मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली का माहौल देखा गया। दोपहर एक बजकर 58 मिनट पर सेंसेक्स 1,211.61 (-1.61%) अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 73,616.64 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं दूसरी ओर, निफ्टी 392.96 (-1.68%) अंक टूटकर 23,053.85 के स्तर पर आ पहुंचा। बाजार की अस्थिरता और उतार-चढ़ाव को मापने वाले इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स (India VIX) में लगभग 24 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई।
विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन और सेक्टोरल रुझान
गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान वित्तीय सेवाओं से जुड़े क्षेत्र में सबसे अधिक 2.46% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि मीडिया क्षेत्र में दबाव सबसे कम 0.31% रहा। इसके अलावा मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑटो सेक्टर में भी 1% से अधिक की गिरावट देखी गई।
| क्षेत्र | इंडेक्स स्तर | गिरावट |
| ऑटो | 26,792.75 | 1.34% |
| एनर्जी एवं यूटिलिटीज | 37,300.45 | 1.22% |
| वित्तीय सेवाएं | 24,936.70 | 2.46% |
| एफएमसीजी | 45,731.40 | 1.14% |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | 8,952.50 | 1.57% |
| आईटी | 28,148.80 | 0.65% |
| मीडिया | 1,561.95 | 0.31% |
| मेटल | 13,047.30 | 1.92% |
| फार्मा | 27,038.40 | 0.42% |
| रियल्टी | 863.65 | 0.84% |
इससे पहले शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से अधिक टूट गया था, जबकि निफ्टी 23,250 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे खिसक गया था। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव सर्वाधिक रहा। व्यापक बाजार में भी बिकवाली हावी रही और निफ्टी मिडकैप 100 व निफ्टी स्मॉलकैप 100 में लगभग 1-1 प्रतिशत की गिरावट आई।
बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के प्रमुख कारण
सुबह 9:36 बजे सेंसेक्स 526.98 अंक (0.70%) गिरकर 74,301.27 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 178 अंक (0.76%) टूटकर 23,268.80 पर आ गया था।
बाजार में इस चौतरफा कमजोरी के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण सामने आ रहे हैं— बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल, अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें, कच्चे तेल के दामों में तेजी और वैश्विक स्तर पर मिले-जुले संकेत।
बॉन्ड यील्ड में उछाल से बढ़ा दबाव
बॉन्ड यील्ड में आई अचानक तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यील्ड 19 वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। सामान्यतः बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होने से निश्चित आय वाले साधनों (Fixed Income Instruments) की ओर निवेशकों का आकर्षण बढ़ता है, जिससे इक्विटी (शेयर) बाजार से पूंजी बाहर निकलती है और बाजार पर बिकवाली का दबाव बनता है।
अमेरिकी फेड की दरों पर अनिश्चितता
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर बाजार के अनुमानों में बदलाव ने भी निवेशकों के भरोसे को प्रभावित किया है। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका से वैश्विक स्तर पर जोखिम भरे संपत्तियों (Risk Assets) से निवेशक दूरी बना रहे हैं, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश पर पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर
कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संवेदनशील विषय हैं। चूंकि भारत अपनी ईंधन जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की दरों में वृद्धि से आयात बिल बढ़ता है, जिससे मुद्रास्फीति और अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनता है।
कमजोर वैश्विक संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी भारतीय शेयर बाजार को कोई खास समर्थन नहीं मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.2 फीसदी की गिरावट थी, जबकि जापान का टॉपिक्स इंडेक्स 0.1 फीसदी ही चढ़ सका। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 (0.7%), हांगकांग का हेंगसेंग (0.4%), शंघाई कंपोजिट (0.8%) और यूरो स्टॉक्स फ्यूचर्स (0.3%) सभी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
किन सेक्टर्स पर पड़ी सबसे ज्यादा मार?
कारोबारी दिन की शुरुआत से ही लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बने रहे। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स भी बिकवाली के दौर से अछूते नहीं रहे।
आगामी दिनों में बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत
अब बाजार के जानकारों और निवेशकों की नजरें आने वाले दिनों में बॉन्ड यील्ड के स्तर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयानों, कच्चे तेल के वैश्विक दामों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के रुख पर टिकी रहेंगी। इसके अलावा घरेलू बाजार में बैंकिंग व वित्तीय क्षेत्र के शेयरों का प्रदर्शन भी बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।









