सिरोही। सरकारी दस्तावेजों में किसी जीवित इंसान को कागजों पर मृत दर्ज कर देना केवल एक लिपिकीय चूक नहीं है, बल्कि यह उस व्यक्ति के अस्तित्व, वैधानिक अधिकारों और नागरिक पहचान पर एक बहुत बड़ा आघात है। राजस्थान के सिरोही जिले के अंतर्गत आने वाले पिण्डवाड़ा नगर पालिका मंडल से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। यहां एक जीवित नागरिक को सरकारी फाइलों में मृत दिखाकर उसका नाम जन आधार कार्ड से विलोपित करने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस पूरे षड्यंत्र में नगर पालिका के तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा विभाग के अधिशाषी अधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर (डीएससी) और गोपनीय आईडी-पासवर्ड का अनैतिक और कूट-रचित इस्तेमाल करने के संगीन आरोप लगे हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत के हस्तक्षेप (इस्तगासे) के बाद पिण्डवाड़ा थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस तकनीकी साक्ष्यों को खंगालने में जुट गई है।
नया दस्तावेज बनवाने पहुंचे पीड़ित के उड़े होश और खुद को पाया मृत
पुलिस को सौंपी गई आधिकारिक शिकायत के मुताबिक, झाड़ोली क्षेत्र के निवासी लक्ष्मण माली पुत्र बाबूलाल माली ने इस पूरे धोखाधड़ी के खेल का पर्दाफाश किया है। लक्ष्मण का विवाह सोनू माली के साथ संपन्न हुआ था और नियमानुसार दोनों का एक संयुक्त जन आधार कार्ड बना हुआ था, जिसमें उनकी पत्नी को नियमानुसार परिवार का मुखिया नामांकित किया गया था। साल 2020 में दोनों के बीच आपसी कलह और वैचारिक मतभेद बढ़ने के कारण वे कानूनी रूप से अलग-अलग रहने लगे। इसी साल जनवरी 2026 में जब पीड़ित लक्ष्मण माली अपनी पहचान से जुड़ा एक नया जन आधार कार्ड बनवाने के लिए स्थानीय ई-मित्र केंद्र पर पहुंचे, तो वहां ऑनलाइन पोर्टल पर बार-बार तकनीकी त्रुटि (एरर) दिखाई देने लगी। जब लक्ष्मण ने ई-मित्र संचालक से इसका मुख्य कारण जानना चाहा, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर आई जानकारी देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, उन्हें 6 मई 2020 को ही कागजों में मृत घोषित किया जा चुका था और इसी वजह से उनका नाम जन आधार डेटाबेस से हमेशा के लिए काट दिया गया था।
नगर पालिका के आधिकारिक पत्र से फूटा कंप्यूटर ऑपरेटर का भांडा
इस पूरे सुनियोजित खेल का राजफाश तब हुआ जब पिण्डवाड़ा नगर पालिका मंडल के वर्तमान अधिशाषी अधिकारी द्वारा जारी किया गया एक अत्यंत गोपनीय और आधिकारिक पत्र पटल पर आया। इस पत्र में साफ तौर पर यह प्रमाणित किया गया कि नगर पालिका के तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर परेश कुमार माली ने विभाग की तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी दीपिका वीरवाल के डिजिटल सिग्नेचर (डीएससी) और मुख्य लॉगिन क्रेडेंशियल्स (आईडी और पासवर्ड) का पूरी तरह से दुरुपयोग किया था। ऑपरेटर ने अवैध रूप से सिस्टम में सेंध लगाकर एक जीवित इंसान को दस्तावेजों में मृत दर्शाने की घिनौनी और कूट-रचित कार्रवाई को अंजाम दिया था। पालिका प्रशासन ने इस कृत्य को गंभीर आपराधिक श्रेणी और वित्तीय व प्रशासनिक तंत्र की बड़ी सुरक्षा चूक माना है, जिसने सरकारी डिजिटल सुरक्षा प्रणाली और कर्मचारियों की एक्सेस लिमिटेशन पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
पत्नी व ई-मित्र संचालक सहित कई रसूखदारों पर मुकदमा और डिजिटल जांच शुरू
पीड़ित लक्ष्मण माली की तहरीर पर पुलिस ने तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर परेश कुमार माली, पीड़ित की पत्नी सोनू माली, वीरवाड़ा क्षेत्र के ई-मित्र संचालक हेमंत कुमार माली तथा तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी दीपिका वीरवाल सहित इस साजिश में शामिल अन्य परदे के पीछे के किरदारों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर ली है। शिकायत में आरोप है कि लक्ष्मण को भारी आर्थिक, सामाजिक और कानूनी चोट पहुंचाने के लिए इस पूरी साजिश को रचा गया था। पिण्डवाड़ा पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 212(ए), 217(ए), 316(3) और 61(2) जैसी संगीन धाराओं को शामिल किया है, जो सीधे तौर पर जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी हैं। मामले की कमान संभाल रहे सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) ओमप्रकाश अब जन आधार पोर्टल के लॉग्स, आईपी एड्रेस, सिस्टम एक्सेस टाइमिंग और डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग की बारीकी से फोरेंसिक और तकनीकी जांच कर रहे हैं ताकि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।









