इस्लामाबाद। पाकिस्तान के थल सेनाध्यक्ष जनरल आसिम मुनीर की ईरान और सऊदी अरब के बीच मध्यस्थता कराने की भूमिका को लेकर एक नई रिपोर्ट में सनसनीखेज दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच तनाव घटाने के पीछे केवल शांतिपूर्ण कूटनीति ही नहीं, बल्कि आसिम मुनीर और ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के एक शीर्ष अधिकारी के बीच कथित गुप्त तेल कारोबार भी एक प्रमुख वजह था।
अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद गुप्त कारोबार और हमलों पर रोक का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कथित व्यावसायिक लेन-देन उस दौर में भी जारी रहा जब ईरान के तेल व्यापार पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लागू थे। दावा है कि इसी आर्थिक साठगांठ का लाभ उठाकर मुनीर ने ईरान को सऊदी अरब की सीमा पर हमले बंद करने के लिए राजी किया। बताया जाता है कि इस समझौते के बाद जब ईरान की ओर से दोबारा मिसाइल दागे जाने की खबरें आईं, तो मुनीर ने ईरानी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश भेजा कि ऐसी सैन्य कार्रवाइयों से उनके साझा कारोबारी हितों पर आंच आ सकती है, जिसके बाद कथित तौर पर हमले रुक गए।
कूटनीतिक मध्यस्थता या आर्थिक-रणनीतिक खेल?
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या यह मध्यस्थता वाकई खाड़ी क्षेत्र में शांति बहाली के लिए थी या इसके तार निजी आर्थिक और रणनीतिक फायदों से जुड़े थे। एक खुफिया अधिकारी के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान की मंशा सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह खुद पर निर्भर बनाने की थी। हालांकि, रिपोर्ट में किसी पंजीकृत तेल कंपनी के नाम या ठोस सबूतों का ब्योरा सामने नहीं आया है और निष्पक्ष पुष्टि के लिए आधिकारिक पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है।









