रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ई-बस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0, वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना और 15वें वित्त आयोग से जुड़े विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी योजनाओं को समयबद्ध, वित्तीय रूप से व्यावहारिक और जनसुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए। इस उच्चस्तरीय बैठक में सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ई-बस योजना के लिए व्यापक रूट प्लान और किफायती किराए के निर्देश
प्रमुख सचिव ने रायपुर में संचालित होने वाली ई-बसों के लिए एक सुव्यवस्थित और जनोपयोगी रूट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बसों के मार्ग में शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्रों को शामिल किया जाए। इसके साथ ही, यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पीपीपी मॉडल पर बस स्टॉप विकसित करने, तकनीक आधारित यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने और आम जनता की जेब के अनुकूल युक्तिसंगत किराया तय करने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने को कहा गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 को सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य
योजना की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि सभी निर्माणाधीन आवासों का कार्य मिशन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए नगरीय निकायों को साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित कर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, जिला कलेक्टरों को नियमित समीक्षा करने तथा पात्र हितग्राहियों को निर्माण की वास्तविक प्रगति के आधार पर समय पर किस्तों का भुगतान करने को कहा गया, ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए।
वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं की वित्तीय और तकनीकी समीक्षा
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए सोनमणि बोरा ने चिन्हित क्लस्टरों की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और तकनीकी व्यवहार्यता के गहन परीक्षण का निर्देश दिया। उन्होंने पीपीपी मॉडल के माध्यम से निजी निवेशकों की रुचि और भागीदारी का आकलन करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार, नगरीय निकायों और निजी भागीदारों के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों का संतुलन इस प्रकार तय किया जाए कि निकाय पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
15वें वित्त आयोग के बजट से समग्र अधोसंरचना विकास पर जोर
प्रमुख सचिव ने 15वें वित्त आयोग से प्राप्त वित्तीय राशि का उपयोग सुनियोजित और दीर्घकालिक योजनाओं के आधार पर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण एवं चौड़ीकरण का कार्य टुकड़ों में करने के बजाय शहर के मास्टर प्लान, यातायात के दबाव और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाए। साथ ही, शहरों में पेयजल, सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं का 'गैप एनालिसिस' (अंतर का विश्लेषण) कर प्राथमिकताओं के आधार पर विकास कार्य स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए।









