ट्रंप का बयान: ईरान पर हमले पूरे, समझौते में तेहरान की देरी भारी पड़ी

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वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक भीषण सैन्य टकराव में बदल गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एलान किया है कि 10 जून को ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर किए गए 'आत्मरक्षा हमले' पूरी तरह सफल रहे हैं। इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर' (IRGC) ने भी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज़ स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में जहाजों को निशाना बनाकर पलटवार किया है।

 

अमेरिका ने ईरान के भीतर किन ठिकानों को बनाया निशाना?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार सुबह बयान जारी कर बताया कि बुधवार को शुरू हुई यह कार्रवाई ईरान की लगातार जारी आक्रामकता का जवाब थी। अमेरिकी मरीन कोर, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर ईरान के भीतर निम्नलिखित ठिकानों पर सटीक हथियारों (Precision Weapons) से भीषण बमबारी की:

  • ईरान की सैन्य निगरानी क्षमताएं (Military Surveillance)

  • सेना के संचार सिस्टम (Communication Systems)

  • ईरान के एयर डिफेंस ठिकाने (Air Defense Sites)

अमेरिका का दावा है कि ये वो ठिकाने थे, जिनसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और अमेरिकी सुरक्षा बलों को सीधा खतरा था। इस ताजा हमले ने अप्रैल महीने में दोनों देशों के बीच हुए बेहद नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) को पूरी तरह खत्म कर दिया है।


ईरान का पलटवार: होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों पर हमला

अमेरिका के इस बड़े हवाई हमले के जवाब में ईरान की घातक सेना IRGC ने भी मोर्चा खोल दिया है। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले 'होर्मुज़ स्ट्रेट' में दो जहाजों पर हमला किया।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसथ ने इस पर सख्त लहजा अपनाते हुए कहा कि ईरान को शांति समझौता करने का पूरा मौका दिया गया था, लेकिन उसने इसका फायदा नहीं उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अब भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो उसके अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर भी बम गिराए जाएंगे।


राष्ट्रपति ट्रंप की दो टूक और ईरान का जवाब

इस ताजा सैन्य कार्रवाई से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था, "हमने कल भी उन पर सख्ती से हमला किया था और आज भी हम उन पर सख्ती से हमला करने जा रहे हैं।" ट्रंप ने साफ कहा कि ईरानी नेताओं ने शांति समझौते पर बातचीत करने में बहुत ज्यादा देर कर दी है और अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है।

ईरान का रुख: ट्रंप की इस खुली धमकी पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने पलटवार करते हुए कहा कि ईरान किसी भी महाशक्ति के दबाव या धमकी के सामने घुटने नहीं टेकेगा और डटकर खड़ा रहेगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह एक तरफ हमले कर रहा है और दूसरी तरफ बातचीत का ढोंग रचकर कूटनीतिक प्रक्रिया को खुद नुकसान पहुंचा रहा है।