छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती शांति वोरा का निधन, CM साय समेत कई नेताओं ने जताया शोक

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दुर्ग: छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है। अविभाजित मध्य प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे, उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कद्दावर स्तंभ रहे स्वर्गीय बाबूजी मोतीलाल वोरा की धर्मपत्नी शांति देवी वोरा का दुखद निधन हो गया है। उन्होंने 91 वर्ष की परिपक्व आयु में दुर्ग के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

पारिवारिक सूत्रों और अस्पताल प्रबंधन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शांति वोरा पिछले एक लंबे समय से उम्र संबंधी विभिन्न शारीरिक अस्वस्थताओं और बीमारियों से जूझ रही थीं। रविवार (12 जुलाई) की दोपहर अचानक उनकी तबीयत अत्यधिक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें बिना समय गंवाए दुर्ग स्थित शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आईसीयू (ICU) वार्ड में भर्ती कराया गया था। वहां वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके इलाज में जुटी हुई थी, लेकिन जीवन और मृत्यु के बीच चली इस जंग में डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद देर रात उनका देहांत हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम छोटे-बड़े नेताओं ने उनके जाने को एक युग का अंत बताते हुए गहरा शोक व्यक्त किया है।

शोक संतप्त वोरा परिवार से मिलने पहुंचे दिग्गज; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया पर प्रकट की अपनी संवेदनाएं

शांति वोरा जी का पूरा जीवन सादगी, उच्च विचारों और त्याग की प्रतिमूर्ति रहा है। उनके चले जाने से वोरा परिवार के साथ-साथ उनके समर्थकों को भी गहरा आघात लगा है। इस अपार दुख की घड़ी में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा शोक प्रकट किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि:

"वरिष्ठ राजनेता और दुर्ग शहर के पूर्व विधायक अरुण वोरा की पूज्य माताजी श्रीमती शांति वोरा के आकस्मिक निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। मन इस खबर से अत्यंत व्यथित है। वह एक आदर्श मातृशक्ति थीं, जिन्होंने बाबूजी स्वर्गीय मोतीलाल वोरा जी के लंबे राजनीतिक सफर में हमेशा उनके पीछे रहकर एक मजबूत संबल की भूमिका निभाई।"

मुख्यमंत्री साय ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि:

"मैं जगत के पालनहार प्रभु श्री रामचंद्र जी के श्रीचरणों में विनम्र प्रार्थना करता हूं कि वे पुण्यात्मा को अपने धाम में सर्वोच्च और शांतिपूर्ण स्थान प्रदान करें। साथ ही, इस असहनीय और अपार दुःख की घड़ी में शोकाकुल वोरा परिवार, उनके सुपुत्र अरुण वोरा और सभी करीबियों को इस वज्रपात को सहन करने का संबल और असीम शक्ति प्रदान करें। ओम् शांति।"

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी वोरा परिवार के प्रति जताया गहरा दुख; बाबूजी के संघर्षों में उनकी भूमिका को किया याद

शांति वोरा जी के अवसान पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर वोरा परिवार के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए एक शोक संदेश जारी किया।

भूपेश बघेल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि:

"कांग्रेस परिवार के मार्गदर्शक, अविभाजित मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल श्रद्धेय बाबू जी स्व. मोतीलाल वोरा की धर्मपत्नी एवं दुर्ग शहर के पूर्व विधायक भाई अरुण वोरा की आदरणीय माताजी शांति वोरा के गोलोकवासी होने का समाचार बेहद पीड़ादायक है। एक मातृ साये का उठ जाना किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ी क्षति होती है।"

पूर्व मुख्यमंत्री ने वोरा परिवार को सांत्वना देते हुए आगे लिखा कि:

"ईश्वर से यही करबद्ध प्रार्थना है कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में मोक्ष प्रदान करें। इस कठिन समय में मेरी गहरी संवेदनाएं वोरा परिवार के साथ हैं। भगवान इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति शोक संतप्त वोरा परिवार और उनके सभी सगे-संबंधियों को दे।"

सादगी और संघर्ष की प्रतिमूर्ति थीं शांति वोरा; अंतिम संस्कार में उमड़ेगा दिग्गजों का हुजूम

91 वर्षीय शांति वोरा का व्यक्तित्व बेहद सरल और मिलनसार था। जब स्वर्गीय मोतीलाल वोरा राजनीति के शिखर पर थे और दिल्ली-भोपाल में रहकर देश की सेवा कर रहे थे, उस कठिन दौर में भी शांति वोरा ने दुर्ग में रहकर पूरे परिवार को न केवल संभाला, बल्कि बच्चों को उच्च संस्कार भी दिए। यही कारण है कि वे केवल वोरा परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे दुर्ग और भिलाई अंचल की जनता के बीच 'अम्मा' के रूप में बेहद सम्मानित थीं।

उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके दुर्ग स्थित पैतृक निवास स्थान पर रखा गया है, जहां सुबह से ही राज्य के कई कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों की संख्या में आम नागरिक उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। पारिवारिक सदस्यों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ शिवनाथ नदी के तट पर स्थित मुक्तिधाम में किया जाएगा, जिसमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई वीवीआईपी (VVIP) नेताओं के शामिल होने की संभावना है।