भारत-अफ्रीका के रिश्तों में बढ़ेगा सहयोग, व्यापार से लेकर AI और डिजिटल तकनीक तक पर फोकस

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अदीस अबाबा: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और अफ्रीकी महाद्वीप के देशों के बीच ऐतिहासिक साझेदारी को साझा एकजुटता, समान अवसरों और आत्मनिर्भरता की भावना पर आधारित बताया है। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका दोनों की विकास संबंधी प्राथमिकताएं औद्योगीकरण, आर्थिक प्रगति और अपने भविष्य को स्वयं निर्धारित करने की आकांक्षा से जुड़ी हैं। इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा स्थित अडवा मेमोरियल म्यूजियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने दोनों पक्षों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विकासशील देशों को औद्योगीकरण के पूर्ण अवसर मिलने चाहिए और सस्ते सामान की अत्यधिक आमद या अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सीमित करने जैसे कदम उनकी विकास यात्रा में बाधा नहीं बनने चाहिए।

विभिन्न क्षेत्रों में भारत और अफ्रीका के बीच व्यापारिक संबंध हुए मजबूत

विदेश मंत्री ने भारत और अफ्रीकी देशों के बीच तेजी से बढ़ते व्यापार एवं निवेश संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इनमें विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), दूरसंचार, दवा उद्योग (फार्मास्युटिकल्स), ऊर्जा, खनन, कृषि, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सेवाएं और सूचना प्रौद्योगिकी शामिल हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता को लेकर भारत और अफ्रीका की साझा सोच इस दीर्घकालिक साझेदारी की सबसे मजबूत नींव है। दोनों पक्षों के लिए आर्थिक विकास के साथ-साथ अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना और विकास की दिशा स्वयं तय करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अफ्रीका में 220 से अधिक विकास परियोजनाओं को भारत का समर्थन

विदेश मंत्री ने बताया कि अफ्रीकी देशों के साथ भारत की विकास साझेदारी हमेशा संबंधित देशों की वास्तविक जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जाती है।

जयशंकर के अनुसार, भारत ने बिजली उत्पादन, विद्युत पारेषण, जल प्रबंधन, कृषि, रेलवे, स्वास्थ्य सेवाओं, विनिर्माण और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे बुनियादी क्षेत्रों में 220 से अधिक विशाल परियोजनाओं का समर्थन किया है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य अफ्रीकी देशों की विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करना और स्थानीय क्षमताओं को मजबूत बनाने में सहयोग देना है। भारत की विकास साझेदारी में परियोजनाओं के साथ-साथ कौशल विकास और मानव संसाधन निर्माण को भी सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

70 हजार से अधिक अफ्रीकी छात्रों और पेशेवरों को मिला भारत से सहयोग

जयशंकर ने भारत की क्षमता निर्माण पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में 70,000 से अधिक अफ्रीकी छात्रों और पेशावर युवाओं को भारत की ओर से छात्रवृत्ति और सहायता प्राप्त हुई है।

शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास से जुड़े ये प्रयास भारत-अफ्रीका संबंधों को अधिक व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे दोनों पक्षों के बीच ज्ञान, व्यावहारिक अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने के नए अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं।

डिजिटल तकनीक, 'इंडिया स्टैक' और एआई (AI) पर बढ़ेगा सहयोग

भारत और अफ्रीका के बीच भविष्य के सहयोग में आधुनिक तकनीक की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्री ने डिजिटल गवर्नेंस और 'इंडिया स्टैक' से जुड़ी पहलों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि डिजिटल शासन व्यवस्था में व्यवस्थागत बदलाव लाने की अभूतपूर्व क्षमता है और अफ्रीकी देशों के साथ इंडिया स्टैक पर सहयोग के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त, अंतरिक्ष तकनीक, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को उन्होंने भावी सहयोग के नए और महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया। डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में सहयोग से सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने और आर्थिक विकास से जुड़ी नई संभावनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य सुरक्षा और वैश्विक कल्याण के क्षेत्र में भी भारत की अग्रणी भूमिका

विदेश मंत्री ने अफ्रीका की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत के प्रयासों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक महामारी के दौरान और उसके बाद की गई वैक्सीन सहायता, दवा उद्योग में प्रत्यक्ष निवेश और कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली उन्नत 'भाभाट्रॉन' मशीनों के उपहार का विशेष उल्लेख किया। स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग भारत-अफ्रीका साझेदारी का एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत दवाओं, चिकित्सा तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी पहलों के माध्यम से दोनों पक्ष अपनी सहभागिता बढ़ा रहे हैं।

इथियोपिया के साथ एआई (AI) और विज्ञान के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपनी एक पोस्ट में कहा कि भारत और इथियोपिया की सोच 'AI for All' के वैश्विक दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल खाती है। उन्होंने इस तकनीक की मदद से विकास और समावेशी समृद्धि को आगे बढ़ाने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।

अपने इथियोपिया दौरे के दौरान उन्होंने अदीस अबाबा स्थित 'इथियोपिया साइंस म्यूजियम' का भी दौरा किया। उन्होंने इसे तकनीक-आधारित और ज्ञान-केंद्रित अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में देश के प्रयासों का एक सशक्त प्रतीक बताया। जयशंकर के मुताबिक, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग आने वाले समय में भारत-इथियोपिया रणनीतिक साझेदारी में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

तीन अफ्रीकी देशों की यात्रा के अंतिम चरण में अदीस अबाबा पहुंचे जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर कोट डी आइवर से इथियोपिया पहुंचे थे, जो उनकी तीन अफ्रीकी देशों की आधिकारिक यात्रा का अंतिम चरण था। इस बहुस्तरीय दौरे में घाना भी शामिल था। पूरी यात्रा के दौरान भारत-अफ्रीका संबंधों में व्यापार, निवेश, औद्योगीकरण, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे विषय मुख्य चर्चा के बिंदु रहे।

भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सहयोग का दायरा पारंपरिक व्यापारिक संबंधों से आगे बढ़कर अब डिजिटल तकनीक, विज्ञान और नवाचार जैसे आधुनिक क्षेत्रों तक विस्तार ले रहा है। जयशंकर के संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि साझा विकास, आत्मनिर्भरता और एक-दूसरे की प्राथमिकताओं का सम्मान ही भविष्य में इस ऐतिहासिक साझेदारी के मुख्य स्तंभ बने रहेंगे।