नई दिल्ली। ₹2,000 से ज्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले को लेकर जारी विवाद पर सरकार की तरफ से स्थिति साफ कर दी गई है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को साफ शब्दों में कहा कि इस फैसले में किसी भी बाहरी देश या विदेशी एजेंसी का कोई हाथ नहीं है। नीतिगत निर्णय पूरी तरह भारत के हित को ध्यान में रखकर स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं।
विदेशी दबाव का दावा पूरी तरह खारिज
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक आधिकारिक पोस्ट शेयर करते हुए इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि MDR लागू करने के पीछे विदेशी दबाव की बातें पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठी हैं। भारत अपने डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जुड़े नियम खुद तय करता है।
डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाने का लक्ष्य
सरकार ने स्पष्ट किया कि इस कदम का मुख्य मकसद देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय के लिए ज्यादा सुरक्षित, समावेशी और किफायती बनाना है। ताकि पूरा इकोसिस्टम बिना किसी आर्थिक रुकावट के बेहतर ढंग से काम कर सके।









