बरेली: उत्तर प्रदेश की सियासत और धार्मिक गलियारों में उस समय भूचाल आ गया, जब ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सूबे के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों में अरबों रुपये के भारी भ्रष्टाचार और घपलेबाजी का बेहद गंभीर आरोप लगाया। मौलाना रजवी ने इस महाघोटाले की परतों को खोलने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत और तीखा पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर वकालत की है।
इस दौरान मौलाना ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार की जांच एजेंसियां सही दिशा में और पूरी ईमानदारी से इस मामले की तहकीकात करेंगी, तो यह घोटाला देश के सबसे चर्चित राम मंदिर भूमि विवाद घोटाले से भी कहीं अधिक विशाल और हैरान करने वाला साबित होगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूटा गुस्सा; कहा- समाजवादी पार्टी के शासनकाल में जमकर लूटी गईं वक्फ संपत्तियां
इस पूरे मामले का खुलासा करने के लिए मौलाना रजवी ने बरेली में सोमवार की शाम ठीक चार बजे एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता (प्रेस कॉन्फ्रेंस) बुलाई। पत्रकारों के सामने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र की प्रति जारी करते हुए मौलाना ने पिछली सरकारों पर तीखे प्रहार किए:
सपा सरकार में फला-फूला अवैध धंधा: मौलाना ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सूबे में जब-जब समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकारें सत्ता में रहीं, तब-तब वक्फ बोर्ड की कीमती जमीनों की खरीद-फरोख्त और उन पर अवैध कब्जों का काला कारोबार बेखौफ तरीके से फला-फूला।
अधिकारियों और दलालों की साठगांठ: उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान वक्फ बोर्डों में शीर्ष पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों और भू-माफियाओं ने आपसी साठगांठ कर कौड़ियों के भाव वक्फ की जमीनों के सौदे किए और अपनी जेबें भरीं।
आजम खां पर साधा निशाना; चहेतों को मलाईदार पदों पर बिठाने का लगाया सीधा आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां को इस पूरे खेल का मुख्य केंद्र बिंदु बताया:
मंत्रालय पर रहा कब्जा: मौलाना ने याद दिलाया कि स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के तीन बार के मुख्यमंत्रित्व काल और अखिलेश यादव के एक बार के शासनकाल के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण, वक्फ और हज जैसे बेहद महत्वपूर्ण और मलाईदार मंत्रालय हमेशा आजम खां के पास ही रहे।
पसंदीदा लोगों की नियुक्तियां: उन्होंने संगीन आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों को अपने नियंत्रण में रखने और मनमर्जी से फैसले लेने के लिए आजम खां के बेहद करीबी और पसंदीदा लोगों को ही बार-बार नियमों को ताक पर रखकर वक्फ बोर्ड का चेयरमैन और सदस्य मनोनीत किया जाता रहा। मौलाना ने इस दौरान कई प्रभावशाली लोगों के नामों का भी खुलकर खुलासा किया जो इस पूरे सिंडिकेट का हिस्सा थे।
गरीबों और यतीमों की जमीनों को बेचकर किया व्यक्तिगत ऐशो-आराम; पूरे देश के मुसलमानों की दूर हो सकती थी गरीबी
मौलाना रजवी ने अत्यंत भावुक और आक्रामक लहजे में वक्फ की जमीनों के वास्तविक उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि इन जमीनों का इस्तेमाल किस तरह कौम के भले के लिए होना चाहिए था, लेकिन इसके उलट इन्हें लूट का जरिया बना दिया गया:
कल्याणकारी कार्यों के लिए सुरक्षित थीं जमीनें: उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम और कानून के तहत वक्फ की जमीनें समाज के सबसे गरीब, लाचार, बेसहारा और यतीम लोगों के कल्याण के लिए दान की गई थीं। इन कीमती जमीनों पर बड़े अस्पताल, आधुनिक स्कूल, डिग्री कॉलेज, अनाथालय और गुणवत्तापूर्ण मदरसे बनाए जाने चाहिए थे ताकि कौम के युवाओं का भविष्य संवर सके।
मुसलमानों की दूर हो सकती थी गुरबत: मौलाना ने गणित समझाते हुए कहा कि यदि उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न वक्फ बोर्डों की जमीनों और उनसे होने वाली अरबों रुपये की सालाना आय का सही व पारदर्शी तरीके से उपयोग किया गया होता, तो आज पूरे भारत के मुसलमानों की गरीबी और उनका शैक्षणिक पिछड़ापन हमेशा के लिए खत्म हो गया होता। लेकिन वक्फ के कथित ठेकेदारों ने इन जमीनों को कौड़ियों के भाव बेचकर अपनी आलीशान सल्तनत खड़ी कर ली।
मुख्यमंत्री योगी से कड़ी सजा की अपील; प्रेस वार्ता में कई बड़े उलेमा भी रहे मौजूद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में मौलाना रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पुरजोर अपील की कि वे इस मामले में तनिक भी ढिलाई न बरतें और वक्फ संपत्तियों को हड़पने वाले बड़े से बड़े रसूखदार दोषियों को चिन्हित कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजें और संपत्तियों को कुर्क कर दोबारा वक्फ बोर्ड के अधीन लाएं।
इस बेहद संवेदनशील और बड़े खुलासे के दौरान मंच पर मौलाना रजवी के साथ ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और उलेमा भी एकजुट नजर आए। इनमें मुख्य रूप से हाजी नसीर अहमद नूरी, मुफ्ती फारुख मिस्बाही, हाजी नाजिम बेग, राहत हुसैन मुन्ना, काशिफ खान, डॉ. अनवर रज़ा कादरी और हाफिज रजी अहमद शामिल रहे, जिन्होंने सर्वसम्मति से इस मांग का समर्थन किया।









