Wednesday, February 21, 2024
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Iran Drone Attack: लाल सागर में युद्ध जैसा माहौल, भारत का झंडा लगाए जहाज पर ड्रोन से हमला

Iran Drone Attack Ship: इजरायल और हमास युद्ध की आंच अब भारत तक पहुंचने लगी है। पेंटागन ने कहा कि शनिवार को भारत के तट पर जापान के स्वामित्व वाले एक जहाज को ‘ईरान से दागे गए’ ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया था। अभी तक लाल सागर में हूतियों की ओर से जहाजों को निशाना बनाया जा रहा था। लेकिन अब इस हमले ने लाल सागर से अलग वाणिज्यिक शिपिंग के लिए नए खतरे का संकेत दिया है। भारत के तट से 370 किमी की दूरी पर एक जहाज पर को हमला किया गया। यह एक ड्रोन हमला था। पेंटागन के मुताबिक यह हमला ईरान की ओर से किया गया था। अभी तक सिर्फ लाल सागर में ही जहाजों को निशाना बनाया जा रहा था। लेकिन अब संघर्ष फैलने लगा है।

अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला कल रात लगभग 10:30 बजे के आसपास हुआ। इसके कुछ घंटों बाद भारतीय तट पर एक और टैंकर पर हमला हुआ, जिसके लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया। अमेरिकी सेना ने आज कहा कि भारत जा रहा एक कच्चे तेल का टैंकर लाल सागर में यमन के हौथी विद्रोहियों द्वारा दागे गए ड्रोन की चपेट में आ गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर लिखा, ”एम/वी साईबाबा में भारतीय सवार थे। इस हमले के बाद किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि जहाज ने एक अमेरिकी जहाज को एक इमरजेंसी कॉल भेजा।” अमेरिकी सेना ने कहा कि उनमें से एक पर नॉर्वेजियन का झंडा लगा था। एक दूसरे जहाज एम/वी साईबाबा ने बताया कि उस पर एक तरफा हमला करने वाले ड्रोन ने हमला किया था। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अमेरिकी सेना ने कहा कि यूएसएस लैबून ने इन हमलों से संकट पूर्ण कॉल का जवाब दिया। आपको बता दें कि इन घटनाओं से पहले अमेरिकी विध्वंसक ने यमन के हौथी-नियंत्रित क्षेत्रों से आने वाले चार ड्रोनों को मार गिराया था।

कहां पर हुआ हमला

हमला भारत के तट से 200 समुद्री मील (370 किमी) दूर हुआ। साथ ही यह भी कहा गया कि अमेरिकी नौसेना का कोई जहाज आसपास नहीं था। इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब पेंटागन ने ईरान पर सीधे हमले का आरोप लगाया है। पेंटागन के बयान में कहा गया है कि एमवी केम प्लूटो जहाज लाइबेरिया के झंडे के साथ चल रहा था। इसे एक डच इकाई की ओर से संचालित किया गया था। हालांकि जहाज का स्वामित्व एक जापानी कंपनी के पास है।

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