उदयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर मुख्य पीठ ने भीलवाड़ा के कीर खेड़ा क्षेत्र में स्थित गाड़िया लुहार आवासीय योजना में सामने आए एक बड़े और कथित भूखंड घोटाले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है और गाड़िया लुहार समुदाय के कल्याण के लिए विशेष रूप से आरक्षित किए गए 184 भूखंडों के संबंध में बड़ा आदेश जारी किया है। उच्च न्यायालय ने इस आरक्षित भूमि को गैर-समुदाय के लोगों के पक्ष में किए गए सभी प्रकार के क्रय-विक्रय, उपहार पत्र, रजिस्ट्री और अन्य सभी कानूनी हस्तांतरणों को पूरी तरह से शून्य (अवैध) घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
प्रशासनिक आदेश की गलत व्याख्या और नियमों का उल्लंघन
उच्च न्यायालय ने मामले की गहन सुनवाई के दौरान यह माना कि राज्य सरकार द्वारा चलाए गए 'प्रशासन शहरों के संग अभियान' के अंतर्गत पूर्व में जारी एक प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया था। अधिकारियों ने 21 अप्रैल 2022 के उस सरकारी आदेश की जानबूझकर या अनजाने में गलत और भ्रामक व्याख्या की, जिसके चलते कानूनन अहस्तांतरणीय (जो किसी और को बेचे या ट्रांसफर न किए जा सकें) प्रकृति के इन भूखंडों को भी गैर-पात्र और बाहरी व्यक्तियों के नाम स्थानांतरित कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया इस कल्याणकारी योजना की मूल भावना, जनहित के सिद्धांतों और स्थापित कानूनों के सर्वथा विपरीत थी।
पिछड़े और खानाबदोश समुदाय के अधिकारों की रक्षा का संकल्प
न्यायालय ने अपने विस्तृत फैसले में इस बात पर विशेष जोर दिया कि गाड़िया लुहार समाज जैसे समाज के सबसे पिछड़े, जरूरतमंद और खानाबदोश समुदायों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकारें विशेष आवासीय योजनाएं संचालित करती हैं। इन भूखंडों का मुख्य उद्देश्य इस समाज के लोगों को स्थाई आवास उपलब्ध कराना था ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक उत्थान हो सके। ऐसे में इन आरक्षित भूखंडों को किसी भी व्यावसायिक लाभ या हेरफेर के जरिए दूसरे रसूखदार लोगों के हाथों में सौंपने की अनुमति कतई नहीं दी जा सकती। अदालत का यह निर्णय इस वंचित वर्ग के कानूनी और मानवीय अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
अवैध रूप से किए गए सभी भूमि सौदे और रजिस्ट्रियां पूरी तरह निरस्त
इस ऐतिहासिक न्यायिक आदेश के बाद विवादित 184 भूखंडों से जुड़े जितने भी जमीन के सौदे पिछले वर्षों में हुए थे, वे सभी कानूनी रूप से पूरी तरह समाप्त हो गए हैं। भूखंडों को हड़पने के उद्देश्य से जो भी उपहार विलेख (गिफ्ट डीड), लीज डीड या सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत कराई गई रजिस्ट्रियां थीं, उन्हें राजस्व और प्रशासनिक रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया गया है। अदालत के इस फैसले से भू-माफियाओं और नियमों को ताक पर रखकर औने-पौने दामों में आरक्षित जमीन खरीदने वाले पूंजीपतियों को बहुत बड़ा कानूनी झटका लगा है, और जमीन का मालिकाना हक अब दोबारा योजना के अधीन सुरक्षित हो गया है।
दोषी अधिकारियों की भूमिका की जांच और भूखंडों की बहाली के निर्देश
अपने फैसले के अंतिम हिस्से में उच्च न्यायालय ने भीलवाड़ा जिला प्रशासन और स्थानीय नगर निकाय को सख्त हिदायत दी है कि वे तुरंत प्रभाव से इन सभी 184 भूखंडों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें योजना के मूल पात्र गाड़िया लुहार परिवारों के लिए बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करें। इसके साथ ही, न्यायालय ने इस पूरे भूमि घोटाले में शामिल रहे तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों और सांठगांठ करने वाले अन्य तत्वों की भूमिका की भी उच्च स्तरीय जांच करने के संकेत दिए हैं, ताकि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने वाले दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके और भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाहियों पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।









