PoK में विरोध की आवाज पर गोलियां, पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में 2 की मौत

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय नागरिकों पर वहां की सेना का दमनचक्र और अत्याचार लगातार बढ़ता जा रहा है। रावलकोट में पाकिस्तानी सेना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिससे दो प्रदर्शनकारियों की मौके पर ही मौत हो गई। इस बर्बर कार्रवाई में 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

रास्ता खुलवाने के बहाने नागरिकों पर बरसाईं गोलियां

यह हिंसक झड़प उस समय हुई जब पाकिस्तानी सेना रावलकोट इलाके में फंसे अपने खाद्य आपूर्ति काफिले (फूड सप्लाई काफिला) के लिए रास्ता साफ कराने पहुंची थी। दूसरी ओर, स्थानीय प्रदर्शनकारी अपनी बुनियादी मांगों को लेकर काफी समय से सड़क पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। सेना ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने या उन्हें हटाने का कोई दूसरा तरीका अपनाने के बजाय सीधे उन पर गोलियां दाग दीं, जिससे वहां चीख-पुकार मच गई।

सैन्य दमन के बाद पूरे PoK में भड़का जनआक्रोश

पाक सेना द्वारा की गई इस क्रूर गोलीबारी के बाद स्थानीय जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस खूनी घटना के विरोध में पूरे PoK क्षेत्र में प्रदर्शन और ज्यादा उग्र हो गए हैं। ज्ञात हो कि यहां के नागरिक अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर गत 10 जून से लगातार पाकिस्तान सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और सड़कों पर डटे हुए हैं।

ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी ने सरकार के सामने रखीं 38 मांगें

इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व कर रही जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान प्रशासन के समक्ष अपनी 38 सूत्रीय मांगें रखी हैं। कमेटी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो आने वाले दिनों में हुकूमत को और अधिक बड़े जनविद्रोह और गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

विस्थापितों की आरक्षित सीटें खत्म करने और महंगाई पर रोक की मांग

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में से एक यह है कि पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों (रिफ्यूजियों) के लिए विधानसभा में आरक्षित की गई 12 सीटों को तुरंत प्रभाव से समाप्त किया जाए। JAAC का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद सीधे तौर पर PoK की राजनीति को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के समझौतों पर नए सिरे से बातचीत करने, कमरतोड़ महंगाई पर लगाम लगाने और आम जनता तक रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं सुलभ कराने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई है।