ऑनलाइन श्राद्ध-पिंडदान सही या गलत? पितृ पक्ष शुरू होने से पहले जान लें शास्त्रों में क्या है नियम

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पितृ पक्ष आते ही लोग अपने पितरों को याद कर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की तैयारी शुरू कर देते हैं. इन दिनों गया, काशी, प्रयागराज, मथुरा समेत कई धार्मिक शहरों में लोग पितरों की शांति और मुक्ति के लिए पहुंचते हैं. लेकिन आज के समय में हर किसी के लिए इन तीर्थ स्थलों तक पहुंचना आसान नहीं होता. इसी वजह से अब कुछ लोग घर बैठे ऑनलाइन श्राद्ध और पिंडदान का विकल्प भी अपना रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ऑनलाइन श्राद्ध करना शास्त्रों के अनुसार सही है और क्या इससे पूजा का पूरा फल मिलता है.

सनातन धर्म में पितृ पक्ष का खास महत्व माना गया है. इस साल 27 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी. 15 दिनों तक चलने वाले इस पक्ष में लोग अपने पितरों के निमित श्राद्ध और पिंडदान करते हैं. ऑनलाइन श्राद्ध को लेकर बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर सुभाष पांडेय ने बताया कि पितरों की शांति और मुक्ति के लिए विशेष तीर्थ स्थान पर पहुंचकर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का महत्व है.
ऑनलाइन श्राद्ध को लेकर क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य?

प्रोफेसर सुभाष पांडेय ने बताया कि वर्तमान समय में व्यस्तता और समय की कमी के कारण कई लोग घर बैठे डिजिटल माध्यम से श्राद्ध की प्रक्रिया अपनाते हैं. उनके अनुसार सनातन धर्म की मान्यता के हिसाब से डिजिटल तरीके से श्राद्ध करना उचित नहीं है. उनका कहना है कि इस तरह किए गए श्राद्ध से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता.

हालांकि अगर कोई व्यक्ति काशी, प्रयागराज, मथुरा, द्वारिका, हरिद्वार या गया जैसे तीर्थ स्थलों तक नहीं जा सकता तो उसके लिए घर पर या घर के आसपास किसी कुंड या तालाब वाली जगह पर श्राद्ध कर्म किया जा सकता है. शास्त्रों में श्राद्ध और तर्पण को श्रद्धा भाव से किया जाने वाला अनुष्ठान माना गया है. ऐसे में व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार किसी उचित स्थान पर श्रद्धा के साथ पितरों के निमित श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण कर सकता है.
जल देते समय इन बातों का रखें ध्यान
श्राद्ध और तर्पण के दौरान शुद्धता का खास ध्यान रखना चाहिए. इसके लिए स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर ही पिंडदान और तर्पण जैसे कर्म करने चाहिए. इस दौरान हाथ में कुश धारण करने की भी परंपरा बताई गई है. इसके बाद पितरों को याद करके दाएं हाथ के अंगूठे के बीच से जल अर्पित किया जाता है. मान्यता के अनुसार तर्पण करते समय विधि और श्रद्धा का ध्यान रखना जरूरी है.
पिंडदान के बाद जरूर कराएं भोजन
पिंडदान और श्राद्ध कर्म के बाद ब्राह्मण को भोजन कराने की भी परंपरा है. हालांकि ब्राह्मण को भोजन कराने से पहले गाय, कौआ, कुत्ता और चींटी के लिए भोजन निकालने की बात कही गई है. मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है.