स्वाइन फ्लू नया नहीं, फिर इस बार क्यों मचा हड़कंप? जानिए एक्सपर्ट की राय

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में एच1एन1 (H1N1) इन्फ्लूएंजा यानी स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य चिंताएं बढ़ गई हैं। अस्पतालों में बुखार, तेज खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द के लक्षणों वाले मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। दिल्ली में अब तक लगभग 1,800 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कर्नाटक में यह आंकड़ा 4,000 के पार पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त मुंबई, चेन्नई और केरल के कई क्षेत्रों में भी मौसमी फ्लू के मामलों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

नए स्ट्रेन की आशंका पर स्पष्टीकरण

संक्रमण के बढ़ते प्रसार के बीच नए और घातक वैरिएंट को लेकर उठ रहे सवालों पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-ए (H1N1) कोई नया म्यूटेंट या नया स्ट्रेन नहीं है। यह वायरस पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से वातावरण में सक्रिय है। मामलों की संख्या में वृद्धि का अर्थ वायरस का अधिक घातक होना नहीं है, बल्कि मौसमी बदलाव और मानसून के दौरान इसकी सक्रियता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।

टीकाकरण और चिकित्सकीय असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार वायरस के वर्तमान रूप (क्लेड एवं सबक्लेड) पर मौजूदा फ्लू वैक्सीन पूरी तरह प्रभावी पाई गई है। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकांश मामलों में उचित आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और सामान्य चिकित्सकीय देखरेख से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। हालांकि, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

बचाव और सावधानी के जरूरी उपाय

एच1एन1 एक श्वसन संबंधी वायरस है, इसलिए इससे बचाव के लिए कोविड के समय अपनाए गए नियमों का पालन करना सबसे कारगर है। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का उपयोग, हाथों की नियमित सफाई और अस्वस्थ लोगों से सुरक्षित दूरी बनाकर संक्रमण की रोकथाम की जा सकती है। फ्लू के लक्षण दिखने पर बिना घबराए समय पर डॉक्टरी सलाह लेना और उचित सावधानी बरतना ही सुरक्षित रहने का सर्वोत्तम उपाय है।