अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने में भारतीयों की अहम भूमिका, फेड टीम में राजन को जगह

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वाशिंगटन: अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति और कामकाज की गहन समीक्षा के लिए पांच विशेष टास्क फोर्स गठित की हैं। फेड के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने इन समितियों में दुनिया के कई प्रमुख विशेषज्ञों को शामिल किया है। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री राज चेट्टी और माइक्रोसॉफ्ट की वरिष्ठ अधिकारी आशा शर्मा को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। ये विशेषज्ञ अमेरिका में बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के उपायों और आर्थिक नीतियों को बेहतर बनाने पर सुझाव देंगे।

रघुराम राजन करेंगे फेड की बैलेंस शीट नीति की समीक्षा

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट पॉलिसी से जुड़ी टास्क फोर्स में शामिल किया गया है। यह समूह फेड के पास मौजूद अरबों-खरबों डॉलर की संपत्तियों और मौद्रिक नीति पर उनके प्रभाव का अध्ययन करेगा। समिति यह समझने की कोशिश करेगी कि फेड की वित्तीय रणनीतियां महंगाई को नियंत्रित करने में कितनी प्रभावी साबित हो रही हैं।

राज चेट्टी संभालेंगे आर्थिक डेटा से जुड़ी जिम्मेदारी

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और दिल्ली में जन्मे राज चेट्टी को डेटा टास्क फोर्स का हिस्सा बनाया गया है। यह टीम फेडरल रिजर्व के फैसलों में इस्तेमाल होने वाले आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता और उपलब्धता को बेहतर बनाने पर काम करेगी। राज चेट्टी को रोजगार, आर्थिक असमानता और लोगों की आर्थिक प्रगति से जुड़े अध्ययन के लिए जाना जाता है।

आशा शर्मा देखेंगी AI और तकनीक का आर्थिक प्रभाव

माइक्रोसॉफ्ट की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और एक्सबॉक्स की सीईओ आशा शर्मा को भी एक महत्वपूर्ण टास्क फोर्स में शामिल किया गया है। यह समूह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों के अमेरिका की उत्पादकता, रोजगार और आर्थिक विकास पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण करेगा।

फेड की नीतियों में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश

इन टास्क फोर्स में डग मैकमिलन और शिकागो विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री केविन मर्फी जैसे विशेषज्ञ भी शामिल हैं। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के अनुसार, इन समितियों का उद्देश्य केंद्रीय बैंक के कामकाज में पारदर्शिता लाना, नए विचारों को अपनाना और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नीतियों को मजबूत बनाना है।