मुंबई। अगर आप भी अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में पैसा लगाते हैं, तो आगामी 1 सितंबर 2026 से आपके लिए निवेश और ट्रेडिंग के नियम पूरी तरह बदलने जा रहे हैं। अब तक अक्सर देखा जाता था कि जब अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में रात के समय सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी हलचल होती थी, तो भारतीय ईटीएफ बाजार अगले दिन तुरंत उस बदलाव को सही तरीके से नहीं दर्शा पाते थे। इसी विसंगति को दूर करने और निवेशकों को वास्तविक कीमतों के करीब लाने के लिए बाजार नियामक सेबी एक नया फॉर्मूला लागू करने जा रहा है।
क्या है सेबी का नया फॉर्मूला और यह कैसे काम करेगा?
नए नियमों के तहत कमोडिटी ईटीएफ (खासकर गोल्ड और सिल्वर फंड्स) के लिए ट्रेडिंग की शुरुआत प्लस/माइनस 6% के शुरुआती प्राइस बैंड के साथ होगी।
अनलिमिटेड विस्तार: यदि बाजार में उतार-चढ़ाव बहुत तेज होता है, तो एक निश्चित कूलिंग-ऑफ पीरियड (ठहराव अवधि) के बाद इस प्राइस बैंड को 3-3 फीसदी के दायरे में और आगे बढ़ाया जा सकेगा।
कोई ऊपरी सीमा नहीं: मौजूदा सिस्टम के विपरीत, अब नए नियमों में इस बात की कोई ऊपरी सीमा नहीं होगी कि एक ही ट्रेडिंग सेशन के दौरान इस बैंड को कितनी बार चौड़ा किया जा सकता है। इससे वैश्विक कीमतों में होने वाले बदलावों को तुरंत भारतीय बाजारों में एडजस्ट किया जा सकेगा।
नई आधार कीमत: सेबी ने ईटीएफ की आधार कीमत तय करने के तरीके में भी सुधार किया है। अब पिछले कारोबारी दिन के आखिरी 30 मिनट के क्लोजिंग प्राइस को ही संदर्भ मूल्य (Reference Price) माना जाएगा, जिससे अचानक से दिखने वाले भारी प्रीमियम या डिस्काउंट को कम करने में मदद मिलेगी।
आम निवेशकों को इससे क्या फायदे होंगे?
सटीक शुरुआती कीमत: यह नया तंत्र बाजार खुलने से पहले अधिक सटीक शुरुआती कीमत खोजने की अनुमति देगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रातों-रात जो भी उतार-चढ़ाव होगा, वह अगले दिन सुबह भारतीय ईटीएफ निवेशकों को अधिक सटीक रूप से दिखाई देगा।
तर्कहीन घबराहट से बचाव: नया प्राइसिंग मैकेनिज्म मार्केट में कृत्रिम रूप से बढ़ने या घटने वाले अंतर को रोकेगा। निवेशकों को कम मूल्य विस्थापन, बेहतर लिक्विडिटी (तरलता) और ईटीएफ कीमतों व एनएवी (NAV) के बीच बेहतर तालमेल का फायदा मिलेगा।
नई बनाम पुरानी व्यवस्था: एक नज़र में
| ईटीएफ श्रेणी | मौजूदा व्यवस्था | नई व्यवस्था (1 सितंबर 2026 से लागू) |
| कमोडिटी ईटीएफ (गोल्ड व सिल्वर) | फिक्स्ड ±5% से 10% बैंड | प्री-ओपन ऑक्शन + डायनेमिक बैंड। शुरुआत ±6% से, फिर 3% के स्टेप्स में बिना किसी ऊपरी सीमा के विस्तार। |
| इक्विटी ईटीएफ | फिक्स्ड ±10% बैंड | डायनेमिक बैंड व्यवस्था। शुरुआत ±10% से, कूलिंग-ऑफ के बाद ±20% तक विस्तार संभव। |
| डेट ईटीएफ | फिक्स्ड ±10% बैंड | इक्विटी ईटीएफ की तरह ही डायनेमिक बैंड व्यवस्था लागू होगी। |
| लिक्विड ईटीएफ | फिक्स्ड ±5% बैंड | कोई बदलाव नहीं, ±5% का फिक्स्ड बैंड यथावत रहेगा। |
| करेंसी/ओवरनाइट ईटीएफ | फिक्स्ड ±5% बैंड | बैंड ±5% ही रहेगा, लेकिन क्लोज-आउट नियमों में संशोधन किया जाएगा। |
सिल्वर (चांदी) ईटीएफ में निवेशकों के लिए क्या हो रणनीति?
हाल के दिनों में बाजारों में जो सुधार देखा गया है, उसे विशेषज्ञों द्वारा एक संरचनात्मक मंदी के बजाय मुनाफावसूली और बदलती वैश्विक आर्थिक उम्मीदों के रूप में देखा जाना चाहिए।
एक्सपर्ट टेक: चांदी का उपयोग सोलर पैनलों, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है, जिससे इसकी औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है। आपूर्ति सीमित होने और मांग का आउटलुक बेहतर होने के कारण अगले 2 से 5 साल के नजरिये से चांदी काफी आकर्षक दिखाई देती है।
मौजूदा निवेशकों के लिए: यह घबराहट में आकर बिकवाली करने का समय नहीं है। दीर्घकालिक निवेशक अपनी पोजीशन बनाए रख सकते हैं।
एसआईपी (SIP) निवेशक: जो लोग व्यवस्थित तरीके से निवेश कर रहे हैं, वे अपनी एसआईपी को जारी रखें।
नए निवेशक: बाजार के इस दौर में एकमुश्त (Lumpsum) पैसा लगाने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करने की रणनीति अपनाना अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।









