जयपुर: राजस्थान के कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने रीट-2021 पेपर लीक प्रकरण को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को 25 जुलाई 2026 को 11 पन्नों का विस्तृत पत्र प्रेषित किया है और इस प्रकरण की उच्चस्तरीय तथा निष्पक्ष जांच करवाए जाने की पुरजोर मांग उठाई है. मंत्री द्वारा भेजे गए इस पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि पिछली कांग्रेस सरकार के शासनकाल में हुए इस चर्चित पेपर लीक मामले में कई रसूखदार सियासी हस्तियों, पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के वरिष्ठ अधिकारियों, राजीव गांधी स्टडी सर्किल (RGSC) से जुड़े पदाधिकारियों और अन्य विशिष्ट लोगों की संलिप्तता रही है, जिनकी अब तक पारदर्शिता के साथ जांच नहीं की गई है. उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री व मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री सुभाष गर्ग, कुछ चुनिंदा विधायकों, तत्कालीन सीएमओ के अधिकारियों के अलावा गांधीयन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस एंड गवर्नेंस (GISSG) तथा आरजीएससी के जिम्मेदारों से गहन पूछताछ कर सख्त कानूनी कदम उठाने की मांग की है.
गहलोत राज में सत्रह परीक्षाओं के पेपर लीक होने का गंभीर दावा
अपने इस पत्र में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने यह रेखांकित किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूरे कार्यकाल के दौरान कुल 18 प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करवाई गईं, जिनमें से हैरान करने वाली बात यह है कि 17 परीक्षाओं के पेपर लीक हो गए थे. उन्होंने यह भी हवाला दिया कि विपक्ष की भूमिका निभाते हुए उन्होंने इन घोटालों के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद की थी, इस विषय को प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया था और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष भी आधिकारिक शिकायतें दर्ज कराई थीं. उनके कथानुसार, ईडी के स्तर पर भी इस मामले में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था, परंतु ठोस और पर्याप्त सबूत उपलब्ध होने के बावजूद प्रभावशाली और ताकतवर चेहरों के विरुद्ध अपेक्षित कानूनी कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी.
कोलकाता की प्रिंटिंग प्रेस के चयन और नियमों की अनदेखी पर सवालिया निशान
डॉ. मीणा ने पत्र के माध्यम से यह भी आरोप लगाया कि रीट-2021 की परीक्षा का प्रश्नपत्र मुद्रित करवाने का जिम्मा पूरी तरह से नियमों को ताक पर रखकर कोलकाता की सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस को सौंप दिया गया था. उनका यह दावा है कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. डी.पी. जारोली पर उस समय के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, तत्कालीन मंत्री सुभाष गर्ग और पूर्व सीएमओ के खास लोगों का भारी दबाव था, जिसके परिणामस्वरूप इस प्रेस को ठेका दिया गया. उन्होंने यह भी जिक्र किया कि शिक्षा बोर्ड द्वारा लगातार दूसरी बार इसी प्रिंटिंग प्रेस का चयन किया जाना पूरी तरह से निर्धारित नियमों के विपरीत था.
पूर्व बोर्ड अध्यक्ष के वायरल बयान और व्हाट्सएप संदेश का विशेष उल्लेख
इस पत्र में डॉ. मीणा ने बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. डी.पी. जारोली के उस कथित बयान और वायरल संदेश का भी विस्तार से विवरण दिया है, जिसमें उन्होंने अपने पद से हटाए जाने के बाद यह स्वीकार किया था कि रीट का यह पेपर राजनीतिक संरक्षण के साये में लीक हुआ था. पत्र के तथ्यों के अनुसार, 4 फरवरी 2022 को सुबह 9:33 बजे डॉ. जारोली ने राजस्थान विश्वविद्यालय पेंशनर्स एसोसिएशन के एक व्हाट्सएप ग्रुप पर संदेश पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से यह बात कही थी कि उन्हें इस पूरे प्रकरण में बेवजह 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है तथा कुछ बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के अनुचित दबाव के कारण ही उन्होंने सरस्वती प्रिंटिंग प्रेस को मुद्रण का कार्य सौंपा था.









