रुपये में गिरावट के बीच RBI का बड़ा एक्शन, 12 अक्टूबर से तेल कंपनियों को मिलेगी खास सुविधा

0
14

अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल की खरीद के लिए अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता को सुगमता से पूरा करने के वास्ते सरकारी तेल कंपनियों को अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष सहायता मिलेगी। केंद्रीय बैंक आरबीआई ने देश की तीन प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL)—की दैनिक विदेशी मुद्रा (डॉलर) की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष विदेशी मुद्रा विंडो (Foreign Exchange Window) खोलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह विशेष सुविधा आगामी सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी और अगले अग्रिम आदेशों तक निरंतर जारी रहेगी।

आरबीआई के इस कदम के पीछे की पृष्ठभूमि

भारतीय रिजर्व बैंक का यह महत्वपूर्ण निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब केंद्रीय बैंक ने वर्तमान मुद्रा और वित्तीय बाजारों की वैश्विक एवं घरेलू स्थितियों की गहन समीक्षा के बाद इस प्रकार की संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की। इस नई व्यवस्था के लागू होने से सरकारी तेल कंपनियों को डॉलर की भारी-भरकम खरीद के लिए रोजाना खुले विदेशी मुद्रा बाजार पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हालांकि, आरबीआई द्वारा जारी आधिकारिक बयान में इस विशेष व्यवस्था के पीछे किसी विशेष या आकस्मिक बाजार घटनाक्रम अथवा डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव का कोई विशिष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

आरबीआई की नई व्यवस्था का स्वरूप और कार्यप्रणाली

केंद्रीय बैंक के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यह विशेष विंडो तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों की रोजाना की संपूर्ण डॉलर आवश्यकताओं को सीधे तौर पर पूरा करेगी। इसके तहत इन कंपनियों को उनकी मांग के अनुसार अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराने के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है।

इस पूरी प्रक्रिया के तहत आरबीआई सीधे खुले बाजार में तेल कंपनियों को डॉलर खरीदने के लिए प्रतिस्पर्धा करने देने के बजाय, नामित और अधिकृत डीलर बैंकों के माध्यम से डॉलर उपलब्ध कराएगा। यानी व्यवस्था यह रहेगी कि जब भी किसी तेल कंपनी को डॉलर की आवश्यकता होगी, तो लेनदेन के लिए निर्धारित बैंक माध्यम बनेंगे और केंद्रीय बैंक उस सुदृढ़ बैंकिंग व्यवस्था के जरिए संबंधित कंपनी को अमेरिकी डॉलर मुमुहैया कराएगा। इससे कंपनियों को अपनी विदेशी मुद्रा संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए एक सुरक्षित और निर्धारित मार्ग मिल जाएगा।

किन कंपनियों को मिलेगा इस सुविधा का सीधा लाभ?

आरबीआई की इस विशेष व्यवस्था के दायरे में केवल तीन प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां शामिल हैं:

  • इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC): देश की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा और पेट्रोलियम कंपनी।

  • भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL): सरकार के स्वामित्व वाली प्रमुख पेट्रोलियम विपणन कंपनी।

  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL): पेट्रोलियम उत्पादों के शोधन और खुदरा कारोबार से जुड़ी प्रतिष्ठित सार्वजनिक कंपनी।

इन तीनों कंपनियों की दैनिक आधार पर होने वाली डॉलर की कुल जरूरत इस व्यवस्था के दायरे में लाई गई है। इसका मतलब यह है कि यह सुविधा किसी एक विशेष लेनदेन के लिए न होकर तीनों कंपनियों की नियमित और दैनिक विदेशी मुद्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाई गई है।

तेल बाजार, रुपये और विनिमय दर पर संभावित असर

सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना सुगमता से डॉलर उपलब्ध कराने की इस व्यवस्था से उनकी परिचालन संबंधी विदेशी मुद्रा आवश्यकताओं को एक स्थिर माध्यम मिल जाएगा। चूंकि कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के वैश्विक व्यापार में डॉलर की भूमिका सर्वोपरि होती है, इसलिए तेल कंपनियों के लिए इसकी निरंतर उपलब्धता उनके सुचारू संचालन के लिहाज से बेहद अहम है।

हालांकि, आरबीआई के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस निर्णय का रुपये की विनिमय दर, डॉलर के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य या देश में पेट्रोल-डिफ़ल के खुदरा दामों पर कितना सीधा असर पड़ेगा। इसलिए आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सीधे तौर पर रुपये को मजबूत करने या ईंधन की कीमतें घटाने वाले कदम के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।

कब से लागू होगी व्यवस्था और आगे की स्थिति?

आरबीआई द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी। इसे फिलहाल किसी निश्चित अंतिम तिथि से नहीं बांधा गया है, और केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सुविधा अगले आदेशों तक जारी रहेगी। आने वाले दिनों में इस नई व्यवस्था के सुचारू संचालन और आरबीआई के आगामी निर्देशों पर वित्तीय बाजारों की पैनी नजर बनी रहेगी।