तमिलनाडु में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल, शिकायत के 24 घंटे बाद हत्या से मचा हड़कंप

0
6

चेन्नई: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के तिरुवोट्टियूर इलाके में 26 वर्षीय युवक प्रदीप राज की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक ने हत्या से ठीक एक दिन पहले पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस आयुक्त कार्यालय में गुहार लगाकर अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की थी। उसने स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर पर भी मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। अज्ञात बदमाशों द्वारा पीछा कर की गई इस हत्या के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है।

सुरक्षा की गुहार के अगले ही दिन कर दी गई हत्या

तिरुवोट्टियूर के वेस्ट माडा स्ट्रीट निवासी प्रदीप राज ने अपनी हत्या से एक दिन पूर्व पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी थी। उसने अपनी जान को गंभीर खतरा बताते हुए परिवार के लिए तत्काल सुरक्षा मांगी थी। इसके साथ ही एक वीडियो संदेश जारी कर उसने आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस तंत्र उसकी मदद करने के बजाय उस पर दबाव बना रहा था।

वित्तीय लेन-देन के विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला

प्रदीप राज के अनुसार, उसका परिवार पिछले 15 वर्षों से इलाके में निवास कर रहा है। उसकी मां द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के लिए लोन लेने के बाद परिवार एक आर्थिक विवाद में उलझ गया था। आरोप है कि जब पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया, तो उल्टे उन्हीं के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराकर प्रदीप को हिरासत में ले लिया गया।

पुलिस अधिकारी पर प्रताड़ना और धमकी देने का आरोप

अपने वीडियो बयान में मृतक ने स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर पर पक्षपात का आरोप लगाया था। प्रदीप का दावा था कि अधिकारी ने दूसरी पार्टी का समर्थन करते हुए उसे धमकाया और यह तक कहा कि यदि उसे शिकायत करनी है तो वह उच्च स्तर पर संपर्क करे। उसने यह भी आरोप लगाया था कि अपने कानूनी सलाहकार को साथ ले जाने के बावजूद पुलिस स्टेशन में उसके साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई।

हत्याकांड के बाद तमिलनाडु में बढ़ा राजनीतिक तनाव

इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल की सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए शासन प्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि शहर में दिन-ब-दिन हत्या और आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं और राज्य सरकार नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रही है।