कोरबा| कोरबा जिले के अंतर्गत नेशनल हाईवे-130 पर एक गंभीर ट्रेलर हादसे के बाद लगभग 12 घंटे तक भारी जाम लगा रहा। इस दौरान राहत और बचाव कार्य में बरती गई भारी लापरवाही के चलते अब पुलिस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि एक तरफ जहाँ पुलिस ने एनएचएआई के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ स्थानीय न्यायालय में परिवाद दायर कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ एनएचएआई ने भी अपनी लापरवाह एजेंसी पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोक दिया है।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
यह पूरी घटना 12 अक्टूबर की सुबह करीब 2 बजे की है। थाना बांगो मोरगा क्षेत्र के मदनपुर घाट और तारा घाटी के समीप नेशनल हाईवे-130 पर एक खराब ट्रेलर (क्रमांक CG10 BS 5980) सड़क किनारे खड़ी थी। इसी दौरान तारा घाटी से कटघोरा की ओर आ रहे एक अन्य ट्रेलर (क्रमांक CG10 BS 9436) के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए पीछे से उसमें जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण टक्कर के कारण दोनों वाहन बीच सड़क पर फंस गए, जिससे बिलासपुर-अंबिकापुर मुख्य मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया।
घंटों फंसे रहे मरीज, महिलाएं और यात्री
हादसे के बाद हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। बसों में सफर कर रहे यात्री, एंबुलेंस में फंसे गंभीर मरीज, तथा ट्रेन और उड़ानों के लिए निकले आम नागरिक घंटों तक जाम में जूझते रहे। सूचना मिलते ही थाना बांगो और चौकी मोरगा का पुलिस बल, हाईवे पेट्रोलिंग तथा डायल 112 की टीमें तुरंत मौके पर पहुँची और यातायात सुचारू करने का प्रयास करने लगीं। पुलिस ने मौके से ही एनएचएआई के अधिकारियों को कई बार फोन किया, लेकिन उनकी ओर से कोई त्वरित प्रतिक्रिया या ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पुलिस ने एनएचएआई अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराया परिवाद
कटघोरा के एसडीओपी विजय सिंह ठाकुर ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सड़क पर लगभग 12 घंटे तक भयंकर जाम लगा रहा। संबंधित विभाग के अधिकारियों को जब दूरभाष पर संपर्क किया गया, तो उनके फोन स्विच ऑफ मिले, जिससे राहत कार्यों में भारी बाधा आई।
पुलिस का स्पष्ट आरोप है कि एनएचएआई के अधिकारियों ने अपने पदीय दायित्वों के प्रति घोर उदासीनता और लापरवाही बरती है तथा लोक सेवक के कर्तव्यों के निष्पादन में सहायता नहीं की। इस गंभीर लापरवाही को आधार बनाते हुए एनएचएआई के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 222A के तहत माननीय न्यायालय कटघोरा में परिवाद दायर किया गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी संकट के समय सहायता न करने वाली ऐसी एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
एनएचएआई ने भी अपनी एजेंसी पर लगाया 10 लाख का जुर्माना
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद एनएचएआई ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जाँच बिठाई। जाँच में यह तथ्य सामने आया कि चोटिया टोल प्लाजा के पास हुई इस दुर्घटना के दौरान अधिकृत एजेंसी 'मेसर्स रविन्द्र सिंह' का प्रोजेक्ट मैनेजर मौके पर मौजूद नहीं था। इसके अलावा मौके पर क्रेन ऑपरेटर उपलब्ध नहीं था और रिकवरी वाहनों में पर्याप्त ईंधन तक नहीं था।
इतना ही नहीं, आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर '1033' पर बार-बार सूचना देने के बावजूद समय पर सहायता मौके पर नहीं पहुँची। इसे घटना प्रबंधन और हाईवे पेट्रोलिंग के सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन मानते हुए एनएचएआई ने संबंधित एजेंसी पर 10 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है।









