PM मोदी ने लाल किले से किया आगाह, ‘दिमागी नक्सलवाद’ के खिलाफ देश को सतर्क रहने की जरूरत

0
9

नई दिल्ली: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आंतरिक सुरक्षा, माओवाद और नक्सलवाद के खात्मे पर खुलकर अपने विचार रखे। पीएम मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए गर्व के साथ कहा कि भारत अब नक्सलवाद के अभिशाप से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलवाद का आतंक हुआ करता था, आज वहां विकास और विश्वास का तिरंगा शान से लहरा रहा है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने देशवासियों को एक नई वैचारिक चुनौती 'दिमागी नक्सलियों' (अर्बन नक्सल या वैचारिक चरमपंथ) के प्रति विशेष रूप से आगाह करते हुए कहा कि हमें इस कट्टर सोच को पहचानना होगा, जो शारीरिक रूप से हथियार छूटने के बाद भी कुछ लोगों के मानसिक पटल पर आज भी जिंदा है।

'जहां कभी धरती रक्तरंजित थी, आज वहां विकास का तिरंगा लहरा रहा है'

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि माओवाद और नक्सलवाद ने देश के अनगिनत हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया था। करीब चार दशकों तक इस खूनी विचारधारा ने देश की एक बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर डराकर और दबाकर रखा था। देश के भोले-भाले नागरिकों और सीमाओं की रक्षा करते हुए हमारे लगभग साढ़े तीन हजार से अधिक वीर सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है।

नक्सलवाद ने इस देश की उपजाऊ धरती को लंबे समय तक लहूलुहान किया है। वर्ष 2014 में जब देश की जनता ने हमें सेवा करने का अवसर दिया, तभी हमने एक दृढ़ संकल्प लिया था कि हम इस देश की धरती से नक्सलवाद का नामो-निशान मिटा देंगे। आज हम उस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में हैं। जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियों की गूंज सुनाई देती थी और जहां की धरती खून से रक्तरंजित रहती थी, आज वहां जन-विश्वास, सामूहिक प्रयासों और विकास का तिरंगा झंडा लहरा रहा है।

'हथियार वाले नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमाग वाले नक्सल अभी भी मौजूद हैं'

देश की जनता को आगाह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सत्ता और व्यवस्था में वर्षों तक माओवादी सोच और एजेंडे को बढ़ावा देने वाले लोग महत्वपूर्ण जगहों पर काबिज रहे थे। इन लोगों ने पूर्व की सरकारों की नीतियों को भी अपने हिसाब से बहुत हद तक प्रभावित किया था।

उन्होंने आगे कहा, "हमने देश को हिंसक और हथियारबंद नक्सलियों से तो काफी हद तक आजाद करा लिया है, लेकिन आज भी 'दिमाग वाले नक्सल' (दिमागी नक्सली) हमारे समाज और व्यवस्था के भीतर सक्रिय रूप से मौजूद हैं। यह वर्ग देश को वैचारिक रूप से फिर से हिंसा, अराजकता और अस्थिरता में घसीटने की निरंतर कोशिश में जुटा रहता है। हमें इन दिमागी नक्सलियों के असली चेहरों को पहचानना होगा और उन्हें पूरी तरह से अलग-थलग करना होगा।"

देश में सिविल डिफेंस का एक विशाल नेटवर्क बनाएगी सरकार

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक सुरक्षित और सशक्त भारत का निर्माण करना हम सबकासर्वोच्च दायित्व है। आज के आधुनिक दौर में सुरक्षा का दायरा केवल सीमाओं के भीतर या बाहर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके मायने बहुत बदल चुके हैं। अब युद्ध केवल सीमाओं पर लड़े जाएं यह जरूरी नहीं है; आज रणनीतिक तेल रिफाइनरियों पर साइबर या भौतिक हमले हो रहे हैं और आधुनिक बैंकिंग क्षेत्र भी विभिन्न प्रकार के हमलों का शिकार बन रहे हैं।

हमें इन तमाम संवेदनशील क्षेत्रों की भी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए अब हमें आम नागरिकों को भी इसमें आगे लाना होगा। लाल किले की प्राचीर से यह महत्वपूर्ण ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम बहुत जल्द देश के भीतर 'सिविल डिफेंस' (नागरिक सुरक्षा) का एक बहुत बड़ा और मजबूत नेटवर्क खड़ा करने जा रहे हैं, जो आज की आधुनिक और उभरती हुई चुनौतियों का डटकर सामना करेगा। इस राष्ट्रव्यापी नेटवर्क में देश के युवाओं की सबसे बड़ी और अहम भागीदारी होगी।