35 लाख में खरीदा गया था SI भर्ती का सॉल्वड पेपर, जांच में बड़ा खुलासा

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जयपुर: सब-इंस्पेक्टर भर्ती पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई, कोचिंग संचालक और उसका साथी गिरफ्तार

राजस्थान की बहुचर्चित उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा-2021 के प्रश्नपत्र लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। जांच एजेंसी ने इस पूरे घोटाले की मुख्य कड़ियों को जोड़ते हुए तत्कालीन 'एमएडी फाउंडेशन कोचिंग' (शाहपुरा) के संचालक दिनेश किलका और उसके सहयोगी राकेश कुमार को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। अदालत ने दोनों आरोपियों की संलिप्तता को देखते हुए उन्हें 4 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है, जहाँ अधिकारी उनसे इस सिंडिकेट के नेटवर्क और करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन के बारे में गहन पूछताछ कर रहे हैं। इस हाई-प्रोफाइल रैकेट में अब तक कुल 149 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

लाखों रुपये का सौदा और फर्जी चयन का खेल

इस पूरे गोरखधंधे की जांच में यह बात सामने आई है कि कोचिंग चलाने वाले दिनेश किलका और सीकर के रहने वाले राकेश कुमार ने मिलकर परीक्षा में सेंध लगाने का जाल बुना था। इन दोनों ने मिलकर अविनाश पलसानिया और परमेश चौधरी नाम के दो अभ्यर्थियों को परीक्षा आयोजित होने से पहले ही हल किया हुआ प्रश्नपत्र (सॉल्व्ड पेपर) बेच दिया था और उसकी पूरी तैयारी भी करवाई थी। इस सौदे के बदले आरोपियों ने अविनाश से 20 लाख रुपये वसूले थे, जिसने लीक पेपर की बदौलत परीक्षा में 86वीं रैंक हासिल की और सब-इंस्पेक्टर बन बैठा। वहीं दूसरे अभ्यर्थी परमेश से 16 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम ली गई थी, जिसने अंतिम योग्यता सूची में 180वां स्थान पाया था।

फरारी के बाद ऐसे शिकंजे में आए मुख्य आरोपी

SOG ने इस जालसाजी का पर्दाफाश करते हुए सबसे पहले फर्जी तरीके से चयनित हुए दोनों अभ्यर्थियों अविनाश और परमेश को गिरफ्तार किया था। अपने कोचिंग के छात्रों के पकड़े जाने की भनक लगते ही मुख्य साजिशकर्ता दिनेश किलका अंडरग्राउंड हो गया था, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी। जांच एजेंसी के पुलिस अधीक्षक ने दिनेश की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम भी तय किया था। आखिरकार, लंबे समय की लुका-छिपी के बाद SOG की टीम ने जाल बिछाकर दिनेश को दबोच लिया, जिसके बाद इस रैकेट के आगे के रास्ते साफ हुए।

पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

दिनेश किलका के पकड़े जाने के बाद जब अधिकारियों ने उससे सख्ती से पूछताछ की, तो इस सिंडिकेट की एक और बड़ी परत खुलकर सामने आ गई। दिनेश ने कबूल किया कि उसने यह लीक पेपर खुद 35 लाख रुपये देकर राकेश कुमार से खरीदा था, जिसके बाद SOG ने दिनेश की निशानदेही पर तुरंत कार्रवाई करते हुए अगले ही दिन राकेश कुमार को भी दबोच लिया। जब कड़ियों को और पीछे ले जाया गया तो पता चला कि राकेश के पास यह पेपर गिरोह के एक अन्य सदस्य अरुण शर्मा के माध्यम से आया था, जिसे जांच एजेंसी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस को उम्मीद है कि इस रिमांड अवधि के दौरान कई और बड़े चेहरों से नकाब हटेगा और आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।