कांग्रेस ने Gen Z के मुद्दे पर पीएम मोदी को घेरा, वोट के अधिकार को लेकर उठाए सवाल

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नई दिल्ली. देश की चुनावी राजनीति में युवा मतदाताओं की भूमिका को लेकर कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 1988 के उस ऐतिहासिक संवैधानिक बदलाव की याद दिलाई है, जिसके तहत मतदान की न्यूनतम उम्र 21 साल से घटाकर 18 साल की गई थी।

राजीव गांधी और मौजूदा कार्यकाल की तुलना

कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को बयान जारी करते हुए कहा कि 1988 में संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन कर युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बड़ी भागीदारी दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ पूर्व में युवाओं को वोट का अधिकार देकर उन्हें मजबूत भागीदार बनाया गया था, वहीं मौजूदा शासनकाल में युवा मतदाताओं के अधिकारों को सीमित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

SIR और वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच तकरार चल रही है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया से Gen Z और नए युवा मतदाताओं के पंजीकरण में कठिनाई आ रही है। पार्टी ने नए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 की प्रक्रिया को जटिल बनाने का भी दावा किया है। इसके अलावा, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पत्रों और ECINet सॉफ्टवेयर की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इसका संचालन विकेंद्रीकृत है और वैधानिक कार्य संबंधित अधिकारियों द्वारा ही संपादित किए जाते हैं।

1988 के 61वें संविधान संशोधन का महत्व

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 के माध्यम से अनुच्छेद 326 में संशोधन किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ना था। यह कानून 28 मार्च 1989 से देश भर में प्रभावी हुआ था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को आधार बनाकर कांग्रेस ने मौजूदा चुनावी माहौल और मतदाता सूची की शुचिता को लेकर सरकार को घेरा है।