शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स ने लगाई 400 अंकों की छलांग; निफ्टी 24,100 के ऊपर

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मुंबई। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन आई गिरावट के बाद, सोमवार का सवेरा शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। दलाल स्ट्रीट पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने जबरदस्त वापसी करते हुए हरे निशान के साथ कारोबारी हफ्ते की शुरुआत की है। हालांकि, बाजार की इस रफ्तार के बीच एक बड़ी चिंता भी गहरा रही है, जिसने निवेशकों के साथ-साथ आर्थिक नीति-निर्माताओं को भी असमंजस में डाल दिया है—और वह है इस बार मॉनसून की सुस्त रफ्तार।

शुरुआती कारोबार में उछाल और निवेशकों की चांदी

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने पुराने घावों पर मरहम लगाते हुए एक बार फिर दमदार तेजी का रुख अख्तियार किया। बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 423.30 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की बड़ी बढ़त के साथ 77,226.20 के स्तर पर जा पहुंचा। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और वह 119.11 अंक यानी 0.50 फीसदी की तेजी दर्ज करते हुए 24,132.20 के आंकड़े पर पहुंच गया। बीते शुक्रवार को लगातार पांच दिनों से जारी बाजार की तेजी थम गई थी, लेकिन सोमवार के इस दमदार कमबैक ने दलाल स्ट्रीट में फिर से जान फूंक दी है। शुरुआती ट्रेडिंग सेशन के दौरान एचसीएल टेक और मारुति सुजुकी के शेयरों ने सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया और टॉप गेनर्स में शुमार रहे।

कम बारिश और अल नीनो के कारण बाजार पर संकट के बादल

भले ही आज बाजार में चारों तरफ हरियाली दिख रही हो, लेकिन आने वाले समय में बाजार का भविष्य काफी हद तक इस बात पर तय होगा कि इंद्रदेव कितने मेहरबान होते हैं। अल नीनो के प्रभाव की वजह से चालू महीने में अब तक सामान्य के मुकाबले करीब 38 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि अगर मॉनसून ने अपनी रफ्तार नहीं पकड़ी तो खरीफ की फसलों की बुवाई बुरी तरह प्रभावित होगी। कृषि उत्पादन में कमी आने की वजह से देश में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे खाद्य महंगाई दर में उछाल आएगा। इसके साथ ही ग्रामीण भारत की क्रय शक्ति कमजोर होगी, जिससे मांग में बड़ी गिरावट आ सकती है। यह पूरा चक्र सीधे तौर पर देश की जीडीपी और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बुरा असर डाल सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख और घरेलू निवेशकों के लिए आगे की राह

एक तरफ जहां भारतीय बाजारों में लिवाली का माहौल बना हुआ है, वहीं विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेत बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है, जहां जापान के टॉपिक्स इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में 0.1 प्रतिशत का सुधार देखा गया। इसके उलट अमेरिकी बाजारों में मंदी का असर दिखा और एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत टूट गए। एशियाई बाजारों में भी मंदी हावी रही, जिसके चलते हांगकांग का हैंगसेंग 1.3 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.2 फीसदी की कमजोरी के साथ ट्रेड करते दिखे। यूरोपियन मार्केट के यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी 0.3 फीसदी की गिरावट रही। बहरहाल, घरेलू बाजार के लिए यह हफ्ता नई उम्मीदों वाला साबित हुआ है, लेकिन निवेशकों को आगे कोई भी बड़ा दांव लगाने से पहले अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और मॉनसून के आंकड़ों को ध्यान में रखना होगा।