राजस्थान ने खोया अपना लाल, असम एयरफोर्स दुर्घटना में शहीद हुए खेमाराम

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डीडवाना। राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में स्थित नावा उपखंड के पांचोता गांव के रहने वाले भारतीय वायुसेना के अग्निवीर वायु सैनिक खेमाराम कुमावत असम के जोरहाट एयरबेस पर एक दर्दनाक विमान हादसे के दौरान शहीद हो गए। लैंडिंग के वक्त वायुसेना के विमान में अचानक आग लग जाने के कारण यह भीषण दुर्घटना हुई, जिसमें पांच जवानों ने अपनी जान गंवा दी। वीर सपूत की शहादत की खबर जैसे ही इलाके में पहुंची, पूरे क्षेत्र में मातमी सन्नाटा पसर गया। शहीद का पार्थिव देह आज उनके पैतृक गांव पहुंचने की उम्मीद है।

लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी से हुआ विमान हादसा

यह दुखद दुर्घटना उस समय हुई जब भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान असम के जोरहाट एयरबेस पर उतरने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान विमान में अचानक कुछ तकनीकी खराबी आ गई और उसमें भीषण आग लग गई। देखते ही देखते विमान क्रैश हो गया और इस हादसे में पांच सैनिकों की असमय मौत हो गई, जिनमें पांचोता गांव के जांबाज खेमाराम कुमावत भी शामिल थे। इस घटना के फौरन बाद वायुसेना और सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और हादसे की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और गांव को शहादत पर नाज

शहीद खेमाराम कुमावत करीब साढ़े तीन साल पहले ही भारतीय वायुसेना में अग्निवीर के तौर पर भर्ती हुए थे और वे अपने परिवार का मुख्य सहारा थे। जैसे ही उनकी शहादत की आधिकारिक सूचना घर पहुंची, परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वीर सैनिक की माता और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पिता सहित अन्य सदस्य गहरे सदमे में हैं। पांचोता गांव की हर आंख अपने लाडले को खोने के गम में नम है, लेकिन इसके साथ ही ग्रामीणों को अपने बेटे के देश के प्रति दिए गए इस सर्वोच्च बलिदान पर अटूट गर्व भी है।

आज पहुंचेगी पार्थिव देह और राजकीय सम्मान से होगी विदाई

प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, शहीद खेमाराम कुमावत का पार्थिव शरीर आज सुबह करीब 10 बजे तक नावा क्षेत्र में पहुंचने की संभावना है। वीर जवान के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के इलाकों से भारी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है। शहादत की खबर मिलने के बाद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद के निवास स्थान पर पहुंचकर शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। प्रशासन द्वारा शहीद सैनिक की अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि स्थल पर सुरक्षा व अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पूरी मुस्तैदी से की जा रही हैं, ताकि उन्हें पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा सके।