सिरोही सीट फिर अनारक्षित, चौथी बार बदले चुनावी समीकरण; दावेदारों की बढ़ी धड़कन

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सिरोही। स्वायत्त शासन विभाग द्वारा राजस्थान की 41 जिला परिषदों के प्रमुख पदों के लिए जारी की गई आरक्षण लॉटरी के बाद सिरोही जिले का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। सिरोही जिला परिषद प्रमुख का पद लगातार चौथी बार अनारक्षित (सामान्य) घोषित किया गया है (हालांकि वर्ष 2015 में यह सीट अनारक्षित महिला वर्ग के लिए थी)। सीट सामान्य रहने से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस—दोनों ही प्रमुख दलों में टिकट पाने की होड़ और अंदरूनी खींचतान तेज होना तय है।

परिसीमन का असर: 21 से बढ़कर 27 हुए वार्ड

इस बार सिरोही जिला परिषद के चुनावी समीकरण पहले से काफी अलग होंगे। नए परिसीमन के तहत जिले में वार्डों की संख्या 21 से बढ़ाकर 27 कर दी गई है। क्षेत्रों के इस पुनर्गठन और विस्तार के कारण पूरे जिले का सियासी गणित बदल गया है। दोनों दलों के स्थानीय रणनीतिकारों और कार्यकर्ताओं ने नए सिरे से चुनावी गोटियां बिछाना शुरू कर दिया है।

बीजेपी बनाम कांग्रेस: पिछले तीन चुनावों का गणित

सिरोही जिला परिषद के पिछले तीन कार्यकालों के परिणाम काफी दिलचस्प रहे हैं:

  • वर्ष 2021: सामान्य सीट पर बीजेपी के अर्जुनराम पुरोहित ने 17 मत हासिल कर आसान जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी हरीश चौधरी को महज 5 वोट मिले थे।

  • वर्ष 2015: अनारक्षित महिला सीट से बीजेपी की पायल परसरामपुरिया जिला प्रमुख बनी थीं।

  • उससे पहले: कांग्रेस के चंदनसिंह देवड़ा जिला प्रमुख चुने गए थे। उस समय बोर्ड में बीजेपी के पास बहुमत था, लेकिन क्रॉस वोटिंग का फायदा उठाकर कांग्रेस ने सीट पर कब्जा जमाया था।

ऐतिहासिक दबदबा और वर्तमान चुनौती

यदि बीते दो दशकों के इतिहास को देखें तो वर्ष 1990 के बाद से सिरोही जिला परिषद में अधिकांश समय कांग्रेस का ही दबदबा रहा था। हालांकि, पिछले दो चुनावों में लगातार जीत हासिल कर बीजेपी ने इस गढ़ में अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। अब फिर से सीट अनारक्षित होने के कारण दोनों ही दल किसी भी सूरत में यह प्रमुख पद गंवाना नहीं चाहते।