीन काम करने वाले सैकड़ों ठेका श्रमिकों ने अपना मासिक वेतन न मिलने के कारण प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जून महीने का नियमानुसार पारिश्रमिक समय पर बैंक खातों में न आने से आक्रोशित लगभग 150 से अधिक मजदूरों ने निर्माण स्थल पर काम पूरी तरह ठप कर कंपनी प्रबंधन और एसईसीएल प्रशासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी और प्रदर्शन किया। पारिश्रमिक न मिलने से नाराज इन श्रमिकों की हड़ताल के चलते पिछले पांच दिनों से परियोजना का महत्वपूर्ण निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद पड़ा है, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
त्रिपक्षीय समझौते को भी कंपनी ने दिखाया ठेंगा, तय समय सीमा पर नहीं मिली मजदूरी
आंदोलन कर रहे पीड़ित श्रमिकों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि वेतन भुगतान की यह समस्या नई नहीं है। इससे ठीक दो महीने पहले भी उन्हें अपनी गाढ़ी कमाई के पैसों के लिए एसईसीएल गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) कार्यालय का घेराव करना पड़ा था।
उस बड़े विवाद के बाद एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें निम्नलिखित पक्षों के बीच विधिक सहमति बनी थी:
शामिल पक्ष: एसईसीएल के एरिया पर्सनल मैनेजर, अनुबंधित ठेका कंपनी (बंसल इंफ्राटेक) के वरिष्ठ अधिकारी और श्रमिक प्रतिनिधि।
लिखित समझौता: कंपनी ने लिखित रूप से यह आश्वासन दिया था कि भविष्य में प्रत्येक माह की 7 से 10 तारीख के बीच अनिवार्य रूप से सभी कर्मचारियों और मजदूरों का मासिक वेतन सीधे उनके खातों में जारी कर दिया जाएगा।
उल्लंघन: मजदूरों का सीधा आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने इस बार भी अपनी लिखित प्रतिबद्धता और तय समय सीमा का सरेआम उल्लंघन किया, जिससे सैकड़ों मजदूर परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
जुलाई-अगस्त के पीक सीजन में वेतन रुकने से बढ़ीं मजदूरों की घरेलू और सामाजिक परेशानियां
महत्वपूर्ण समय: हड़ताल पर बैठे मजदूरों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि जुलाई और अगस्त का महीना किसी भी आम परिवार के लिए आर्थिक रूप से साल का सबसे महत्वपूर्ण और खर्चीला समय होता है।
अनिवार्य खर्चे: इस समय बच्चों के नए शैक्षणिक सत्र की स्कूल फीस, कॉपियां-किताबें, बरसात के घरेलू खर्च, बिजली के बिल, रसोई गैस सिलेंडर और दैनिक राशन की जरूरतों के लिए नगद पैसों की अत्यंत आवश्यकता होती है। रसायनशास्त्र जैसे तकनीकी विषयों की कोचिंग और उच्च शिक्षा की फीस का भुगतान भी इसी दौरान होना है।
मानसिक प्रताड़ना: ऐसे नाजुक समय पर लगातार भुगतान में देरी होने से मजदूरों के बच्चे स्कूल जाने से वंचित हो रहे हैं और उनके पूरे परिवार को गंभीर मानसिक व आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रबंधन पर लगा खुली वादाखिलाफी और 'काम बंद करो' जैसी अभद्र धमकी देने का आरोप
खोखला आश्वासन: श्रमिकों के मुताबिक, जब उन्होंने 10 तारीख को वेतन न आने पर विरोध दर्ज कराया, तो बंसल इंफ्राटेक के अधिकारियों ने मौखिक आश्वासन दिया था कि सोमवार से बुधवार के बीच हर हाल में सभी का भुगतान क्लियर कर दिया जाएगा। हालांकि, वह तय समय सीमा भी बीत गई और बैंक खातों में एक रुपया तक नहीं आया।
संवेदनहीन जवाब: मजदूरों का आरोप है कि जब उन्होंने दोबारा परेशान होकर जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्हें सहानुभूति देने के बजाय बेहद संवेदनहीन और अहंकारपूर्ण लहजे में कथित तौर पर यह कह दिया गया कि "जब हमारा मन होगा और जब भुगतान होगा, तभी काम पर आना, वरना मत आना।" प्रबंधन के इस तानाशाहीपूर्ण जवाब से आक्रोशित होकर ही श्रमिकों ने टूल-डाउन (काम बंद) हड़ताल शुरू कर दी है।
मुख्य महाप्रबंधक (CGM) को सौंपा गया अंतिम अल्टीमेटम, उत्पादन ठप होने की दी चेतावनी
कोरबा: अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलित ठेका श्रमिकों ने एसईसीएल गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि एसईसीएल मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) होने के नाते ठेकेदार पर दबाव बनाए और उनका पूरा बकाया वेतन तुरंत जारी करवाए।
श्रमिकों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर उनके बैंक खातों में वेतन की राशि ट्रांसफर नहीं की गई, तो वे इस आंदोलन को और उग्र करते हुए कोयला परिवहन और खदान के अन्य संचालन क्षेत्रों तक फैला देंगे। श्रमिकों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस वेतन विवाद के कारण देश की इस सबसे बड़ी कोयला परियोजना का निर्माण कार्य स्थाई रूप से प्रभावित होता है या आगामी दिनों में कोयला उत्पादन व आपूर्ति पर कोई विपरीत असर पड़ता है, तो उसकी संपूर्ण वैधानिक जिम्मेदारी बंसल इंफ्राटेक प्रबंधन और एसईसीएल प्रशासन की होगी।









