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भाजपा ने ‘एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’ नारे का किया स्मरण

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर भाजपा कार्यालय में दी गई श्रद्धांजलि, सीएम और वरिष्ठ नेताओं ने किया नमन

भोपाल।  भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर मंगलवार को भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश पचौरी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग सहित अन्य नेताओं के साथ डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके राष्ट्रहित में किए गए योगदान को याद किया। इस दौरान पार्टी के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नेताओं ने डॉ. मुखर्जी के उस ऐतिहासिक संकल्प को याद किया, जिसमें उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने ‘एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’ का नारा देकर राष्ट्र की एकता को सर्वोपरि माना। नेताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण और देश की अखंडता के लिए संघर्ष करते हुए डॉ. मुखर्जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका जीवन राष्ट्र सेवा, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रेरणादायी उदाहरण है।

डॉ. मुखर्जी के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के साथ कार्य कर रही है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया। भाजपा नेताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी देश को राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढऩे की प्रेरणा देते हैं। उनके बलिदान दिवस पर पूरा देश ऐसे महान राष्ट्रवादी नेता को श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है।

SIR अभियान को लेकर निर्वाचन आयोग ने जारी किए नए निर्देश Election Commission of India

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जमशेदपुर। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूर्वी सिंहभूम जिले में मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिहीन बनाने के लिए एक विशेष गहन पुनरीक्षण महाअभियान का आगाज होने जा रहा है। इस संबंध में प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि क्षेत्र का कोई भी योग्य नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे।

एक महीने तक चलेगा भौतिक सत्यापन का कार्य

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त राजीव रंजन ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि आगामी 30 जून से लेकर 29 जुलाई तक सभी बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे। वे हर घर का व्यक्तिगत दौरा करेंगे और वहां रहने वाले मतदाताओं की उपस्थिति का जमीनी स्तर पर सत्यापन करेंगे। राहत की बात यह है कि इस शुरुआती चरण के दौरान आम जनता से किसी भी प्रकार के कागजात या प्रमाण पत्र की मांग नहीं की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 1 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि को मानक मानकर नए युवा मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज किए जाएंगे, जबकि पूरी तरह से संशोधित व अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन 7 अक्टूबर को किया जाएगा।

प्रवासी श्रमिकों और छात्रों के लिए ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा

प्रशासन ने इस बार यह दृढ़ संकल्प लिया है कि जिले का कोई भी पात्र नागरिक मतदाता बनने से न छूटे। रोजगार के सिलसिले में राज्य से बाहर रहने वाले मजदूरों या अन्य महानगरों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं की सहूलियत के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उनके परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक 'ईसीआइ-नेट' (ECI-NET) पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म प्राप्त कर पंजीकरण की प्रक्रिया को आसानी से पूरा करवा सकता है।

चुनिंदा मामलों में ही होगी दस्तावेजों की आवश्यकता

पुनरीक्षण के अगले चरण के तहत 5 अगस्त से 3 अक्टूबर के बीच चलने वाले जांच अभियान में केवल उन्हीं नागरिकों से दस्तावेज मांगे जाएंगे, जिन्हें विशेष परिस्थितियों में कोई नोटिस दिया गया हो। जिन लोगों के नाम वर्तमान मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज हैं, उन्हें कोई भी नया प्रमाण पत्र जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

हालांकि, यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट गया है, तो उसे अपना नाम जुड़वाने के लिए सरकारी पहचान पत्र, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र या निवास प्रमाण पत्र में से किसी भी एक वैध कागजात की स्व-हस्ताक्षरित (Self-Attested) प्रति देनी होगी। पहली बार मतदाता सूची का हिस्सा बनने वाले युवाओं को प्रपत्र-6 (Form-6) भरना अनिवार्य होगा।

डिजिटल माध्यमों से आसान हुआ पंजीकरण और समाधान

तकनीक के इस दौर में नागरिकों को सहूलियत देने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने टोल-फ्री वोटर हेल्पलाइन नंबर '1950' को पूरी तरह सक्रिय रखा है। इसके साथ ही, आम लोग ईसीआइ-नेट की वेबसाइट और आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए भी अपनी समस्याओं का निपटारा घर बैठे कर सकते हैं।

इस देशव्यापी पुनरीक्षण अभियान की जमीनी शुरुआत 30 जून को सुबह 11 बजे सभी मतदान केंद्रों पर बीएलओ की पहली बैठक के साथ होगी। इसके अतिरिक्त, युवा वर्ग को जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के तत्वावधान में विशेष गोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में नया ट्विस्ट, पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ मुकदमा

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भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में कानून का एक बहुत बड़ा डंडा चला है। इस कथित पुलिस मुठभेड़ को लेकर मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी द्वारा दिए गए शिकायती आवेदन के आधार पर पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ शाहपुर थाने में एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कर ली गई है। भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने मंगलवार (23 जून, 2026) को इस बड़ी कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि की है।

घटना के बाद पीड़ित परिवार द्वारा शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दिया गया था। इसी आवेदन पर संज्ञान लेते हुए विभाग ने जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), शाहपुर थाना अध्यक्ष और उनके सहयोगी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

पांच पुलिसकर्मी पहले ही हो चुके हैं सस्पेंड

इस संवेदनशील मामले में विभागीय जांच के बाद पहले ही पांच पुलिसकर्मियों को सेवा से निलंबित (सस्पेंड) किया जा चुका है। सस्पेंड होने वाले पुलिसकर्मियों की सूची इस प्रकार है:

  1. राजेश कुमार मालाकार (तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष)

  2. अंकित आर्यन (पुलिस अवर निरीक्षक – एसआई)

  3. हरिश्चंद्र कुमार (पुलिस अवर निरीक्षक – एसआई)

  4. रामाशंकर यादव (सहायक अवर निरीक्षक – एएसआई)

  5. मीरा कुमारी (महिला सिपाही)

मां का गंभीर आरोप: 'फेसबुक लाइव पर हथियार फेंकने के बाद भी मार दी 5 गोलियां'

मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सौंपे गए अपने शिकायती पत्र में बेहद चौंकाने वाले और गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • प्रशासन से संघर्ष: आवेदन के मुताबिक, भरत भूषण तिवारी इलाके के बाढ़ विस्थापितों और पीड़ितों की समस्याओं व हक की लड़ाई को लेकर स्थानीय प्रशासन के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रहा था, जिससे पुलिस उससे नाराज थी।

  • घर से ले गई पुलिस: घटना वाले दिन कई पुलिस अधिकारी और भारी संख्या में जवान उनके घर पहुंचे और भरत तिवारी को जांच के बहाने अपने साथ चलने को कहा।

  • फेसबुक लाइव और सरेंडर: मां का दावा है कि जब पुलिस ने उसे घेरा, तो भरत तिवारी ने बकायदा फेसबुक लाइव (Facebook Live) शुरू किया। लाइव वीडियो के दौरान ही उसने अपने हाथ में मौजूद हथियार को दूर फेंक दिया और पूरी तरह से खुद को पुलिस के हवाले (सरेंडर) कर दिया था।

  • जमीन पर गिराकर मारी गोली: आरोप है कि निहत्था होने और आत्मसमर्पण करने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे बेरहमी से पकड़कर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद जगदीशपुर पुलिस उपाधीक्षक (एसडीपीओ) के सीधे आदेश पर उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। पोस्टमार्टम और आवेदन के अनुसार, भरत तिवारी को बेहद करीब से 5 गोलियां मारी गईं।

परिजनों को घंटों रखा अंधेरे में; अब शुरू हुई निष्पक्ष जांच

आशा देवी ने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह भी आरोप लगाया कि कत्ल की इस वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस उन्हें और परिवार के अन्य सदस्यों को अपने साथ ले गई। कई घंटों तक परिजनों को बंधक जैसी स्थिति में रखा गया और एनकाउंटर या भरत की स्थिति के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद देर शाम को उन्हें अचानक सूचना दी गई कि भरत तिवारी की मौत हो चुकी है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सीधे आला अधिकारियों और पुलिस दल पर ही एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे महकमे में खलबली मची हुई है। मानवाधिकार आयोग के कड़े नियमों के तहत अब इस पूरे एनकाउंटर की कड़ियों, फेसबुक लाइव के फुटेज और फॉरेंसिक साक्ष्यों की स्वतंत्र जांच की जा रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद गहराया

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बाड़मेर। राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ अब महज एक प्रशासनिक अभियान नहीं रह गया है। सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की इस मुहिम ने अब सूबे में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा पुख्ता करने और अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए चलाए जा रहे इस बुलडोजर अभियान को प्रशासन राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहा है, जबकि विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों ने इस कार्रवाई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सीमाई जिलों में व्यापक स्तर पर बुलडोजर अभियान

भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और फलौदी जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में प्रशासन बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों को चिन्हित कर उन्हें हटाने में जुटा है। इस विशेष अभियान के तहत रामसर, गडरारोड, मालाणा, नाचना और नोख समेत दर्जनों गांवों में सरकारी जमीनों पर बने अवैध ढांचों और कुछ धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह पूरी कार्रवाई राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही की जा रही है, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

स्थानीय स्तर पर विरोध और भेदभाव के आरोप

दूसरी तरफ, सीमा क्षेत्र के कई गांवों के बाशिंदों ने इस कार्रवाई को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। केलन का पार गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पुरानी एक मस्जिद को अचानक नोटिस थमाकर जमींदोज कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन एक विशेष वर्ग से जुड़े स्थलों को निशाना बना रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि यह अभियान वास्तव में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए है, तो बिना किसी भेदभाव के सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से बुलडोजर चलना चाहिए।

ओवैसी और गहलोत ने उठाए कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर अब राष्ट्रीय और राज्य स्तर के राजनेताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों में चुनिंदा धार्मिक स्थलों को ढहाया जा रहा है, और इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

वहीं, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि धार्मिक व संवेदनशील स्थलों पर इस तरह की त्वरित कार्रवाई से आपसी सौहार्द बिगड़ सकता है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि ऐसे मामलों में बल प्रयोग के बजाय स्थानीय संवाद का रास्ता चुना जाना चाहिए। नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई में किसी भी प्रकार के पक्षपात की बू नहीं आनी चाहिए।

जनप्रतिनिधियों का सीमावर्ती गांवों का दौरा

कार्रवाई से प्रभावित भलगांव और दहेवा जैसे सुदूर क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने के लिए बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और बायतु के विधायक हरीश चौधरी जमीनी स्तर पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सांसद बेनीवाल ने जनता से शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि थार का यह मरुस्थलीय इलाका हमेशा से आपसी भाईचारे की मिसाल रहा है और किसी भी विवाद का निपटारा कानून के दायरे में रहकर बातचीत से ही होना चाहिए। विधायक हरीश चौधरी ने भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को उचित मंच पर उठाएंगे ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।

सत्तारूढ़ दल का पलटवार: सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं

विपक्ष के इन तीखे हमलों पर पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक एजेंसियां केवल अपने तय कर्तव्यों का पालन कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक किसी भी तरह का अवैध कब्जा या संदिग्ध गतिविधि देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। चौधरी ने जोर देकर कहा कि यह अभियान किसी जाति, धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने और सरकारी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने का एक वैध प्रयास है, जो आगे भी बिना किसी दबाव के जारी रहेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे के बाद बढ़ी सक्रियता

गौरतलब है कि यह प्रशासनिक तेजी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया राजस्थान सीमाई दौर के बाद देखने को मिली है, जहां उन्होंने उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की थी। केंद्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा के बेहद नजदीक बने अनधिकृत ढांचे भविष्य में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। विपक्ष के कड़े रुख और स्थानीय संगठनों के विरोध के बीच, ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ अब महज एक जमीन खाली कराने की कार्रवाई न रहकर सुरक्षा, सियासत और सामाजिक संतुलन के एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है।

चलते हाईवे पर आग का गोला बनी बस, मची अफरा-तफरी

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अजमेर। अजमेर-किशनगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब राजस्थान रोडवेज की एक चलती बस में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरी बस लपटों से घिर गई। गनीमत यह रही कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने सूझबूझ दिखाई और समय रहते बस में सवार सभी 35 मुसाफिरों को सुरक्षित नीचे उतार लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

ड्राइवर-कंडक्टर की सूझबूझ से टला हादसा

चश्मदीदों के मुताबिक, बस हाईवे पर सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, तभी अचानक उसके इंजन से धुआं निकलने लगा। खतरे को भांपते हुए चालक ने बिना देर किए बस को हाईवे के किनारे रोक दिया। इसके तुरंत बाद चालक और परिचालक ने मिलकर तत्परता दिखाई और सभी यात्रियों को फौरन बस से बाहर निकालना शुरू किया। यात्रियों के उतरते ही कुछ ही पलों में आग पूरी बस में फैल गई।

शॉर्ट सर्किट हो सकता है कारण

हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। दमकलकर्मियों ने काफी प्रयासों के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी और सिर्फ उसका लोहे का ढांचा ही बचा। शुरुआती तफ्तीश में कयास लगाए जा रहे हैं कि आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है।

यात्रियों ने जताया आभार, यातायात हुआ सामान्य

इस घटना की वजह से हाईवे पर कुछ देर के लिए वाहनों की रफ्तार थम गई और जाम की स्थिति बन गई, जिसे पुलिस ने बाद में खुलवाकर यातायात को सुचारू रूप से चालू करवाया। सुरक्षित बचे यात्रियों ने बस स्टाफ की जमकर तारीफ की और कहा कि अगर ड्राइवर-कंडक्टर थोड़ी भी लापरवाही बरतते, तो कई जिंदगियां खतरे में पड़ सकती थीं। राहत की बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में कोई भी हताहत नहीं हुआ है।

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी Rahul Gandhi

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जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में आज भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। हाईकोर्ट ने इस जवाब को रिकॉर्ड पर ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मांगी गई अंतरिम राहत पर अब अगली सुनवाई 24 जून को तय की गई है। इस सुनवाई में यह साफ हो जाएगा कि राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मिलेगी या उन्हें अदालत के सामने हाजिर होना पड़ेगा।

समन को दी गई है चुनौती

दरअसल, राहुल गांधी ने भोपाल की विशेष अदालत द्वारा जारी किए गए समन के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दर्ज कराए गए मानहानि के मामले में भोपाल कोर्ट ने यह समन जारी किया था। राहुल गांधी की याचिका में तर्क दिया गया है कि समन जारी करने की पूरी प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने अदालत से इस समन को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला साल 2018 का है, जब झाबुआ में एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक मामले का उल्लेख किया था। कार्तिकेय सिंह चौहान का आरोप है कि राहुल गांधी ने उस भाषण में उनका और उनके पिता शिवराज सिंह चौहान का नाम घसीटा, जिससे उनकी सामाजिक छवि को गहरा धक्का लगा। इसी वजह से उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

राहुल गांधी की ओर से दी गई थी सफाई

इस विवाद पर अगले ही दिन राहुल गांधी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि वे मंच से छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे का नाम लेना चाहते थे, लेकिन मानवीय भूल (गलती) के कारण उनके मुंह से कार्तिकेय चौहान का नाम निकल गया था।

नोट: इस ड्राफ्ट में से आपकी आवश्यकता के अनुसार 'अभी तक न्यूज' या किसी भी अन्य न्यूज चैनल का नाम पूरी तरह हटा दिया गया है।

कूटनीति के चौराहे पर ट्रंप, ईरान और इजरायल के बीच संतुलन की चुनौती

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वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही गुप्त कूटनीतिक बातचीत ने पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के सुरक्षा समीकरणों को एक नया और बेहद अप्रत्याशित मोड़ दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी शीर्ष अधिकारियों के बीच परवान चढ़ रही इस नई सहमति को लेकर इजरायल के भीतर गहरी चिंता और भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इजरायल को यह डर सता रहा है कि इस गुप्त समझौते से न सिर्फ लेबनान में ईरान का राजनीतिक और सैन्य दबदबा और ज्यादा मजबूत हो जाएगा, बल्कि कट्टर दुश्मन हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की आक्रामक सैन्य क्षमता भी बेहद कमजोर पड़ जाएगी।

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड के जिनेवा में कई दौर की अत्यंत गुप्त वार्ता संपन्न हुई है। इस गोपनीय बैठक के बाद दोनों देशों ने एक रणनीतिक 'सहमति पत्र' (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में चल रहे विनाशकारी युद्ध और सैन्य तनाव को तुरंत रोकना है।

समझौते से बेंजामिन नेतन्याहू आखिर क्यों हैं परेशान?

ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे इस सीधे समझौते ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (जिन्हें राजनीतिक हलकों में 'बीबी' भी कहा जाता है) की रातों की नींद उड़ा दी है। तेल अवीव (इजरायल) के एक उच्च पदस्थ रणनीतिक सूत्र ने साफ शब्दों में कहा कि, "प्रधानमंत्री नेतन्याहू वाशिंगटन के इस बदले रुख से बेहद घबराए हुए और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।" इस समझौते से इजरायल की चिंता के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

  • हिजबुल्लाह को मिला सुरक्षा कवच: इजरायल का पुख्ता मानना है कि ईरान ने अमेरिका के साथ सौदेबाजी में लेबनान के मुद्दे को चालाकी से शामिल कर लिया है। ऐसा करके ईरान ने अपने सबसे बड़े और घातक छद्म संगठन (प्रॉक्सी वॉर ग्रुप) 'हिजबुल्लाह' को इजरायली हमलों से एक तरह का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा कवच दिला दिया है।

  • सैन्य कार्रवाई की आजादी पर पाबंदी: अब तक इजरायल अपनी खुफिया जानकारी के आधार पर जब चाहता, तब लेबनान में घुसकर हिजबुल्लाह के ठिकानों और हथियारों के जखीरे पर एयरस्ट्राइक (हवाई हमले) कर देता था। लेकिन इस नए समझौते के बाद, इजरायल को लेबनान में कोई भी सैन्य कदम उठाने से पहले वाशिंगटन (व्हाइट हाउस) के कड़े सवालों, जांच और जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा।

  • सेना वापसी का दबाव: तीसरा और सबसे तात्कालिक डर यह है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल पर यह कड़ा दबाव बना सकते हैं कि वह दक्षिणी लेबनान की सीमा से अपनी जमीनी सेना (IDF) को तुरंत पीछे बुलाए, जबकि इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह का खतरा अभी सीमा पर टला नहीं है।

जो बाइडेन के पुराने समझौते और ट्रंप के नए मैकेनिज्म में जमीन-आसमान का अंतर

इजरायली रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बन रहा यह नया ढांचा नवंबर 2024 में जो बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल के दौरान हुए युद्धविराम समझौतों को पूरी तरह से कमजोर और बेअसर करता है। दोनों समझौतों की रूपरेखा में यह बड़ा अंतर है:

तुलनात्मक बिंदुपुराना मैकेनिज्म (नवंबर 2024 – बाइडेन)नया मैकेनिज्म (2026 – ट्रंप प्रशासन)
मुख्य वार्ताकार और भागीदारइजरायल, लेबनान, अमेरिका और फ्रांस सीधे मेज पर थे।केवल अमेरिका और ईरान ही मुख्य भूमिका में हैं (इजरायल बाहर)।
रणनीतिक फोकसदक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह के सैन्य ढांचे को उखाड़ना।हिजबुल्लाह को खत्म करने के बजाय केवल आपसी झड़पें रोकना।
ऑपरेशनल फ्रीडम (हमले की आजादी)संभावित खतरे की भनक लगते ही तुरंत हमले की छूट थी।अत्यधिक सीमित। केवल तब कार्रवाई जब हमला सिर पर आ चुका हो।

पाकिस्तान और कतर बने मध्यस्थ; पश्चिम एशिया में नया सुरक्षा संतुलन

सीमा पर जारी तनाव को कम करने और युद्धविराम को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए एक नए 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' का गठन किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सेल में लेबनान के साथ-साथ मुख्य मध्यस्थ और शांति तंत्र की निगरानी के रूप में पाकिस्तान और कतर को शामिल किया गया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन दो मुस्लिम देशों की एंट्री से पश्चिम एशिया में सुरक्षा का संतुलन इजरायल के खिलाफ और ईरान के पक्ष में झुक सकता है।

अक्टूबर में होने वाले चुनाव और नेतन्याहू की लॉबिंग

इस पूरे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में इजरायल की घरेलू राजनीति भी एक बड़ा फैक्टर बनी हुई है, क्योंकि इजरायल में आगामी अक्टूबर महीने में आम चुनाव होने वाले हैं। ऐसे नाजुक समय में हिजबुल्लाह के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई या कमजोरी बेंजामिन नेतन्याहू की राष्ट्रवादी नेता वाली छवि को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अपनी साख बचाने के लिए नेतन्याहू ने अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रॉन डर्मर को ट्रंप के करीबियों को प्रभावित करने और लॉबिंग के काम पर लगाया था। इसी बैकचैनल लॉबिंग के बाद ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए एक सख्त पोस्ट लिखा था, ताकि इजरायल के गुस्से को शांत किया जा सके।

लेबनान में खुशी की लहर, ट्रंप बोले— "मैं प्रॉब्लम सॉल्वर हूं"

दूसरी तरफ, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन इस नए अमेरिकी-ईरानी सिस्टम से बेहद खुश और संतुष्ट नजर आ रहे हैं। खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने फोन पर उन्हें इस पूरे शांति प्लान की विस्तृत जानकारी दी है।

जब वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से इजरायल की इस गहरी चिंता और नाराजगी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपने चिरपरिचित कारोबारी अंदाज में कहा, "मैं एक 'प्रॉblem सॉल्वर' (समस्याएं सुलझाने वाला) हूं। मैं बहुत तेजी से और कुशलता के साथ बड़ी से बड़ी वैश्विक समस्याओं को हल कर लेता हूं, और बीबी (नेतन्याहू) के साथ भी इस मसले को बहुत जल्द सुलझा लूंगा।"

हालांकि, इस नीति का विरोध खुद अमेरिका के भीतर भी शुरू हो गया है। नेतन्याहू के सबसे पक्के समर्थक माने जाने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा, "लेबनान के लिए बनाया जा रहा यह नया सिस्टम जिसमें मुख्य हितधारक इजरायल ही शामिल नहीं है, मेरी नजर में एक बहुत बड़ी रणनीतिक भूल है।"

फिलहाल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की देखरेख में इजरायल और लेबनान के बीच अलग से एक औपचारिक बातचीत की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना सुरक्षित हट सके। लेकिन अमेरिका-ईरान की इस नई गुप्त समझ ने हिजबुल्लाह को जो संजीवनी दी है, उसने इजरायल के पूरे रक्षा तंत्र में हड़कंप मचा रखा है।

दूसरे युवक के साथ देख पत्नी पर भड़का पति, सड़क पर हुआ हंगामा

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जबलपुर। महानगर के गोराबाजार अंतर्गत बिलहरी इलाके में उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब एक शख्स ने बीच सड़क पर अपनी ही पत्नी के बाल पकड़कर उसे बेरहमी से घसीटना और पीटना शुरू कर दिया। इस खौफनाक मंजर को देखकर मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई और काफी देर तक सड़क पर तमाशा चलता रहा।

ऑटो रुकवाकर किया हमला, बचाने आए युवक से भी उलझा

मिली जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 2:00 बजे एक व्यक्ति ऑटो का पीछा करते हुए बिलहरी चौराहे के पास पहुंचा। वहां उसने ऑटो को जबरन रुकवाया और उसमें बैठी महिला को नीचे उतारकर गाली-गलौज करने लगा। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि उसने महिला की सरेआम पिटाई शुरू कर दी। स्थानीय लोगों ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपी महिला को बचाने आए एक अन्य युवक से भी भिड़ गया। करीब आधे घंटे तक मौके पर अराजकता का माहौल बना रहा। इसी बीच किसी राहगीर ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

पत्नी को दूसरे युवक के साथ देखकर भड़का था पति

स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं के अनुसार, महिला किसी अन्य युवक के साथ ऑटो में जा रही थी। इस बात की भनक लगते ही पति ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया था। बिलहरी के पास जब उसने ऑटो रुकवाकर अपनी पत्नी को किसी और के साथ देखा, तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उसने सरेराह मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान तमाशबीन बने लोग बीच-बचाव करने के बजाय अपने मोबाइल से वीडियो बनाते रहे।

बिना शिकायत दर्ज किए मौके से गायब हुए दोनों पक्ष

घटना की जानकारी मिलते ही गोराबाजार थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही पति-पत्नी और वहां मौजूद अन्य लोग जा चुके थे। पुलिस प्रशासन का कहना है कि अब तक किसी भी पक्ष की तरफ से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। अगर इस मामले में कोई भी शिकायत मिलती है, तो कानून के मुताबिक उचित कार्रवाई की जाएगी।

बिकवाली के दबाव में धड़ाम हुआ बाजार, निवेशकों में घबराहट

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सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए दिन बेहद निराशाजनक रहा। शुरुआती कारोबार में स्थिरता दिखने के बाद बाजार में अचानक बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। इस चौतरफा गिरावट के कारण सेंसेक्स करीब 900 अंक टूट गया, वहीं निफ्टी ने भी 23,900 का अपना अहम स्तर खो दिया। बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) और सरकारी बैंकों के शेयरों में आई भारी गिरावट से हुआ।

बाजार बंद होने तक सूचकांकों का हाल

मंगलवार को बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 893.39 अंक (1.15%) की भारी गिरावट के साथ 76,200.68 के स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, निफ्टी भी 278.81 अंक (1.16%) फिसलकर 23,824.10 पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट की वजह से महज एक ही दिन में निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बाजार के जानकारों ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए ट्रेडर्स को फूंक-फूंक कर कदम रखने की सलाह दी है।

आखिर क्यों डूबा बाजार? गिरावट की मुख्य वजहें

बाजार में आए इस बड़े उछाल-पुथल के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण रहे:

  • आईटी सेक्टर पर मार: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स 2% से अधिक टूट गया।

  • वैश्विक बाजारों का दबाव: अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर और नकारात्मक संकेतों ने घरेलू निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ा।

  • मुनाफावसूली की होड़: ऊंचे स्तरों पर घरेलू निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) की, जिससे बाजार संभल नहीं पाया।

  • बैंकिंग और मेटल में कमजोरी: सरकारी बैंकों और धातु (Metal) क्षेत्र के शेयरों में भी तेज बिकवाली दर्ज की गई, जिसने गिरावट की आग में घी का काम किया।

विपरीत परिस्थितियों में भी चमके ये सेक्टर्स

बाजार में मचे इस हाहाकार के बीच भी कुछ क्षेत्रों में हरियाली देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए डिफेंसिव सेक्टर्स का रुख किया:

  • फार्मा और हेल्थकेयर: फार्मा और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

  • स्मॉलकैप और मिडकैप: बड़े शेयरों में गिरावट के बावजूद मझोली और छोटी कंपनियों के सूचकांकों ने बाजार के विपरीत जाकर मजबूती दिखाई।

महिला खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, मां बनने के बाद करियर को मिलेगा संरक्षण

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने महिला क्रिकेटरों के करियर को एक नया जीवन और सुरक्षा देने के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम उठाया है। क्रिकेट इतिहास में पहली बार आईसीसी ने महिला खिलाड़ियों के लिए 'पोस्ट-प्रेग्नेंसी रिटर्न टू प्ले' (गर्भावस्था के बाद खेल में दोबारा वापसी) से जुड़ी आधिकारिक गाइडलाइंस (दिशानिर्देश) जारी की हैं।

भले ही यह नई नीति अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) और फीफा (FIFA) के मौजूदा नियमों व परामर्शों से प्रेरित है, लेकिन महिला क्रिकेटरों के खेल, उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति और व्यावहारिक (लॉजिस्टिक) जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे पूरी तरह से क्रिकेट के अनुकूल ढाला गया है। इस बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज को तैयार करने वाली आईसीसी की चिकित्सा सलाहकार समिति की प्रमुख सदस्य डॉ. फिलिपा इंगे ने इस नीति को महिला क्रिकेट के लिए मील का पत्थर बताया है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम की डॉक्टर ने तैयार किया रोडमैप

इस संवेदनशील और जरूरी पॉलिसी को बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाली डॉ. फिलिपा इंगे ऑस्ट्रेलिया (मेलबर्न) की एक बेहद प्रतिष्ठित स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज मेडिसिन फिजिशियन हैं। वे वर्तमान में ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम की मुख्य डॉक्टर के रूप में इंग्लैंड में चल रहे टी20 विश्व कप के दौरान टीम के साथ ही मौजूद हैं।

क्या है '6-R' का अनूठा फ्रेमवर्क?

महिला खिलाड़ियों की सुरक्षित और चरणबद्ध वापसी के लिए इस नई खेल नीति के तहत छह 'R' (6-R) का एक विशेष वैज्ञानिक ढांचा तैयार किया गया है। यह फ्रेमवर्क इस प्रकार है:

  1. रेडी (Ready): गर्भधारण और डिलीवरी के बाद खिलाड़ी के शरीर को खेल के लिए तैयार करना।

  2. रिव्यू (Review): मेडिकल टीम द्वारा खिलाड़ी की शारीरिक क्षमताओं की समय-समय पर समीक्षा करना।

  3. रिस्टोर (Restore): पुरानी फिटनेस, ताकत और स्टेमिना को प्राकृतिक रूप से वापस पाना।

  4. रीकंडीशन (Recondition): क्रिकेट के अनुकूल मसल्स और शरीर को ढालना।

  5. रिटर्न (Return): मैदान पर नेट प्रैक्टिस और अभ्यास मैचों के जरिए वापसी करना।

  6. रिफाइन (Refine): खेल की पुरानी लय और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दोबारा हासिल करना।

डॉ. इंगे ने साझा किया कि दुनिया भर के कई क्रिकेट बोर्ड्स के विशेष आग्रह पर पिछले एक साल से इस नीति पर गहन शोध और विचार-विमर्श चल रहा था, जिसके बाद सभी सदस्य देशों के मेडिकल विभागों से मिले सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया गया है। यह नीति इतनी लचीली है कि हर देश इसे अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू कर सकता है।

शारीरिक से ज्यादा व्यावहारिक और मानसिक चुनौतियां थीं बड़ी रुकावट

डॉ. इंगे के मुताबिक, रिसर्च के दौरान यह बात सामने आई कि मां बनने के बाद एक महिला खिलाड़ी के लिए शारीरिक रूप से फिट होने से कहीं ज्यादा व्यावहारिक (लॉजिस्टिक्स) और मानसिक मोर्चे पर तालमेल बिठाना सबसे कठिन होता है। जब उन्होंने दुनिया भर की महिला क्रिकेटरों से संवाद किया, तो उनके सामने कई व्यावहारिक सवाल आए:

  • मैदान पर या मैच के दौरान शिशु को स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कैसे कराया जाएगा?

  • मां बनने के बाद शरीर की ऊर्जा और पोषण को बनाए रखने के लिए कैसा विशेष आहार होना चाहिए?

  • दौरों (इंटरनेशनल ट्रेवल) और होटलों में रुकने के दौरान बच्चे की देखरेख की क्या व्यवस्थाएं होंगी?

  • सबसे बड़ी दुविधा यह थी कि खिलाड़ी इस संवेदनशील विषय पर अपने संबंधित क्रिकेट बोर्ड से बातचीत शुरू करने में झिझकती थीं।

इसके अलावा, लंबे ब्रेक के बाद मैदान पर उतरने पर फॉर्म खोने और दोबारा खुद को साबित करने का एक भारी मनोवैज्ञानिक दबाव भी खिलाड़ियों पर रहता है। डॉ. इंगे ने उम्मीद जताई कि यदि सभी क्रिकेट बोर्ड अपने सपोर्ट स्टाफ में खेल मनोवैज्ञानिकों (स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट) को अनिवार्य रूप से शामिल करेंगे, तो खिलाड़ी इस तनाव से आसानी से बाहर आ सकेंगी।

आगामी 10 वर्षों में दिखेगा असर; कम होगा खिलाड़ियों का 'ड्रॉपआउट रेट'

क्रिकेट इतिहास में पाकिस्तान की पूर्व कप्तान बिस्माह मारूफ जैसी कई बेहतरीन खिलाड़ियों ने मां बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की पुरजोर कोशिश की, लेकिन पुख्ता नियमों और व्यावहारिक सहयोग के अभाव में आखिरकार उन्हें असमय क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा। वहीं, दूसरी ओर वेस्टइंडीज की स्टार खिलाड़ी एफी फ्लेचर मां बनने के बाद भी आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।

डॉ. इंगे को पूरा भरोसा है कि आगामी 8 से 10 वर्षों में इस नई आईसीसी गाइडलाइंस का बेहद सकारात्मक और व्यापक असर देखने को मिलेगा। शादी या मातृत्व (मां बनने) के कारण महिला खिलाड़ियों का खेल छोड़ने का ग्राफ (ड्रॉपआउट रेट) अब काफी तेजी से नीचे गिरेगा। यह नीति युवा लड़कियों को यह भरोसा देगी कि एक सफल क्रिकेट करियर और एक खुशहाल परिवार, दोनों को एक साथ पूरी गरिमा के साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

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