पति-पत्नी की दर्दनाक मौत से इलाके में सनसनी, एक गोली ने ली दो जान

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रामपुर शहर के मुख्य बाजार इलाके में रहने वाले 50 वर्षीय बर्तन व्यवसाई सुनील रस्तोगी और उनकी 45 वर्षीय पत्नी नेहा रस्तोगी की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक और सनसनी की लहर दौड़ गई है। बृहस्पतिवार की सुबह व्यापारी ने अपनी लाइसेंसी 315 बोर की राइफल से खुद को और अपनी पत्नी को गोली मार ली। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि व्यापारी ने अपनी पत्नी को सीने से सटाकर एक ही गोली चलाई, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटनास्थल से पुलिस को एक डायरी मिली है, जिसने इस आत्मघाती कदम के पीछे की वजहों का खुलासा किया है।

सुबह गूंजी गोली की आवाज, कमरे में मिले रक्तरंजित शव

पारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार, सुनील रस्तोगी के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा एक बेटा पीयूष और बेटी कृषि हैं। वे बर्तन के व्यवसाय से अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से परिवार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।

बृहस्पतिवार सुबह करीब 7:30 बजे घर की पहली मंजिल से अचानक गोली चलने की तेज आवाज आई। आवाज सुनकर नीचे की मंजिल पर मौजूद बेटा, बेटी और आसपास के पड़ोसी तुरंत ऊपर पहुंचे। वहां कमरे का नजारा देखकर सबके होश उड़ गए; दोनों के शव खून से लथपथ हालत में पड़े थे। सूचना मिलने पर क्षेत्राधिकारी (सीओ) देवकीनंदन और कोतवाल प्रदीप कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने भी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए।

लोहे की रॉड से ट्रिगर दबाने की आशंका; पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि

अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनुराग सिंह ने बताया कि शव के पास से राइफल के साथ ही स्टील की एक हल्की मुड़ी हुई रॉड भी बरामद हुई है। प्रारंभिक जांच और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि सुनील ने राइफल की लंबाई अधिक होने के कारण ट्रिगर तक हाथ न पहुंचने पर उस रॉड की मदद से ट्रिगर दबाया होगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, गोली सीने से पूरी तरह सटाकर मारी गई थी, जिसके कारण एक ही बुलेट से दोनों की जान चली गई। पत्नी के शरीर से गोली के अवशेष मिले हैं।

डायरी में लिखा दर्द: 'बेटा श्रवण कुमार की तरह सेवा कर रहा था, पर अब मैं बोझ नहीं बन सकता'

पुलिस अधीक्षक (एसपी) सोमेंद्र मीणा ने बताया कि मृतक व्यापारी द्वारा लिखी गई 15 पन्नों की एक डायरी बरामद हुई है, जिससे उनके गहरे अवसाद और मानसिक तनाव का पता चलता है। डायरी में उन्होंने अपने भतीजे गौरव को संबोधित करते हुए लिखा था कि जुलाई 2024 में एक पारिवारिक आयोजन के बाद उनके कूल्हे में गंभीर दर्द (गठिया) शुरू हुआ, जो इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुआ। इसके बाद नवंबर 2024 में उनकी पत्नी को ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हो गई, जिसके इलाज में भारी कर्ज और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।

सुनील ने डायरी में भावुक होते हुए लिखा कि उनका बेटा पीयूष पिछले 18 महीनों से "श्रवण कुमार" की तरह बीमार माता-पिता की दिन-रात सेवा कर रहा था। लेकिन अपनी शारीरिक लाचारी और पत्नी की गंभीर स्थिति को देखकर वे अब बच्चों पर और बोझ नहीं बनना चाहते थे। उन्होंने लिखा, "मैं अपनी पत्नी को भी अपने साथ ले जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना, मैं अपनी पत्नी का अपराधी और बच्चों का बदनसीब पिता कहलाने के लायक भी नहीं हूं।" डायरी में उन्होंने बच्चों के प्रति अपना गहरा स्नेह व्यक्त करते हुए बेटे को व्यापार संभालने, बेटी के विवाह और संपत्ति से जुड़ी जरूरी वसीयत की बातें भी लिखी हैं।

बीमारियों और हादसों ने तोड़ी कमर

पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह परिवार दोहरी मार झेल रहा था। एक तरफ जहां सुनील रस्तोगी स्वयं गंभीर गठिया रोग के कारण चलने-फिरने से लाचार हो रहे थे, वहीं उनकी पत्नी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ रही थीं। इसके अलावा, अगस्त 2025 में पत्नी और बेटे के साथ हुए एक सड़क हादसे ने उनकी मानसिक स्थिति को और ज्यादा कमजोर कर दिया था। पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया है और मामले के सभी कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है।