नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह 'ईओएस-05' (EOS-05) का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए इसे देश के लिए गौरव का क्षण बताया। इसरो प्रमुख वी नारायणन ने पुष्टि की कि 2367 किलोग्राम वजनी इस उपग्रह को उसकी निर्धारित जियोसिनक्रोनस कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि की सराहना करते हुए लिखा कि यह प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती क्षमताओं का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र को मजबूत करने में इसरो और निजी संस्थानों के बीच बढ़ रहे तालमेल की भी प्रशंसा की। इसरो प्रमुख वी नारायणन के अनुसार, यह उपग्रह पूरी तरह सक्रिय है और जल्द ही रणनीतिक महत्व के आंकड़े (डाटा) भेजना शुरू कर देगा।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गिनाईं उपग्रह की विशेषताएं
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसरो टीम को बधाई देते हुए कहा कि जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का यह पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। यह उपग्रह विजिबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में अत्याधुनिक तस्वीरें लेने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत एक प्रमुख वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है।
रणनीतिक निगरानी और आपदा प्रबंधन में मिलेगी बड़ी मदद
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट यानी पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित होने वाला यह पहला इमेजिंग उपग्रह है। इसकी मदद से पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर बारीक नजर रखना आसान हो जाएगा, जिससे भारत को बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल होगी। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं के समय यह उपग्रह सटीक जानकारी और समय रहते पूर्व चेतावनी देने में भी अहम भूमिका निभाएगा।









