यूएस-ईरान शांति समझौता: 60 दिनों के युद्धविराम पर बनी सहमति, लेकिन पेचीदा मुद्दों पर पेंच अभी भी फंसा

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वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए एक समझौता लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों को कुछ बेहद पेचीदा और गंभीर मुद्दों को सुलझाना होगा। इस बात की पुष्टि खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नए प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देशों के बीच युद्धविराम (सीजफायर) को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नए सिरे से बातचीत शुरू की जाएगी। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों द्वारा समझौते का एक ढांचा तैयार होने की बात कहे जाने के बावजूद, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने इस डील के फाइनल होने की खबरों से साफ इनकार किया है।

ट्रंप और ईरानी नेतृत्व की मंजूरी के बिना फैसला नहीं

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम रिफाइनिंग) जैसे बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच अभी भी बातचीत का दौर जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से इस डील को अंतिम मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक समझौते की कोई तय समयसीमा बताना जल्दबाजी होगी। दूसरी तरफ, पूर्व अमेरिकी नौसैनिक अधिकारी हरलान उलमैन का मानना है कि अगले 60 दिनों के भीतर दोनों देशों में पूरी तरह समझौता होना काफी मुश्किल है, क्योंकि यूरेनियम और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के समुद्री रास्ते को खोलने को लेकर दोनों के बीच गहरा विवाद है।

अमेरिका पर घरेलू दबाव, अर्थव्यवस्था भी प्रभावित

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में बढ़ रही महंगाई के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस युद्ध को खत्म करने और समझौता करने का भारी घरेलू दबाव है। हालांकि, ट्रंप को पूरा भरोसा है कि आने वाले मध्यावधि चुनावों में उनकी रिपब्लिकन पार्टी शानदार प्रदर्शन करेगी। उलमैन के अनुसार, ट्रंप पर समझौते के लिए कोई जबरदस्ती तो नहीं है, लेकिन वैश्विक कारणों से उन्हें यह तनाव जल्द से जल्द खत्म करना होगा। अमेरिका अपनी नौसेना को हमेशा के लिए वहां तैनात नहीं रख सकता, क्योंकि इस युद्ध की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

ईरान का विमान गिराने का दावा और अमेरिका का खंडन

इस कूटनीतिक हलचल के बीच जमीन पर तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान की वायु सेना ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने बुशायर प्रांत के जाम काउंटी इलाके में एक दुश्मन के विमान को मार गिराया है। स्थानीय गवर्नर मसूद तंगेस्तानी और ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि विमान को बीच रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरानी मीडिया के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बयान जारी कर कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह झूठी है। अमेरिका का कोई भी विमान क्रैश नहीं हुआ है और उनके सभी हवाई एसेट्स पूरी तरह सुरक्षित हैं। दोनों देशों के बीच जारी इस टकराव को एक भ्रामक प्रचार या 'इन्फॉर्मेशन वॉर' के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।