भोपाल| खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने राज्य में चीनी की आपूर्ति सुचारू रखने, बाजार में मूल्यों को नियंत्रित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए भंडारण के कड़े नियम लागू कर दिए हैं। नए आदेश के तहत प्रदेश का कोई भी व्यापारी अब 4 हजार क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक जमा नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही, खरीदे गए स्टॉक को अधिकतम 30 दिनों के भीतर बाजार में निकालना अनिवार्य होगा।
व्यापारियों को केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपने स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से दर्ज करनी होगी। हालांकि, यह सीमा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन दुकानों के लिए राशन का भंडारण करने वाली सरकारी एजेंसियों पर लागू नहीं होगी।
व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 15 दिन का नियम
स्टॉक सीमा: ऐसे थोक उपभोक्ता (जैसे हलवाई, मिठाई निर्माता, कोल्ड ड्रिंक्स और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) जो हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे 15 दिन से अधिक की खपत का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
पात्रता श्रेणी: इस नियम के दायरे में वे सभी इकाइयां आएंगी जिनकी बीते एक साल में औसत खपत 100 मीट्रिक टन या उससे अधिक रही है।
15 सितंबर से लागू होंगी केंद्र की नई गाइडलाइंस
देशभर में चीनी की कीमतों को स्थिर रखने के उद्देश्य से आगामी 15 सितंबर से 30 नवंबर तक स्टॉक की सीमा 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल की जा रही है।
30 दिन की बाध्यता: किसी भी खेप को प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर निपटाना होगा।
कोलकाता को विशेष छूट: पूर्वोत्तर राज्यों में आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स को देखते हुए कोलकाता महानगरीय क्षेत्र के लिए 4,000 क्विंटल की छूट बरकरार रहेगी।









