क्या कभी पानी से लबालब था मंगल? नई खोज ने चौंकाया दुनिया को

0
7

वाशिंगटन: मंगल ग्रह पर कभी जीवन मौजूद था या नहीं, यह सवाल दशकों से वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों को आकर्षित करता रहा है। अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के परसिवरेंस रोवर ने एक ऐसी महत्वपूर्ण खोज की है, जिसने इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम बढ़ाया है। रोवर को मंगल के जेजेरो क्रेटर स्थित 'ब्राइट एंजेल फॉर्मेशन' में मैक्रोमोलेक्यूलर कार्बन (MMC) मिला है, जिसे जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक प्रमुख तत्वों में से एक माना जाता है।

प्राचीन मडस्टोन चट्टानों में कैद मिला ऑर्गेनिक कार्बन

शोधकर्ताओं ने बताया कि यह कार्बन ब्राइट एंजेल फॉर्मेशन की दो विशिष्ट चट्टानों में पाया गया है, जिनमें से एक को वैज्ञानिकों ने ‘चेयावा फॉल्स’ नाम दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों वर्ष पहले जेजेरो क्रेटर में एक विशालकाय झील और एक सक्रिय नदी तंत्र मौजूद था। उस समय नदी के पानी के साथ बहकर आई मिट्टी और गाद जमा होकर समय के साथ मडस्टोन चट्टानों में बदल गई। इन्हीं प्राचीन चट्टानों के भीतर यह बहुमूल्य ऑर्गेनिक कार्बन सदियों से सुरक्षित और संरक्षित मिला है।

कठोर वातावरण के बावजूद अरबों सालों से सुरक्षित हैं अणु

इस खोज ने वैज्ञानिक जगत में एक नई उत्सुकता पैदा कर दी है, क्योंकि यह पहली बार है जब मंगल की सतह के इतने करीब ऑर्गेनिक कार्बन की मौजूदगी दर्ज की गई है। शोध पत्रिका 'साइंस एडवांसेज' में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, मंगल का वातावरण अत्यंत कठोर माना जाता है, जहां तीव्र सौर विकिरण और ऑक्सीडेंट रसायन जैसे विनाशकारी कारक जैविक अणुओं को आसानी से नष्ट कर सकते हैं। इसके बावजूद अरबों वर्षों से इस कार्बन का सुरक्षित बने रहना वैज्ञानिकों के लिए बेहद रोचक और गहन शोध का विषय बन गया है।

'शेरलॉक' उपकरण ने खोजे पानी की मौजूदगी के सबूत

इस अभूतपूर्व खोज में परसिवरेंस रोवर पर लगे अत्याधुनिक उपकरण 'शेरलॉक' (SHERLOC) की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह उपकरण लेजर तकनीक की मदद से चट्टानों के भीतर मौजूद खनिजों और कार्बनिक यौगिकों की सूक्ष्मता से पहचान करता है। विश्लेषण के दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि इस कार्बन के साथ सल्फेट, कार्बोनेट, आयरन-फॉस्फेट और सल्फाइड जैसे खनिज भी मौजूद हैं। ये ऐसे खनिज हैं, जो आमतौर पर पानी की मौजूदगी वाले वातावरण में ही बनते हैं, जिससे मंगल पर प्राचीन काल में पानी की उपस्थिति का एक और ठोस प्रमाण मिलता है।

जीवन का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं, पर अनुकूल माहौल का संकेत

हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह पूरी तरह स्पष्ट किया है कि केवल ऑर्गेनिक कार्बन की मौजूदगी को सीधे तौर पर प्राचीन जीवन का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे कार्बनिक यौगिक जैविक (बायोटिक) और अजैविक (एबायोटिक) दोनों ही प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बन सकते हैं। फिर भी, इस विशिष्ट कार्बन और पानी से संबंधित खनिजों का अनोखा संयोजन इस संभावना को मजबूती प्रदान करता है कि मंगल पर कभी ऐसा वातावरण जरूर मौजूद था, जो सूक्ष्म जीवों के पनपने और उनके विकास के लिए अत्यंत अनुकूल रहा हो।

'मार्स सैंपल रिटर्न मिशन' से खुलेगा अंतिम रहस्य

इस खोज का अंतिम और निर्णायक उत्तर तभी मिलेगा, जब परसिवरेंस रोवर द्वारा एकत्र किए गए इन भू-वैज्ञानिक नमूनों को पृथ्वी पर लाकर अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में उनकी गहन जांच की जाएगी। यदि भविष्य में 'मार्स सैंपल रिटर्न मिशन' सफल होता है, तो वैज्ञानिक यह सटीक पता लगाने में सक्षम हो सकेंगे कि मंगल पर मिले ये कार्बनिक अवशेष किसी प्राचीन जैविक गतिविधि के संकेत हैं या केवल भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का परिणाम। फिलहाल, यह खोज मंगल पर जीवन की संभावनाओं को लेकर अब तक के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण संकेतों में से एक मानी जा रही है।