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चावल पापड़ उद्योग से आत्मनिर्भरता तक विद्यावती बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

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रायपुर : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत ननकट्ठी की विद्यावती चौधरी एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरी हैं। उन्होंने न केवल स्वयं आत्मनिर्भरता की राह पर कदम बढ़ाया, बल्कि अपने गांव की अनेक महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़कर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की नई कहानी लिखी है।

समूह की बचत एवं आंतरिक ऋण का किया सदुपयोग
       आराध्या स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष एवं एफएलसीआरपी के रूप में कार्यरत विद्यावती चौधरी ने समूह की बचत एवं आंतरिक ऋण सुविधा का सदुपयोग करते हुए चावल पापड़ निर्माण और सिलाई केंद्र की शुरुआत की। सीमित संसाधनों और छोटे स्तर पर शुरू किए गए इस प्रयास में समूह की महिलाएं घर-आंगन में मिलकर चावल पापड़ तैयार करती थीं। मेहनत, अनुशासन और गुणवत्ता को आधार बनाकर महिलाओं ने अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार में पहचान दिलाई।

समूह के उत्पाद स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय
         समूह की महिलाएं प्रतिदिन सामूहिक रूप से पापड़ निर्माण का कार्य करती हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए गुणवत्तापूर्ण चावल पापड़ों की मांग लगातार बढ़ती गई, जिससे यह छोटा प्रयास धीरे-धीरे एक सफल ग्रामीण उद्यम के रूप में विकसित हो गया। आज समूह के उत्पाद स्थानीय बाजारों में लोकप्रिय हैं और इससे प्रतिमाह हजारों रुपये की आय अर्जित हो रही है।

परिवार एवं समाज में निर्णय लेने हुईं सशक्त
        इस उद्यम ने महिलाओं के जीवन में आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर उल्लेखनीय बदलाव लाया है। नियमित आय के माध्यम से परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति पहले की अपेक्षा अधिक सहज हो गई है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे अब परिवार एवं समाज में अपने निर्णय स्वयं लेने की दिशा में सशक्त हुई हैं।

लखपति दीदी बनने का सपना कर रहीं साकार
         विद्यावती चौधरी की सफलता यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। उनके नेतृत्व में ननकट्ठी की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता, सामूहिकता और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। बिहान मिशन के सहयोग से संचालित यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वावलंबन का सशक्त मंच बन गई है। ननकट्ठी की महिलाएं आज अपने उत्पादों के साथ गर्व से खड़ी हैं और "लखपति दीदी" बनने के सपने को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
 

उप मुख्यमंत्री शुक्ल की अध्यक्षता में मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रारूप पर मंत्रिपरिषद समिति ने किया विमर्श

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भोपाल : उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में वल्लभ भवन में मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रारूप पर मंत्रिपरिषद समिति ने विमर्श किया। बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और समिति के सदस्यों ने नीति को जन-केंद्रित, सेवा-उन्मुख, गरीब एवं वंचित वर्गों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

बैठक में मंत्रिपरिषद समिति के सदस्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह सहित अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण तृतीयक एवं सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों तथा दूरस्थ अंचलों के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए परोपकारी संस्थाओं की सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का मूल उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सेवा-भाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आमजन तक पहुंचाना है।

वर्तमान में प्रदेश गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं पहुंच के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना कर रहा है। सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों सहित उच्चस्तरीय स्वास्थ्य संस्थान मुख्यतः बड़े शहरों तक सीमित हैं, जिससे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के नागरिकों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को प्रभावित करती है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य प्रदेश में उच्चस्तरीय तृतीयक एवं सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की स्थापना को प्रोत्साहित करना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करना, विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाना, गरीब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना, अन्य राज्यों में उपचार के लिये मरीजों के पलायन को कम करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाना है।

नीति के अंतर्गत केवल सेवा-उन्मुख एवं लाभ-निरपेक्ष परोपकारी संस्थाओं को पात्र माना जाएगा। इनमें कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के अंतर्गत पंजीकृत कंपनियां, भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के अंतर्गत पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट तथा सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत संस्थाएं शामिल हो सकेंगी। पात्र संस्थाओं के लिए न्यूनतम तीन वर्ष का पंजीकरण एवं सेवा गतिविधियों का संतोषजनक अनुभव होना प्रस्तावित किया गया है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं नर्सिंग कॉलेज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने वाली संस्थाओं को प्राथमिकता दिए जाने का भी प्रस्ताव है।

बैठक में प्रस्तावित प्रोत्साहनों की भी समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा उपयुक्त भूमि का चयन कर रियायती दरों पर दीर्घकालीन लीज पर उपलब्ध कराने, सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिये उच्च लागत वाले चिकित्सा उपकरणों पर निर्धारित शर्तों के अधीन अनुदान उपलब्ध कराने तथा विभिन्न स्वीकृतियों के लिए सिंगल-पॉइंट क्लियरेंस प्रणाली विकसित करने जैसे प्रावधानों पर चर्चा की गई।

मंत्रिपरिषद समिति ने नीति के प्रारूप का परीक्षण करते हुए सुझाव दिया कि इसके सभी प्रावधानों का केंद्र बिंदु आमजन, विशेषकर गरीब एवं वंचित वर्गों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। समिति ने नीति को अधिक सेवा-उन्मुख, पारदर्शी एवं जनहितकारी स्वरूप प्रदान करने पर बल दिया।
 

राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए 5,960 करोड़ रूपये की योजनाओं सहित कई जनहितैषी कार्यों को मंजूरी

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए 5 हजार 960 करोड़ रूपये की योजनाओं सहित कई जनहितैषी कार्यों को मंजूरी दी गई। बैठक में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान को गति देते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 5 वर्षों तक निरंतर संचालित रखने के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।

शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए राज्य में शासकीय माध्यमिक और हाई स्कूलों के उच्च स्तरीय उन्नयन की योजना को सैद्धांतिक सहमति दी गई, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच बढ़ेगी और ड्रॉप आउट दर में कमीं आएगी। इसके अतिरिक्त, किसानों के आर्थिक संबल के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण योजना की नई शर्तों, शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय की स्थापना, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 3 हजार 580 करोड़ रूपये से अधिक की राशि की निरंतरता तथा जनजातीय क्षेत्रों के विद्युतीकरण संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना के संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना प्रदेश में 1 अप्रैल 2006 से प्रभावशील है। योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। योजना अंतर्गत गरीब जरूरतमंद, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/परित्यक्ता के सामूहिक विवाह में आर्थिक सहायता के रूप में राशि 55 हजार रूपये प्रति कन्या के मान से दी जाती है। योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रूपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह, योजना महिला सशक्तिकरण की एक अहम योजना है, जिसके अंतर्गत गरीब और जरुरतमंद अभिभावकों की कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्पन्न होता है। इस योजना से विवाह की वैधानिक आयु सुनिश्चित हो जाती है। यह योजना महिलाओं के सामाजिक उत्थान के लिये महत्वपूर्ण है।

225 शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल और 300 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन को सैद्धांतिक स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच एवं गुणवत्ता में वृद्धि के लिए शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल एवं हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन की योजना पर सैद्धांतिक स्वीकृति दी।

स्वीकृति अनुसार वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल तथा 100 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नयन किया जाएगा। आगामी 2 वर्षों 2027-28 एवं 2028-29 में भी इसी प्रकार प्रतिवर्ष 75 माध्यमिक एवं 100 हाईस्कूलों के उन्नयन पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। साथ ही विद्यालयों के उन्नयन के लिए अनुमानित व्यय राशि 635 करोड़ 24 लाख रूपये के प्रस्ताव पर सहमति दी। विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। मापदण्डों के आधार पर जिला स्तर से मैपिंग अनुसार 315 हाई स्कूल एवं 214 हायर सेकेण्डरी स्कूल खोले जाने की आवश्यकता है।

सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया में विद्यालयों का उन्नयन नहीं किया जाएगा। सांदीपनि विद्यालय के कैचमेंट एरिया में आने वाले विद्यालयों के समस्त विद्यार्थियों का प्रवेश सांदीपनि विद्यालय में होने पर विद्यालय को अन्य आवश्यकता वाले स्थानों पर युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। उन्नत विद्यालय अपने वर्तमान भवन या अन्य शासकीय भवन में संचालित होंगे। आवश्यकता एवं बजट उपलब्धता के अनुसार अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए जाएंगे। वास्तविक रूप से आवश्यक विद्यालयों की संख्या का आंकलन गति शक्ति पोर्टल, जनसंख्या एवं यू-डाइस के आंकड़ों के आधार पर की जायेगी।

राज्य में हाई स्कूल का सकल नामांकन दर (जीईआर) 75 प्रतिशत तथा हायर सेकेण्डरी स्तर पर 55 प्रतिशत है। कक्षा 8 से 9 में कक्षांतरण दर 77 प्रतिशत और कक्षा 10 से 11 में 68 प्रतिशत है। विद्यालयों की दूरी अधिक होने होने के कारण विद्यार्थियों का प्रवेश कम होता है या वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं रह पाते, जिससे ड्रॉप आउट दर बढ़ती है। इसलिए विद्यार्थियों की पहुँच में विद्यालय उपलब्ध कराकर उच्च नामांकन एवं निरंतरता सुनिश्चित करना इस निर्णय का मूल लक्ष्य है।

शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण प्रदाय करने के लिए किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति दी गई। स्वीकृति अनुसार खरीफ एवं रबी सीजन के लिए पृथक-पृथक देय तिथि (ड्यू डेट) नहीं रखते हुए उसके स्थान पर वार्षिक एकल ऋण सीमा रखी जाएगी, जिसमें नगद एवं वस्तु ऋण की उप-सीमा निर्धारित रहे। योजनान्तर्गत देय तिथि (डयू डेट) कृषकों को स्वीकृत वार्षिक एकल लिमिट से प्रथम ऋण आहरण से 12 माह निर्धारित की जाएगी और अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा।

प्रदेश में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध बहुउददेशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना वर्ष 2012-13 से निरन्तर लागू है। योजनान्तर्गत खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित तिथि (ड्यू डेट) तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों से रूपये 3 लाख तक के अल्पावधि फसल ऋण पर कोई ब्याज नहीं लिया जाता है।

योजना में राज्य शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष बेस रेट के साथ-साथ डयू डेट आदि का निर्धारण किया जाता है और निर्धारित बेसरेट में से भारत सरकार से प्राप्त होने वाली ब्याज सहायता को कम करते हुये शेष राशि राज्य शासन द्वारा ब्याज अनुदान के रूप में उपलब्ध करायी जाती है, जिससे कृषकों को प्रदेश में शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि ऋण उपलब्ध होता है।

शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुपालन में सत्र 2026-27 में शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति दी। स्वीकृति अनुसार शैक्षणिक वर्ग के 9 पद और अशैक्षणिक वर्ग के 8 पद, इस प्रकार कुल 17 पदों के सृजन और व्यय राशि 2 करोड़ 39 लाख 92 हजार रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही आवश्यक कार्यवाही करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को अधिकृत किया गया है।

जवाहरलाल नेहरू स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, शुजालपुर में विधि पाठ्यक्रम (एलएलबी तीन वर्षीय) एक संकाय के रूप में संचालित है। बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया के 2008 के 'लीगल एजुकेशन रूल्स' के अनुसार मान्यता के लिए विधि पाठ्यक्रमों को संकाय के स्थान पर पृथक शासकीय विधि महाविद्यालय में संचालित किया जाना आवश्यक है। इसी आधार पर शुजालपुर में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किया जा रहा है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत 3 हजार 580 करोड़ 7 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया अन्तर्गत 500 करोड़ रूपये से अधिक की संबंधित योजना लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत परिवहन, कमीशन व्यय की प्रतिपूर्ति का 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 3 हजार 580 करोड़ 7 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

अन्य निर्णय

मंत्रि-परिषद द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत विद्युतीकरण कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा दिये गये केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंश पूँजी के रूप में उपलब्ध करवाये जाने का निर्णय लिया है।
 

भाजपा ने ‘एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’ नारे का किया स्मरण

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर भाजपा कार्यालय में दी गई श्रद्धांजलि, सीएम और वरिष्ठ नेताओं ने किया नमन

भोपाल।  भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर मंगलवार को भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश पचौरी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग सहित अन्य नेताओं के साथ डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके राष्ट्रहित में किए गए योगदान को याद किया। इस दौरान पार्टी के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नेताओं ने डॉ. मुखर्जी के उस ऐतिहासिक संकल्प को याद किया, जिसमें उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने ‘एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’ का नारा देकर राष्ट्र की एकता को सर्वोपरि माना। नेताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण और देश की अखंडता के लिए संघर्ष करते हुए डॉ. मुखर्जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका जीवन राष्ट्र सेवा, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रेरणादायी उदाहरण है।

डॉ. मुखर्जी के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के साथ कार्य कर रही है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया। भाजपा नेताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी देश को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढऩे की प्रेरणा देते हैं। उनके बलिदान दिवस पर पूरा देश ऐसे महान राष्ट्रवादी नेता को श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है।

SIR अभियान को लेकर निर्वाचन आयोग ने जारी किए नए निर्देश Election Commission of India

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जमशेदपुर। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूर्वी सिंहभूम जिले में मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिहीन बनाने के लिए एक विशेष गहन पुनरीक्षण महाअभियान का आगाज होने जा रहा है। इस संबंध में प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि क्षेत्र का कोई भी योग्य नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे।

एक महीने तक चलेगा भौतिक सत्यापन का कार्य

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त राजीव रंजन ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि आगामी 30 जून से लेकर 29 जुलाई तक सभी बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे। वे हर घर का व्यक्तिगत दौरा करेंगे और वहां रहने वाले मतदाताओं की उपस्थिति का जमीनी स्तर पर सत्यापन करेंगे। राहत की बात यह है कि इस शुरुआती चरण के दौरान आम जनता से किसी भी प्रकार के कागजात या प्रमाण पत्र की मांग नहीं की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 1 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि को मानक मानकर नए युवा मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज किए जाएंगे, जबकि पूरी तरह से संशोधित व अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन 7 अक्टूबर को किया जाएगा।

प्रवासी श्रमिकों और छात्रों के लिए ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा

प्रशासन ने इस बार यह दृढ़ संकल्प लिया है कि जिले का कोई भी पात्र नागरिक मतदाता बनने से न छूटे। रोजगार के सिलसिले में राज्य से बाहर रहने वाले मजदूरों या अन्य महानगरों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं की सहूलियत के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उनके परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक 'ईसीआइ-नेट' (ECI-NET) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म प्राप्त कर पंजीकरण की प्रक्रिया को आसानी से पूरा करवा सकता है।

चुनिंदा मामलों में ही होगी दस्तावेजों की आवश्यकता

पुनरीक्षण के अगले चरण के तहत 5 अगस्त से 3 अक्टूबर के बीच चलने वाले जांच अभियान में केवल उन्हीं नागरिकों से दस्तावेज मांगे जाएंगे, जिन्हें विशेष परिस्थितियों में कोई नोटिस दिया गया हो। जिन लोगों के नाम वर्तमान मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज हैं, उन्हें कोई भी नया प्रमाण पत्र जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

हालांकि, यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट गया है, तो उसे अपना नाम जुड़वाने के लिए सरकारी पहचान पत्र, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र या निवास प्रमाण पत्र में से किसी भी एक वैध कागजात की स्व-हस्ताक्षरित (Self-Attested) प्रति देनी होगी। पहली बार मतदाता सूची का हिस्सा बनने वाले युवाओं को प्रपत्र-6 (Form-6) भरना अनिवार्य होगा।

डिजिटल माध्यमों से आसान हुआ पंजीकरण और समाधान

तकनीक के इस दौर में नागरिकों को सहूलियत देने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने टोल-फ्री वोटर हेल्पलाइन नंबर '1950' को पूरी तरह सक्रिय रखा है। इसके साथ ही, आम लोग ईसीआइ-नेट की वेबसाइट और आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए भी अपनी समस्याओं का निपटारा घर बैठे कर सकते हैं।

इस देशव्यापी पुनरीक्षण अभियान की जमीनी शुरुआत 30 जून को सुबह 11 बजे सभी मतदान केंद्रों पर बीएलओ की पहली बैठक के साथ होगी। इसके अतिरिक्त, युवा वर्ग को जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के तत्वावधान में विशेष गोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में नया ट्विस्ट, पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

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भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में कानून का एक बहुत बड़ा डंडा चला है। इस कथित पुलिस मुठभेड़ को लेकर मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी द्वारा दिए गए शिकायती आवेदन के आधार पर पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ शाहपुर थाने में एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कर ली गई है। भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने मंगलवार (23 जून, 2026) को इस बड़ी कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि की है।

घटना के बाद पीड़ित परिवार द्वारा शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दिया गया था। इसी आवेदन पर संज्ञान लेते हुए विभाग ने जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), शाहपुर थाना अध्यक्ष और उनके सहयोगी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

पांच पुलिसकर्मी पहले ही हो चुके हैं सस्पेंड

इस संवेदनशील मामले में विभागीय जांच के बाद पहले ही पांच पुलिसकर्मियों को सेवा से निलंबित (सस्पेंड) किया जा चुका है। सस्पेंड होने वाले पुलिसकर्मियों की सूची इस प्रकार है:

  1. राजेश कुमार मालाकार (तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष)

  2. अंकित आर्यन (पुलिस अवर निरीक्षक – एसआई)

  3. हरिश्चंद्र कुमार (पुलिस अवर निरीक्षक – एसआई)

  4. रामाशंकर यादव (सहायक अवर निरीक्षक – एएसआई)

  5. मीरा कुमारी (महिला सिपाही)

मां का गंभीर आरोप: 'फेसबुक लाइव पर हथियार फेंकने के बाद भी मार दी 5 गोलियां'

मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सौंपे गए अपने शिकायती पत्र में बेहद चौंकाने वाले और गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • प्रशासन से संघर्ष: आवेदन के मुताबिक, भरत भूषण तिवारी इलाके के बाढ़ विस्थापितों और पीड़ितों की समस्याओं व हक की लड़ाई को लेकर स्थानीय प्रशासन के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहा था, जिससे पुलिस उससे नाराज थी।

  • घर से ले गई पुलिस: घटना वाले दिन कई पुलिस अधिकारी और भारी संख्या में जवान उनके घर पहुंचे और भरत तिवारी को जांच के बहाने अपने साथ चलने को कहा।

  • फेसबुक लाइव और सरेंडर: मां का दावा है कि जब पुलिस ने उसे घेरा, तो भरत तिवारी ने बकायदा फेसबुक लाइव (Facebook Live) शुरू किया। लाइव वीडियो के दौरान ही उसने अपने हाथ में मौजूद हथियार को दूर फेंक दिया और पूरी तरह से खुद को पुलिस के हवाले (सरेंडर) कर दिया था।

  • जमीन पर गिराकर मारी गोली: आरोप है कि निहत्था होने और आत्मसमर्पण करने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे बेरहमी से पकड़कर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक (एसडीपीओ) के सीधे आदेश पर उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। पोस्टमार्टम और आवेदन के अनुसार, भरत तिवारी को बेहद करीब से 5 गोलियां मारी गईं।

परिजनों को घंटों रखा अंधेरे में; अब शुरू हुई निष्पक्ष जांच

आशा देवी ने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह भी आरोप लगाया कि कत्ल की इस वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस उन्हें और परिवार के अन्य सदस्यों को अपने साथ ले गई। कई घंटों तक परिजनों को बंधक जैसी स्थिति में रखा गया और एनकाउंटर या भरत की स्थिति के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद देर शाम को उन्हें अचानक सूचना दी गई कि भरत तिवारी की मौत हो चुकी है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सीधे आला अधिकारियों और पुलिस दल पर ही एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे महकमे में खलबली मची हुई है। मानवाधिकार आयोग के कड़े नियमों के तहत अब इस पूरे एनकाउंटर की कड़ियों, फेसबुक लाइव के फुटेज और फॉरेंसिक साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच की जा रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद गहराया

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बाड़मेर। राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ अब महज एक प्रशासनिक अभियान नहीं रह गया है। सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की इस मुहिम ने अब सूबे में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा पुख्ता करने और अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए चलाए जा रहे इस बुलडोजर अभियान को प्रशासन राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहा है, जबकि विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों ने इस कार्रवाई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सीमाई जिलों में व्यापक स्तर पर बुलडोजर अभियान

भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और फलौदी जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में प्रशासन बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों को चिन्हित कर उन्हें हटाने में जुटा है। इस विशेष अभियान के तहत रामसर, गडरारोड, मालाणा, नाचना और नोख समेत दर्जनों गांवों में सरकारी जमीनों पर बने अवैध ढांचों और कुछ धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह पूरी कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही की जा रही है, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

स्थानीय स्तर पर विरोध और भेदभाव के आरोप

दूसरी तरफ, सीमा क्षेत्र के कई गांवों के बाशिंदों ने इस कार्रवाई को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। केलन का पार गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पुरानी एक मस्जिद को अचानक नोटिस थमाकर जमींदोज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन एक विशेष वर्ग से जुड़े स्थलों को निशाना बना रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि यह अभियान वास्तव में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए है, तो बिना किसी भेदभाव के सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से बुलडोजर चलना चाहिए।

ओवैसी और गहलोत ने उठाए कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर अब राष्ट्रीय और राज्य स्तर के राजनेताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों में चुनिंदा धार्मिक स्थलों को ढहाया जा रहा है, और इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

वहीं, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि धार्मिक व संवेदनशील स्थलों पर इस तरह की त्वरित कार्रवाई से आपसी सौहार्द बिगड़ सकता है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि ऐसे मामलों में बल प्रयोग के बजाय स्थानीय संवाद का रास्ता चुना जाना चाहिए। नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई में किसी भी प्रकार के पक्षपात की बू नहीं आनी चाहिए।

जनप्रतिनिधियों का सीमावर्ती गांवों का दौरा

कार्रवाई से प्रभावित भलगांव और दहेवा जैसे सुदूर क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने के लिए बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और बायतु के विधायक हरीश चौधरी जमीनी स्तर पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सांसद बेनीवाल ने जनता से शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि थार का यह मरुस्थलीय इलाका हमेशा से आपसी भाईचारे की मिसाल रहा है और किसी भी विवाद का निपटारा कानून के दायरे में रहकर बातचीत से ही होना चाहिए। विधायक हरीश चौधरी ने भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाएंगे ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।

सत्तारूढ़ दल का पलटवार: सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं

विपक्ष के इन तीखे हमलों पर पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक एजेंसियां केवल अपने तय कर्तव्यों का पालन कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक किसी भी तरह का अवैध कब्जा या संदिग्ध गतिविधि देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। चौधरी ने जोर देकर कहा कि यह अभियान किसी जाति, धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने और सरकारी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने का एक वैध प्रयास है, जो आगे भी बिना किसी दबाव के जारी रहेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे के बाद बढ़ी सक्रियता

गौरतलब है कि यह प्रशासनिक तेजी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया राजस्थान सीमाई दौर के बाद देखने को मिली है, जहां उन्होंने उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी। केंद्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा के बेहद नजदीक बने अनधिकृत ढांचे भविष्य में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। विपक्ष के कड़े रुख और स्थानीय संगठनों के विरोध के बीच, ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ अब महज एक जमीन खाली कराने की कार्रवाई न रहकर सुरक्षा, सियासत और सामाजिक संतुलन के एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है।

चलते हाईवे पर आग का गोला बनी बस, मची अफरा-तफरी

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अजमेर। अजमेर-किशनगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब राजस्थान रोडवेज की एक चलती बस में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरी बस लपटों से घिर गई। गनीमत यह रही कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने सूझबूझ दिखाई और समय रहते बस में सवार सभी 35 मुसाफिरों को सुरक्षित नीचे उतार लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

ड्राइवर-कंडक्टर की सूझबूझ से टला हादसा

चश्मदीदों के मुताबिक, बस हाईवे पर सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, तभी अचानक उसके इंजन से धुआं निकलने लगा। खतरे को भांपते हुए चालक ने बिना देर किए बस को हाईवे के किनारे रोक दिया। इसके तुरंत बाद चालक और परिचालक ने मिलकर तत्परता दिखाई और सभी यात्रियों को फौरन बस से बाहर निकालना शुरू किया। यात्रियों के उतरते ही कुछ ही पलों में आग पूरी बस में फैल गई।

शॉर्ट सर्किट हो सकता है कारण

हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। दमकलकर्मियों ने काफी प्रयासों के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी और सिर्फ उसका लोहे का ढांचा ही बचा। शुरुआती तफ्तीश में कयास लगाए जा रहे हैं कि आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है।

यात्रियों ने जताया आभार, यातायात हुआ सामान्य

इस घटना की वजह से हाईवे पर कुछ देर के लिए वाहनों की रफ्तार थम गई और जाम की स्थिति बन गई, जिसे पुलिस ने बाद में खुलवाकर यातायात को सुचारू रूप से चालू करवाया। सुरक्षित बचे यात्रियों ने बस स्टाफ की जमकर तारीफ की और कहा कि अगर ड्राइवर-कंडक्टर थोड़ी भी लापरवाही बरतते, तो कई जिंदगियां खतरे में पड़ सकती थीं। राहत की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में कोई भी हताहत नहीं हुआ है।

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी Rahul Gandhi

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जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में आज भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। हाईकोर्ट ने इस जवाब को रिकॉर्ड पर ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मांगी गई अंतरिम राहत पर अब अगली सुनवाई 24 जून को तय की गई है। इस सुनवाई में यह साफ हो जाएगा कि राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मिलेगी या उन्हें अदालत के सामने हाजिर होना पड़ेगा।

समन को दी गई है चुनौती

दरअसल, राहुल गांधी ने भोपाल की विशेष अदालत द्वारा जारी किए गए समन के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दर्ज कराए गए मानहानि के मामले में भोपाल कोर्ट ने यह समन जारी किया था। राहुल गांधी की याचिका में तर्क दिया गया है कि समन जारी करने की पूरी प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने अदालत से इस समन को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला साल 2018 का है, जब झाबुआ में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक मामले का उल्लेख किया था। कार्तिकेय सिंह चौहान का आरोप है कि राहुल गांधी ने उस भाषण में उनका और उनके पिता शिवराज सिंह चौहान का नाम घसीटा, जिससे उनकी सामाजिक छवि को गहरा धक्का लगा। इसी वजह से उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

राहुल गांधी की ओर से दी गई थी सफाई

इस विवाद पर अगले ही दिन राहुल गांधी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि वे मंच से छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे का नाम लेना चाहते थे, लेकिन मानवीय भूल (गलती) के कारण उनके मुंह से कार्तिकेय चौहान का नाम निकल गया था।

नोट: इस ड्राफ्ट में से आपकी आवश्यकता के अनुसार 'अभी तक न्यूज' या किसी भी अन्य न्यूज चैनल का नाम पूरी तरह हटा दिया गया है।

कूटनीति के चौराहे पर ट्रंप, ईरान और इजरायल के बीच संतुलन की चुनौती

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वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही गुप्त कूटनीतिक बातचीत ने पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के सुरक्षा समीकरणों को एक नया और बेहद अप्रत्याशित मोड़ दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी शीर्ष अधिकारियों के बीच परवान चढ़ रही इस नई सहमति को लेकर इजरायल के भीतर गहरी चिंता और भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इजरायल को यह डर सता रहा है कि इस गुप्त समझौते से न सिर्फ लेबनान में ईरान का राजनीतिक और सैन्य दबदबा और ज्यादा मजबूत हो जाएगा, बल्कि कट्टर दुश्मन हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की आक्रामक सैन्य क्षमता भी बेहद कमजोर पड़ जाएगी।

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में कई दौर की अत्यंत गुप्त वार्ता संपन्न हुई है। इस गोपनीय बैठक के बाद दोनों देशों ने एक रणनीतिक 'सहमति पत्र' (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में चल रहे विनाशकारी युद्ध और सैन्य तनाव को तुरंत रोकना है।

समझौते से बेंजामिन नेतन्याहू आखिर क्यों हैं परेशान?

ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे इस सीधे समझौते ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (जिन्हें राजनीतिक हलकों में 'बीबी' भी कहा जाता है) की रातों की नींद उड़ा दी है। तेल अवीव (इजरायल) के एक उच्च पदस्थ रणनीतिक सूत्र ने साफ शब्दों में कहा कि, "प्रधानमंत्री नेतन्याहू वाशिंगटन के इस बदले रुख से बेहद घबराए हुए और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।" इस समझौते से इजरायल की चिंता के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

  • हिजबुल्लाह को मिला सुरक्षा कवच: इजरायल का पुख्ता मानना है कि ईरान ने अमेरिका के साथ सौदेबाजी में लेबनान के मुद्दे को चालाकी से शामिल कर लिया है। ऐसा करके ईरान ने अपने सबसे बड़े और घातक छद्म संगठन (प्रॉक्सी वॉर ग्रुप) 'हिजबुल्लाह' को इजरायली हमलों से एक तरह का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा कवच दिला दिया है।

  • सैन्य कार्रवाई की आजादी पर पाबंदी: अब तक इजरायल अपनी खुफिया जानकारी के आधार पर जब चाहता, तब लेबनान में घुसकर हिजबुल्लाह के ठिकानों और हथियारों के जखीरे पर एयरस्ट्राइक (हवाई हमले) कर देता था। लेकिन इस नए समझौते के बाद, इजरायल को लेबनान में कोई भी सैन्य कदम उठाने से पहले वाशिंगटन (व्हाइट हाउस) के कड़े सवालों, जांच और जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा।

  • सेना वापसी का दबाव: तीसरा और सबसे तात्कालिक डर यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल पर यह कड़ा दबाव बना सकते हैं कि वह दक्षिणी लेबनान की सीमा से अपनी जमीनी सेना (IDF) को तुरंत पीछे बुलाए, जबकि इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह का खतरा अभी सीमा पर टला नहीं है।

जो बाइडेन के पुराने समझौते और ट्रंप के नए मैकेनिज्म में जमीन-आसमान का अंतर

इजरायली रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बन रहा यह नया ढांचा नवंबर 2024 में जो बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल के दौरान हुए युद्धविराम समझौतों को पूरी तरह से कमजोर और बेअसर करता है। दोनों समझौतों की रूपरेखा में यह बड़ा अंतर है:

तुलनात्मक बिंदुपुराना मैकेनिज्म (नवंबर 2024 – बाइडेन)नया मैकेनिज्म (2026 – ट्रंप प्रशासन)
मुख्य वार्ताकार और भागीदारइजरायल, लेबनान, अमेरिका और फ्रांस सीधे मेज पर थे।केवल अमेरिका और ईरान ही मुख्य भूमिका में हैं (इजरायल बाहर)।
रणनीतिक फोकसदक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह के सैन्य ढांचे को उखाड़ना।हिजबुल्लाह को खत्म करने के बजाय केवल आपसी झड़पें रोकना।
ऑपरेशनल फ्रीडम (हमले की आजादी)संभावित खतरे की भनक लगते ही तुरंत हमले की छूट थी।अत्यधिक सीमित। केवल तब कार्रवाई जब हमला सिर पर आ चुका हो।

पाकिस्तान और कतर बने मध्यस्थ; पश्चिम एशिया में नया सुरक्षा संतुलन

सीमा पर जारी तनाव को कम करने और युद्धविराम को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए एक नए 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' का गठन किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सेल में लेबनान के साथ-साथ मुख्य मध्यस्थ और शांति तंत्र की निगरानी के रूप में पाकिस्तान और कतर को शामिल किया गया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन दो मुस्लिम देशों की एंट्री से पश्चिम एशिया में सुरक्षा का संतुलन इजरायल के खिलाफ और ईरान के पक्ष में झुक सकता है।

अक्टूबर में होने वाले चुनाव और नेतन्याहू की लॉबिंग

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में इजरायल की घरेलू राजनीति भी एक बड़ा फैक्टर बनी हुई है, क्योंकि इजरायल में आगामी अक्टूबर महीने में आम चुनाव होने वाले हैं। ऐसे नाजुक समय में हिजबुल्लाह के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई या कमजोरी बेंजामिन नेतन्याहू की राष्ट्रवादी नेता वाली छवि को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अपनी साख बचाने के लिए नेतन्याहू ने अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रॉन डर्मर को ट्रंप के करीबियों को प्रभावित करने और लॉबिंग के काम पर लगाया था। इसी बैकचैनल लॉबिंग के बाद ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए एक सख्त पोस्ट लिखा था, ताकि इजरायल के गुस्से को शांत किया जा सके।

लेबनान में खुशी की लहर, ट्रंप बोले— "मैं प्रॉब्लम सॉल्वर हूं"

दूसरी तरफ, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन इस नए अमेरिकी-ईरानी सिस्टम से बेहद खुश और संतुष्ट नजर आ रहे हैं। खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने फोन पर उन्हें इस पूरे शांति प्लान की विस्तृत जानकारी दी है।

जब वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से इजरायल की इस गहरी चिंता और नाराजगी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपने चिरपरिचित कारोबारी अंदाज में कहा, "मैं एक 'प्रॉblem सॉल्वर' (समस्याएं सुलझाने वाला) हूं। मैं बहुत तेजी से और कुशलता के साथ बड़ी से बड़ी वैश्विक समस्याओं को हल कर लेता हूं, और बीबी (नेतन्याहू) के साथ भी इस मसले को बहुत जल्द सुलझा लूंगा।"

हालांकि, इस नीति का विरोध खुद अमेरिका के भीतर भी शुरू हो गया है। नेतन्याहू के सबसे पक्के समर्थक माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा, "लेबनान के लिए बनाया जा रहा यह नया सिस्टम जिसमें मुख्य हितधारक इजरायल ही शामिल नहीं है, मेरी नजर में एक बहुत बड़ी रणनीतिक भूल है।"

फिलहाल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की देखरेख में इजरायल और लेबनान के बीच अलग से एक औपचारिक बातचीत की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना सुरक्षित हट सके। लेकिन अमेरिका-ईरान की इस नई गुप्त समझ ने हिजबुल्लाह को जो संजीवनी दी है, उसने इजरायल के पूरे रक्षा तंत्र में हड़कंप मचा रखा है।

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