नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र पर तमाम सदस्य मुल्कों की पूर्ण सहमति बनने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की कूटनीतिक सफलता की भरपूर सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्षम मार्गदर्शन में मिली यह सफलता अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत के निरंतर बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है।
मजबूत सहमति ही असली नेतृत्व
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि वास्तविक नेतृत्व का अर्थ अपनी बात दूसरों पर थोपना नहीं, बल्कि सभी पक्षों को साथ लेकर एक मजबूत आम सहमति कायम करना है। 'वसुधैव कुटुंबकम' की भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि मौजूदा समय में दुनिया भर में भारत के विचारों को अत्यंत गंभीरता से सुना जा रहा है।
ईरान और यूएई के मतभेदों को पाटना
इस संयुक्त घोषणापत्र पर मुहर लगवाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था, क्योंकि पश्चिम एशिया के कई संवेदनशील मुद्दों को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच गंभीर मतभेद थे। इससे पहले विदेश मंत्रियों की बैठक भी किसी साझा निष्कर्ष पर पहुंचने में असफल रही थी। हालांकि, भारत के कुशल प्रयासों और अन्य सदस्य देशों के सहयोग से मैराथन बैठकों के बाद अंततः सभी पक्षों में आम सहमति बन गई।
140 पैराग्राफ का विस्तृत घोषणापत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किए गए 140 पैराग्राफ के इस व्यापक घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण वैश्विक चिंताओं को शामिल किया गया है। इसमें नागरिक ढांचे के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के दायरे में आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर होने वाले हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। ईरान की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इस दस्तावेज की रूपरेखा तैयार की गई थी।
व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर जोर
क्षेत्रीय तनाव के इस दौर में ब्रिक्स देशों ने वैश्विक व्यापार और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु रूप से चालू रखने पर विशेष बल दिया है। रक्षा मंत्री ने इसे भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार देते हुए कहा कि यह विभिन्न विचारधाराओं वाले देशों को एक मंच पर लाने की भारत की अद्वितीय क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण है।









