राफेल को टक्कर देगा अमेरिका का फ्यूरी! जानिए इस लड़ाकू विमान की ताकत

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वॉशिंगटन: अमेरिकी वायुसेना ने भविष्य के हवाई युद्ध का चेहरा बदलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए अपने अत्याधुनिक मानवरहित (Unmanned) लड़ाकू विमान 'एफवायक्यू-44ए फ्यूरी' (FYQ-44A Fury) का सफल ऑपरेशनल ट्रायल किया है। कैलिफोर्निया के प्रसिद्ध एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर हुए इन परीक्षणों के दौरान विमान की ऑटोनोमस (स्वायत्त) फ्लाइट और युद्धक क्षमताओं को बारीकी से परखा गया। इस विमान को अमेरिका के 'कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (CCA) प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है।

इंसानी पायलटों का 'लॉयल विंगमैन' बनेगा यह ड्रोन

इस हाईटेक विमान का मुख्य उद्देश्य युद्ध के मैदान में इंसानी पायलट द्वारा उड़ाए जाने वाले एफ-35 या राफेल जैसे लड़ाकू विमानों के साथ एक 'लॉयल विंगमैन' (वफादार साथी) के रूप में काम करना है। यह पूरी तरह ऑटोनोमस ड्रोन हवाई हमले करने, दुश्मन के राडार को चमका देने वाली 'इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर' तकनीक का इस्तेमाल करने और खतरनाक खुफिया मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है, जिससे हवाई जंग को और भी अधिक घातक बनाया जा सकेगा।

वैश्विक रक्षा समीकरणों के बीच अमेरिका का बड़ा दांव

यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत द्वारा फ्रांस से लगभग 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के करार के बाद दक्षिण एशिया के रक्षा समीकरणों में बड़ी खलबली मची हुई है। अपने स्वदेशी तेजस और अगली पीढ़ी के एएमसीए (AMCA) प्रोजेक्ट्स के साथ भारत आने वाले दशकों में एक ग्लोबल डिफेंस पावर बनने की राह पर है। इन सब वैश्विक घटनाक्रमों के बीच, अमेरिका के इस परीक्षण ने रक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि यह तकनीक पारंपरिक राफेल विमानों के मुकाबले कहां टिकती है।

पहली बार मानवरहित विमान को मिला 'फाइटर' का आधिकारिक दर्जा

एफवायक्यू-44ए की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता यह है कि अमेरिकी वायुसेना ने पहली बार किसी बिना पायलट वाले विमान को आधिकारिक रूप से 'फाइटर कैटेगरी' का दर्जा दिया है। मिलिट्री कोडिंग के अनुसार, इसके नाम में 'Y' का अर्थ प्रोटोटाइप, 'F' का अर्थ फाइटर और 'Q' का अर्थ अनमैन्ड (मानवरहित) है। यह तकनीक राफेल जैसे पारंपरिक लड़ाकू विमानों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसे उड़ाने के लिए न तो विमान के अंदर किसी पायलट की जरूरत होती है और न ही जमीन पर बैठे किसी रिमोट ऑपरेटर की।

सिर्फ एक लैपटॉप से अपलोड हुआ मिशन, ऑटोनोमस टेकऑफ

इस सफल ट्रायल के दौरान इंजीनियर्स और वायुसेना के जवानों ने केवल एक लैपटॉप की सहायता से विमान में मिशन प्लान अपलोड किया। इसके बाद इस अत्याधुनिक विमान ने पूरी तरह ऑटोनोमस (स्वचालित) तरीके से रनवे पर टैक्सींग की और खुद ही टेकऑफ किया। उड़ान के दौरान हवा में ही जरूरी निर्देश प्राप्त करने और अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद यह सुरक्षित बेस पर लौट आया। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे बेहद कम तकनीकी कर्मचारियों और बिना किसी भारी-भरकम बुनियादी ढांचे के भी तेजी से ऑपरेट किया जा सकता है, जो भविष्य के युद्धों में बिना इंसानी जान जोखिम में डाले दुश्मन को नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखता है।