लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रदेश कार्यालय में एक अज्ञात हमलावर द्वारा कथित रूप से घुसकर पार्टी पदाधिकारियों के साथ अभद्रता करने, अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने और पिस्तौल तानकर जान से मारने की धमकी देने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सुभासपा के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव डॉ. अरविंद राजभर ने गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
कार्यालय में घुसकर अभद्रता और बहस का आरोप
पार्टी कार्यालय प्रभारी धर्म प्रकाश चौधरी द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, राशिद अली नाम का एक शख्स अचानक पार्टी मुख्यालय में दाखिल हुआ और सीधे कार्यालय प्रभारी के केबिन में जाकर तीखी बहस करने लगा। सुभासपा नेतृत्व का दावा है कि उक्त व्यक्ति ने वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर तथा डॉ. अरविंद राजभर के विरुद्ध अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया।
सपा और अखिलेश यादव के खिलाफ बयानबाजी न करने की धमकी
सुभासपा नेताओं के मुताबिक, जब दफ्तर के कर्मचारियों ने उस व्यक्ति से उसकी समस्या पूछकर समाधान निकालने का प्रयास किया, तो उसने आक्रामक रुख अपना लिया। आरोप है कि उसने सख्त लहजे में सुभासपा नेतृत्व को समाजवादी पार्टी (सपा) और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी न करने की हिदायत दी। विरोध करने पर आरोपी ने मारपीट शुरू कर दी और पिस्तौल निकालकर जान से मारने की सीधी धमकी दे डाली। हालांकि, परिसर में मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं को आते देख आरोपी मौके से फरार हो गया।
राजनीतिक विद्वेष और कानून-व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
घटना के समय पार्टी कार्यालय में मौजूद न होने की बात कहते हुए डॉ. अरविंद राजभर ने इस घटना को राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा:
"लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को एक-दूसरे की नीतियों का विरोध करने और जनहित में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह संघर्ष लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर होना चाहिए। हिंसा और धमकी की राजनीति के लिए समाज में कोई जगह नहीं है।"
डॉ. राजभर ने पुलिस अधिकारियों से इस बात की भी तहकीकात करने का आग्रह किया है कि आरोपी ने इस वारदात को अकेले अंजाम दिया या इसके पीछे किसी राजनीतिक दल या संगठन का षड्यंत्र शामिल है। फिलहाल, पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है।








