इंडोनेशिया भूकंप में 53 लोगों की मौत, हजारों लोग विस्थापित; राहत-बचाव जारी

0
10

जकार्ता (इंडोनेशिया): पूर्वी इंडोनेशिया में आए 7.7 तीव्रता के अत्यंत शक्तिशाली भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्यों के दौरान फ्लोरेस द्वीप पर छह और शव बरामद किए गए हैं, जिससे इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है। मुख्य भूकंप के बाद लगातार आ रहे तेज आफ्टरशॉक्स (झटकों) के खौफ के कारण दहशत में आए हजारों विस्थापित लोगों ने अपनी रातें खुले आसमान के नीचे तंबू या तारपीन के साये में बिताई हैं।

बचाव दल फ्लोरेस द्वीप के छह सबसे अधिक प्रभावित जिलों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के मलबे में दबे लोगों की तलाश में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इन दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों में मंगराई, ईस्ट मंगराई और नागेकेओ जैसे इलाके प्रमुख रूप से शामिल हैं। आपदा के कारण बड़े पैमाने पर संचार व्यवस्था (कम्युनिकेशन नेटवर्क) ठप होने और बिजली गुल रहने की वजह से खोज और राहत अभियानों में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

बड़े पैमाने पर मकान और बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त

इस भीषण आपदा की वजह से 900 से अधिक रिहायशी मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं, जबकि 450 अन्य घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके चलते लगभग 5,000 बेघर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर बनाए गए अस्थायी शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य भूकंप के बाद से अब तक 995 से अधिक आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 46 झटके स्थानीय स्तर पर स्पष्ट रूप से महसूस किए गए। इस त्रासद घटना में कम से कम 135 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

दूसरी ओर, लगातार हुए भूस्खलन के कारण महत्वपूर्ण 'ट्रांस-फ्लोरेस राजमार्ग' के कई हिस्से मलबे से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे सुदूर इलाकों तक राहत सामग्री और मेडिकल टीम पहुंचाने में भारी कठिनाई आ रही है। इसके बावजूद राहत कर्मी प्रभावित परिवारों के बीच खाद्यान्न (चावल), भोजन, पीने का शुद्ध पानी, कंबल और जीवन रक्षक दवाइयां वितरित करने में जुटे हैं। बिजली और संचार माध्यमों को दोबारा सुचारू करना तथा दुर्गम गांवों तक पहुंच बनाना इस वक्त प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

रिंग ऑफ फायर पर स्थित होने के कारण अत्यधिक संवेदनशील है क्षेत्र

शनिवार की सुबह महज 10 किलोमीटर की उथली गहराई में आए इस शक्तिशाली भूकंप के बाद शुरुआती दौर में सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई थी, जिसे स्थिति का जायजा लेने के बाद बाद में वापस ले लिया गया। भूगर्भिक रूप से 'इंडोनेशिया पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस देश को अक्सर विनाशकारी भूकंपों और भयानक ज्वालामुखी विस्फोटों का सामना करना पड़ता है। इतिहास गवाह है कि इसी फ्लोरेस द्वीप पर वर्ष 1992 में भी एक बेहद शक्तिशाली भूकंप और उसके बाद आई सुनामी ने भयंकर तबाही मचाई थी, जिसमें लगभग 2,500 लोगों की जान चली गई थी। यह ऐतिहासिक तथ्य इस पूरे भौगोलिक क्षेत्र की अत्यधिक भूकम्पकीय संवेदनशीलता को पूरी तरह उजागर करता है।