पीएम मोदी का सुभाषित संदेश, प्रेम और भाईचारे से समाज को मजबूत बनाने पर जोर

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों के महत्व पर विशेष जोर देते हुए सोशल मीडिया पर एक प्रेरक वैदिक मंत्र साझा किया है। इस सुभाषित के माध्यम से उन्होंने देशवासियों से प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना को और अधिक मजबूत करने की अपील की है।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया वैदिक मंत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अथर्ववेद के तीसरे कांड के 30वें सूक्त का पहला मंत्र साझा किया है:

"सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥"

मंत्र का अर्थ और महत्व

इस पवित्र मंत्र का सरल शब्दों में अर्थ है कि मनुष्य को सदैव ऐसे कर्म करने चाहिए जो हृदय में प्रेम, सौहार्द और सद्भाव को बढ़ावा दें। इसमें बताया गया है कि सभी को एक-दूसरे के प्रति उसी प्रकार निस्वार्थ स्नेह रखना चाहिए, जिस प्रकार एक गाय अपने नवजात बछड़े से अगाध प्रेम करती है।

ईश्वर इस मंत्र के माध्यम से मनुष्य को संबोधित करते हुए कहते हैं कि वह इंसानों के बीच ऐसे वचनों और कर्मों की स्थापना करते हैं जिससे वे सहृदय (समान हृदय वाले), सांमनस्य (समान मन वाले) और अविद्वेष (द्वेष या ईर्ष्या से रहित) बन सकें। यह मंत्र परिवार, समाज और पूरे राष्ट्र के लोगों के बीच सभी मतभेदों को भुलाकर उन्हें एकता के सूत्र में पिरोने की गहरी प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री का यह संदेश वर्तमान समय में सामाजिक और आपसी सद्भाव को सुदृढ़ करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है।