बीजिंग: भारत-चीन सीमा पर जारी गतिविधियों के बीच चीन ने बुधवार को बयान जारी करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति फिलहाल आमतौर पर स्थिर है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश के सीमांत इलाकों में चीनी सेना की बढ़ती गतिविधियों से जुड़ी खबरों पर चीन ने कोई सीधा जवाब देने से परहेज किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने स्पष्ट किया कि दोनों देश कूटनीतिक और सैन्य वार्ता के जरिए शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हैं।
कूटनीतिक वार्ता और सीमा पर सहमति
प्रवक्ता गुओ जियाकुन के अनुसार, हाल ही में भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में दोनों पक्षों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति कायम रखने और द्विपक्षीय संवाद जारी रखने पर जोर दिया। दूसरी ओर, भारत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि एलएसी (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद आवश्यक है और यही स्थिति दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की भावी दिशा तय करेगी।
अरुणाचल प्रदेश पर भारत का कड़ा रुख
यह घटनाक्रम अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों की गतिविधियों की खबरों के बीच सामने आया है। भारत ने अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों के नाम बदलने के चीनी प्रयास को सिरे से खारिज करते हुए दोहराया है कि यह राज्य भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है।
गलवान विवाद के बाद के घटनाक्रम
वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच गहरा तनाव पैदा हो गया था। हालांकि, अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी के समझौते के बाद संबंधों में सुधार के प्रयास शुरू हुए। इसके बाद कज़ान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई थी, जिसके बाद तियानजिन एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत हुई। भारत ने हमेशा आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता को संबंधों का मुख्य आधार माना है।








