कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, 110 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भारी तेजी देखने को मिली है। मई महीने के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है, वहीं अमेरिकी क्रूड में भी करीब 4 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की गई है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति जल्द सामान्य होने की उम्मीदें धूमिल होने और विभिन्न देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजारों की चिंता को बढ़ा दिया है।

आपूर्ति में बाधा और भू-राजनीतिक तनाव

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस आग के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऊर्जा संयंत्रों व रिफाइनरियों पर लगातार हो रहे हमलों से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में रूस की प्रमुख रियाजान तेल रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद उसका परिचालन रोकना पड़ा है, जिससे रूसी डीजल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और गहरी हो गई है। इसके अलावा, काला सागर क्षेत्र में जारी तनाव भी वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर लगातार दबाव बनाए हुए है।

भारत पर संभावित प्रभाव और घरेलू स्थिति

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो इसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ना स्वाभाविक है। इससे घरेलू तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की लागत में बढ़ोतरी होगी, जिससे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि भारत में ईंधन की कीमतें केवल कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों पर ही निर्भर नहीं करतीं। इसमें रुपया और अमेरिकी डॉलर के बीच का विनिमय दर, सरकारी टैक्स, उत्पाद शुल्क और तेल कंपनियों के अन्य व्यावसायिक फैसले भी बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी आने के बावजूद भारत में तुरंत ही कीमतों में भारी बढ़ोतरी होना जरूरी नहीं है।