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स्टार्मर ने दिया इस्तीफा, कहा- पार्टी को नहीं है जीत की उम्मीद

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लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को अपने पद और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर देश को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर अब यह माना जा रहा है कि वे आगामी चुनावों में नेतृत्व के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों से लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा था, जिसके बाद बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।

पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष और गिरती लोकप्रियता

कीर स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब लेबर पार्टी के कई सांसदों और मंत्रियों ने उनकी कार्यशैली पर खुलेआम सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन और जनता के बीच लगातार गिरती लोकप्रियता ने उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव बना दिया था। कई नीतिगत बदलावों (यू-टर्न) और आम जनता के जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा न कर पाने के कारण उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचा था, जिससे पार्टी के भीतर उनके विरोधी मुखर हो गए।

उपचुनाव में प्रतिद्वंद्वी की जीत और उत्तराधिकारी की रेस

स्टार्मर के लिए मुश्किलें तब और गंभीर हो गईं जब उनके मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत हासिल कर संसद में वापसी की। इस बड़ी जीत के बाद बर्नहैम के समर्थकों ने स्टार्मर से तुरंत पद छोड़ने की मांग तेज कर दी। हालांकि स्टार्मर ने शुरुआत में किसी भी चुनौती का सामना करने की बात कही थी, लेकिन राजनीतिक वास्तविकताओं को देखते हुए आखिरकार उन्होंने पीछे हटने का फैसला किया। वर्तमान में एंडी बर्नहैम देश के अगले प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नए नेता बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।

ब्रिटेन की राजनीति में बढ़ता अस्थिरता का दौर

कीर स्टार्मर के इस फैसले के साथ ही ब्रिटेन की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का एक अभूतपूर्व दौर देखने को मिल रहा है, जिसके तहत देश को पिछले सात वर्षों में छठा प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। पिछले एक दशक में डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक जैसे कद्दावर नेता भी ब्रेक्जिट विवाद, आर्थिक मंदी, आंतरिक कलह और महामारी के दौर में अपनी नीतियां सफल न होने के कारण अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। स्टार्मर का जाना इसी राजनीतिक अस्थिरता की एक नई कड़ी माना जा रहा है।

Bharatiya Janata Party का बूथ गौरव अभियान, 23 जून से 6 जुलाई तक चलेगा कार्यक्रम

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भोपाल: भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की ऐतिहासिक समाप्ति और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रव्यापी महाअभियान चलाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार, देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी 23 जून से 6 जुलाई तक ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पखवाड़ा’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस व्यापक अभियान के सुचारू संचालन और जमीनी स्तर पर इसकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय केंद्रीय संचालन टोली का गठन किया गया है, जिसमें मध्य प्रदेश के भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जो राज्य के सभी बूथ स्तरीय कार्यक्रमों की सीधे मॉनिटरिंग करेंगे।

 

बूथ स्तर पर वैचारिक व्याख्यान और गौरव दिवस का आयोजन

इस अभियान के तहत मध्य प्रदेश के सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर ‘बूथ गौरव दिवस’ मनाया जाएगा, जिसके अंतर्गत विशेष वैचारिक व्याख्यानों का आयोजन होगा। इसके साथ ही, प्रत्येक नगर और शहर के किसी प्रमुख चौराहे, उद्यान अथवा मार्ग का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने का निर्णय लिया गया है, जहां उनकी प्रतिमा या चित्र का अनावरण भी किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं और आम जनता को डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान और उनकी कश्मीर नीति से गहराई से अवगत कराना है, जिसमें जनसंपर्क और संगठनात्मक मजबूती पर विशेष जोर रहेगा।

जिला स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन और धारा 370 पर बौद्धिक सत्र

पखवाड़े के दौरान मंडल और जिला स्तर पर विशेष बौद्धिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति के ऐतिहासिक सफर पर प्रकाश डाला जाएगा। इसके अलावा, प्रदेश के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में डॉ. मुखर्जी के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान, एक केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी दूरदर्शी कार्यशैली और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उनके ऐतिहासिक सफर पर केंद्रित विशेष व्याख्यान दिए जाएंगे, ताकि पार्टी की मूल विचारधारा को पुनर्जीवित किया जा सके।

शैक्षणिक परिसरों के बाहर छात्र सम्मेलन और सुदृढ़ संगठनात्मक ढांचा

नई पीढ़ी और युवाओं को भाजपा की राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के बाहर विशेष छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। केंद्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, ये कार्यक्रम पूरी तरह से शैक्षणिक परिसरों के बाहर आयोजित होंगे। इस पूरे अभियान को व्यवस्थित ढंग से क्रियान्वित करने के लिए एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार किया गया है, जिसके तहत प्रदेश स्तर पर एक वरिष्ठ कार्यकर्ता की कमान में 5 सदस्यीय टोली, प्रत्येक जिले में 4 सदस्यीय टोली और मंडल स्तर पर 3 सदस्यीय टोली काम करेगी। अभियान की सफलता के लिए प्रदेश और जिला स्तर पर वर्चुअल व फिजिकल बैठकें आयोजित कर सभी पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

ईंधन की कीमतों पर बड़ी अपडेट, पेट्रोलियम मंत्री के बयान के बीच जानें आज के दाम

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नई दिल्ली। देश के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने यह संकेत दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से रियायती दरों पर खरीदे गए कच्चे तेल की आपूर्ति शुरू होते ही आम जनता को पेट्रोल और डीजल की महंगाई से राहत मिल सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में अभी कुछ समय लगने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में तेल विपणन कंपनियों के पास ऊंचे दामों पर आयात किए गए क्रूड ऑयल का पुराना स्टॉक मौजूद है। जैसे ही यह स्टॉक समाप्त होगा और कम लागत वाला नया कच्चा तेल रिफाइनरियों तक पहुंचेगा, वैसे ही खुदरा कीमतों में कटौती की राह साफ हो जाएगी। वैश्विक स्तर पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण खड़े हुए ऊर्जा संकट के बावजूद, भारत में ईंधन की दरें दुनिया के अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी हद तक नियंत्रित और स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने नवंबर 2021, मई 2022 और फिर 2026 में उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को घटाया है, जिसके चलते सरकार ने प्रति लीटर करीब 10 रुपये के वित्तीय घाटे का बोझ खुद वहन किया है। इसी का परिणाम है कि देश में ईंधन की कीमतों में वृद्धि केवल 7.60 रुपये प्रति लीटर तक ही सीमित रह सकी।

प्रमुख महानगरों और राज्यों में ईंधन के मौजूदा दाम

देश के विभिन्न हिस्सों में टैक्स और स्थानीय वैट (VAT) की दरों में अंतर होने के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें अलग-अलग हैं। वर्तमान में देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में तेल की खुदरा दरें इस प्रकार दर्ज की गई हैं: दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.18 रुपये तथा डीजल की कीमत 97.83 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में उपभोक्ताओं को पेट्रोल 113.47 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये एवं डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 110.93 रुपये और डीजल का भाव 98.80 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है। हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये तथा डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर की दर पर बिक रहा है। अगरतला में पेट्रोल की कीमत 105.17 रुपये और डीजल की कीमत 94.05 रुपये प्रति लीटर है। गुवाहाटी में पेट्रोल 105.85 रुपये और डीजल 97.33 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। पटना में पेट्रोल का दाम 113.35 रुपये और डीजल का दाम 99.36 रुपये प्रति लीटर है।

वैश्विक बाजार और स्थानीय करों से तय होती है तेल की कीमत

भारत में घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है। इसके अलावा इसमें बेस प्राइस, टैक्स संरचना और डीलरों का लाभांश भी शामिल होता है। तेल कंपनियां वैश्विक क्रूड ऑयल की खरीद लागत में रिफाइनिंग का खर्च, माल ढुलाई का भाड़ा और अपना लाभांश जोड़कर ईंधन का एक आधार मूल्य (बेस प्राइस) निर्धारित करती हैं। इसके बाद इस आधार मूल्य पर केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क और राज्य सरकारों द्वारा अपने-अपने नियमों के अनुसार मूल्य वर्धित कर (VAT) वसूला जाता है, जो मिलकर अंतिम खुदरा मूल्य का लगभग 50 से 55 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

डीलर कमीशन और अंतिम खुदरा मूल्य का निर्धारण

पंपों तक ईंधन पहुंचने के बाद इसमें पेट्रोल पंप संचालकों के खर्च और मुनाफे को ध्यान में रखते हुए प्रति लीटर के हिसाब से एक तय डीलर कमीशन जोड़ा जाता है। इन सभी घटकों यानी बेस प्राइस, केंद्रीय कर, राजकीय कर और डीलर कमीशन को आपस में जोड़ने के बाद ही वह अंतिम खुदरा भाव (रिटेल प्राइस) तैयार होता है, जिस पर आम उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से तेल खरीदते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में मामूली बदलाव होने या किसी राज्य द्वारा वैट की दरों में फेरबदल करने पर उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ता है।

दिल्ली-यूपी से साउथ तक बुलेट ट्रेन का जाल, घंटों का सफर मिनटों में

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नई दिल्ली: भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। देश को अगले साल (2027) के मध्य तक अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी, जो मुंबई और अहमदाबाद के बीच दौड़ेगी। इस बीच, केंद्र सरकार ने देश में सात नए बुलेट ट्रेन हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को भी मंजूरी दे दी है। इन नए रूट्स के शुरू होने से कई प्रमुख शहरों के बीच का सफर घंटों के बजाय मिनटों में तय होने लगेगा। रेल मंत्रालय के मुताबिक, इन सभी कॉरिडोर पर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर और उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित स्टेशन्स

नए स्वीकृत कॉरिडोर में दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बेहद अहम है। इस रूट के बनने से दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे और दिल्ली से वाराणसी का सफर सिर्फ 3 घंटे 15 मिनट में पूरा हो सकेगा। रेल मंत्री के अनुसार, इस कॉरिडोर का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के कई प्रमुख शहरों में स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इनमें दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज और वाराणसी शामिल हैं। हालांकि, स्टेशनों की अंतिम सूची पर आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा।

देश के अन्य प्रमुख रूट्स पर सफर का समय

सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में यात्रा के समय में भारी कटौती होगी। विभिन्न शहरों के बीच का सफर इस प्रकार सिमट जाएगा:

  • मुंबई से अहमदाबाद: 1 घंटे 57 मिनट

  • बेंगलुरु से चेन्नई: 73 मिनट (1 घंटा 13 मिनट)

  • पुणे से हैदराबाद: 2 घंटे 8 मिनट

  • बेंगलुरु से हैदराबाद: 2 घंटे 10 मिनट

  • मुंबई से पुणे: 48 मिनट

  • दिल्ली से सिलीगुड़ी: 6 घंटे

जापान की शिंकान्सेन तकनीक और प्रोजेक्ट का इतिहास

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत की सबसे पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जो 508 किलोमीटर लंबी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने संयुक्त रूप से रखी थी। यह पूरा प्रोजेक्ट जापान की विश्व प्रसिद्ध शिंकान्सेन (Shinkansen) तकनीक और वहां की आर्थिक मदद (लोन) से तैयार किया जा रहा है। हालांकि, शुरुआत में इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) और विभिन्न सरकारी मंजूरियों में हुई देरी के कारण इसके समय में थोड़ा बदलाव हुआ है, और अब यह अगले साल के मध्य तक पटरी पर उतरने के लिए तैयार है।

अस्पताल में हड़कंप: सिजेरियन के बाद आठ महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, दो गंभीर

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जोधपुर। राजस्थान में सिजेरियन ऑपरेशन (प्रसव) के बाद माताओं की सेहत बिगड़ने के लगातार सामने आ रहे मामलों ने चिकित्सा महकमे की नींद उड़ा दी है। कोटा और बीकानेर में हुए हादसों के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में भी ऐसा ही गंभीर वाकया प्रकाश में आया है। यहाँ शनिवार को सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली आठ महिलाओं की तबीयत ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद एकाएक खराब हो गई, जिससे अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग में अफरा-तफरी मच गई। मरीजों में अत्यधिक कमजोरी, ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) की गंभीर कमी और अन्य शारीरिक जटिलताएं दिखने के बाद डॉक्टरों ने आपातकालीन उपचार शुरू किया। मामले की भयावहता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया है और संक्रमण के संभावित कारणों की तकनीकी पड़ताल शुरू कर दी है।

दो प्रसूताओं की हालत नाजुक, उच्च स्तरीय अस्पताल में किया गया स्थानांतरित

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित हुई आठ महिलाओं में से दो की शारीरिक स्थिति ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल स्थानांतरित (रेफर) किया गया है। बाकी बची छह प्रसूताओं की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और उनका इलाज पावटा अस्पताल में ही जारी है। गंभीर रूप से बीमार महिलाओं में से एक को प्रसव के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) की शिकायत हुई है, जबकि दूसरी महिला पहले से ही डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित थी और उसका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक नीचे गिर गया था। फिलहाल, विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक विशेष दल दोनों की सघन निगरानी कर रहा है।

दवाइयों की गुणवत्ता और सर्जरी के उपकरणों की जांच के आदेश

इस घटनाक्रम के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। अस्पताल के बंद किए गए ऑपरेशन थिएटर से लेकर सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई जीवन रक्षक दवाइयों और चिकित्सा सामग्रियों के सैंपल (नमूने) एकत्र कर उन्हें फॉरेंसिक और लैबोरेट्री टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि यह किसी बैक्टीरियल संक्रमण का नतीजा है, दवाइयों की खराब गुणवत्ता का असर है या फिर कोई अन्य तकनीकी खामी इसके पीछे जिम्मेदार है। वास्तविक कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

बीकानेर और कोटा में भी पूर्व में हो चुकी हैं बड़ी अनहोनियां

गौरतलब है कि प्रदेश में प्रसूताओं की जान पर बनने का यह कोई पहला मामला नहीं है। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी सिजेरियन प्रसव के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल होने की दर्दनाक बात सामने आई थी, जिनमें से वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही शारदा नामक महिला ने रविवार को दम तोड़ दिया। वहीं, कुछ समय पहले कोटा के जेके लोन और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी एक के बाद एक पांच प्रसूताओं की जान चली गई थी। कोटा मामले की सरकारी रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि महिलाओं को दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में केवल पानी भरा हुआ था, जिसके चलते संक्रमण फैला और मरीजों के मल्टी ऑर्गन फेल्योर (कई अंगों का काम बंद करना) व सेप्टीसीमिया के कारण मौतें हुईं।

‘बेकार हो…’ टिप्पणी से गरमाई सियासत, खड़गे हुए नाराज

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बेंगलुरु: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यह मामला उस समय का है जब वे पार्टी के एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं द्वारा बार-बार की जा रही नारेबाजी से खड़गे इस कदर नाराज हो गए कि उन्होंने मंच से ही उन्हें 'बेकार लोग' (Useless Fellows) तक कह डाला। अनुशासन को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष का यह कड़ा रुख अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

लगातार नारेबाजी से मंच पर ही भड़के कांग्रेस अध्यक्ष

बेंगलुरु में आयोजित 'संकल्प समावेश' कार्यक्रम के दौरान जब मल्लिकार्जुन खड़गे मंच से अपना संबोधन दे रहे थे, तब सामने मौजूद कार्यकर्ताओं की तरफ से लगातार नारेबाजी की जा रही थी। काफी समझाने के बाद भी जब शोर शांत नहीं हुआ, तो खड़गे का पारा चढ़ गया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा, "तुम लोग बेकार हो। क्या यहाँ इस तरह चिल्लाने से पूरा देश प्रभावित हो जाएगा? शांत होकर बैठो।"

व्यक्ति पूजा के खिलाफ सख्त संदेश और नसीहत

अपने संबोधन के दौरान खड़गे ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि कांग्रेस संगठन में 'व्यक्ति पूजा' के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने मंच से नसीहत देते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या व्यक्तिगत नेता पर केंद्रित कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी का आयोजन है। उन्होंने साफ किया कि सभी लोग यहाँ किसी नेता विशेष की आराधना के लिए नहीं, बल्कि संगठन और पार्टी को मजबूत करने के उद्देश्य से एकत्रित हुए हैं, इसलिए इस तरह का आचरण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के समर्थन में नारे और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

दरअसल, यह पूरा विवाद पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हुआ। जब खड़गे भाषण दे रहे थे, तभी कुछ अति-उत्साही कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पक्ष में 'DK-DK' के नारे लगाने शुरू कर दिए। विवाद बढ़ता देख खड़गे ने कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि कार्यक्रम की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है और फुटेज की जांच करने के बाद अनुशासनहीनता करने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, माहौल बिगड़ता देख स्वयं मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने तुरंत हस्तक्षेप किया और कार्यकर्ताओं को शांत कराया।

आदित्य ठाकरे का बड़ा हमला: बागी नेता बिकाऊ, वफादारी पर सवाल

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मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने अपनी पार्टी के बागी सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। सोमवार (22 जून) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने बागी सांसदों पर विचारधारा के बजाय निजी लालच को प्राथमिकता देने और मतदाताओं के साथ गद्दारी करने का आरोप लगाया। आदित्य ठाकरे ने इन नेताओं को 'बिकाऊ' करार देते हुए कहा कि इन्होंने उन वोटरों के भरोसे का कत्ल किया है, जिन्होंने इन्हें महाविकास अघाड़ी (MVA) और 'इंडिया' गठबंधन के समर्थन से जिताया था।

आदित्य ठाकरे का आरोप— रातों-रात बेची वफादारी

आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर जनता के साथ विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि ये सभी नेता कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी के कार्यकर्ताओं की मेहनत और वोटों के दम पर संसद पहुंचे थे। जनता ने एनडीए (NDA) के उम्मीदवारों और उनकी नीतियों के खिलाफ जनादेश दिया था, लेकिन इन सांसदों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए वफादारी और प्रतिष्ठा को शर्मनाक तरीके से बेच दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि चुनाव के वक्त यही नेता गठबंधन के बड़े नेताओं के सामने अपने क्षेत्रों में रैलियां करवाने के लिए हाथ जोड़ रहे थे और आज रातों-रात पाला बदलकर सत्ताधारी खेमे के पाले में जा खड़े हुए हैं।

शिवसेना (यूबीटी) का एक्शन: 24 घंटे का 'कारण बताओ नोटिस'

इस बड़े राजनीतिक संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) अनिल देसाई ने दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक से नदारद रहने वाले सांसदों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर दिया है। सांसदों को सख्त लहजे में चेतावनी दी गई है कि उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जा सकता है। सभी अनुपस्थित सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित में अपना स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम दिया गया है। पार्टी ने साफ किया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दी है, जिसके बाद संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा और शिंदे गुट में जाने की अटकलें

यह विवाद तब खुलकर सामने आया जब दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल 3 सांसद (अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे) ही पहुंचे। जबकि संजय दीना पाटिल, नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, ओमप्रकाश राजेनिंबाल्कर और भाऊसाहेब वाकचौरे समेत 6 सांसद गायब रहे। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी साफ कर दिया है कि इन बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये सभी 6 सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर चुके हैं, जिसकी पुष्टि सत्ताधारी खेमे के कुछ नेताओं के बयानों से भी हो रही है।

मेलोनी की सख्त राजनीति ने दिलाई वैश्विक मंच पर पहचान

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रोम: इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी वर्तमान में यूरोपीय राजनीति के उन प्रमुख चेहरों में शामिल हैं, जो अपनी बेबाक बयानबाजी और कड़े फैसलों के कारण लगातार चर्चा का केंद्र बनी रहती हैं। वैश्विक मंच पर राष्ट्रवाद, सुरक्षा, यूरोपीय पहचान और प्रवासन (इमिग्रेशन) जैसे संवेदनशील विषयों पर उनके बयानों ने एक नई अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई जुबानी जंग के बाद उनकी आक्रामक राजनीतिक कार्यशैली एक बार फिर दुनिया भर के विश्लेषकों की नजरों में आ गई है।

वैचारिक हिंसा और अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व से टकराव

मेलोनी ने यूरोप के भीतर पनप रही वैचारिक हिंसा और सुरक्षा खतरों पर हमेशा खुलकर अपनी बात रखी है। फ्रांस में एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता की हत्या का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने इसे किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे महाद्वीप की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया था। हालांकि इस टिप्पणी पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने परोक्ष रूप से आपत्ति जताई थी, लेकिन मेलोनी ने अपने कदम पीछे खींचने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार किसी एक देश की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

अवैध प्रवासन और सांस्कृतिक पहचान पर अडिग रुख

सांस्कृतिक ताने-बाने की सुरक्षा और अवैध प्रवासन का मुद्दा मेलोनी के एजेंडे में सबसे ऊपर रहा है। यूरोप में अनियंत्रित रूप से बढ़ रहे अवैध आव्रजन और उसके कारण सांस्कृतिक एकीकरण में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों पर उन्होंने हमेशा चिंता व्यक्त की है। उनके इस कड़े रुख के कारण सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं भी हुईं, लेकिन मेलोनी वैश्विक दबाव के आगे नहीं झुकीं। उन्होंने घुसपैठ को रोकने के लिए अपनी सख्त नीतियों और कड़े प्रशासनिक उपायों का समर्थन जारी रखा है।

घरेलू राजनीति में सख्त कानून व्यवस्था और छवि

इटली के आंतरिक मामलों में भी मेलोनी न्यायपालिका और प्रशासनिक निर्णयों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर जोर दिया है। इसके साथ ही महिलाओं के सम्मान की रक्षा और इंटरनेट पर फैलने वाले भ्रामक प्रचार (ऑनलाइन दुष्प्रचार) के खिलाफ भी उन्होंने बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई की वकालत की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आलोचक भले ही उनकी विचारधारा को विवादित मानें, लेकिन आम जनता के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता की मुख्य वजह उनका यही निर्भीक और मजबूत नेतृत्व है, जो उन्हें यूरोप की सबसे ताकतवर नेताओं की कतार में खड़ा करता है।

द. अफ्रीका से मिली हार ने बढ़ाई टेंशन, जानें भारत का क्वालिफिकेशन समीकरण

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महिला टी20 विश्व कप 2026 में लगातार दो शानदार जीत दर्ज करने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विजयी रफ्तार पर दक्षिण अफ्रीका ने ब्रेक लगा दिया है। ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए ग्रुप-ए के बेहद अहम मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को छह विकेट से शिकस्त देकर सेमीफाइनल की रेस को पूरी तरह से रोमांचक और त्रिकोणीय बना दिया है। इस करारी हार के बाद भी भारतीय टीम बेहतर नेट रन रेट के आधार पर अंक तालिका में दूसरे पायदान पर बरकरार है, लेकिन नॉकआउट चरण में पहुंचने की उसकी राह अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण हो गई है।

मारिजाने कैप ने अकेले पलटा मैच, मिले दो जीवनदान पड़े भारी

दक्षिण अफ्रीका की अनुभवी और स्टार ऑलराउंडर मारिजाने कैप इस मुकाबले में भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनकर उभरीं। उन्होंने खेल के दोनों विभागों में अद्वितीय प्रदर्शन करते हुए मैच का रुख पूरी तरह अपनी टीम की ओर मोड़ दिया। गेंदबाजी के दौरान घातक प्रदर्शन करते हुए 27 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाने वाली कैप ने बाद में बल्लेबाजी में भी तहलका मचा दिया। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों की रिमांड पर लेते हुए महज 45 गेंदों में सात चौकों और चार गगनचुंबी छक्कों की मदद से 81 रनों की नाबाद विस्फोटक पारी खेली।

भारतीय टीम के लिए इस मैच का सबसे टर्निंग पॉइंट मारिजाने कैप को मिले दो जीवनदान रहे। फील्डिंग के दौरान भारतीय स्थानापन्न (सबस्टीट्यूट) खिलाड़ी राधा यादव ने कैप के दो बेहद आसान कैच टपका दिए। टीम इंडिया को यह गलतियां इतनी भारी पड़ीं कि कैप ने मैच को भारत की पकड़ से पूरी तरह दूर कर दिया और दक्षिण अफ्रीका ने 19.1 ओवर में 161 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

धीमी बल्लेबाजी के कारण बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रही टीम इंडिया

इससे पहले, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 158 रनों का ही स्कोर खड़ा कर सकी। टीम के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को अच्छी शुरुआत तो मिली, लेकिन वे उसे एक बड़े और मैच जिताऊ स्कोर में तब्दील करने में पूरी तरह नाकाम रहे। मध्यक्रम की बल्लेबाजी में वह आक्रामकता और धार बिल्कुल गायब दिखी, जिसकी दरकार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर होती है। दक्षिण अफ्रीकी स्पिनरों और तेज गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में भारतीय रनगति पर पूरी तरह अंकुश लगाए रखा, जिसका सीधा असर भारत के अंतिम टोटल पर साफ देखने को मिला।

महिला टी20 विश्व कप 2026: ताजा अंक तालिका

इस मैच के परिणाम के बाद दोनों ग्रुपों की अंक तालिका का समीकरण बेहद दिलचस्प हो गया है:

ग्रुप-ए

टीममैचजीतहारबेनतीजाकुल अंकनेट रन रेट (NRR)
ऑस्ट्रेलिया33006+4.391
भारत32104+2.511
दक्षिण अफ्रीका32104-0.546
बांग्लादेश32104-0.641
पाकिस्तान (बाहर)30300-1.857
नीदरलैंड (बाहर)30300-3.384

 

ग्रुप-बी

टीममैचजीतहारबेनतीजाकुल अंकनेट रन रेट (NRR)
इंग्लैंड33006+2.490
वेस्टइंडीज33006+0.644
न्यूजीलैंड31202-0.063
स्कॉटलैंड31202-0.083
श्रीलंका31202-1.913
आयरलैंड (बाहर)30300-1.054

 

क्या है भारत के लिए सेमीफाइनल का गणित?

अफ्रीकी टीम से मिली इस पराजय के बाद भी भारतीय महिला टीम की किस्मत अभी भी पूरी तरह उसके अपने हाथों में है, लेकिन आगे का सफर किसी कांटेदार राह से कम नहीं है:

  • दोनों मैच जीतने पर सीधी एंट्री: अगर कप्तान हरमनप्रीत कौर की सेना अपने आगामी दोनों ग्रुप मैच जीत लेती है, तो वह बिना किसी तकनीकी अड़चन के सीधे सेमीफाइनल का टिकट कटा लेगी।

  • एक मैच हारने पर समीकरणों का फेर: यदि भारत अपने अगले दो मैचों में से एक मुकाबला गंवा देता है, तो उसकी उम्मीदें पूरी तरह इस बात पर टिक जाएंगी कि दक्षिण अफ्रीका भी अपने बचे हुए दो मैचों में से कम से कम एक मैच जरूर हारे। ऐसी स्थिति में फैसला नेट रन रेट के तराजू पर होगा, जहां फिलहाल भारत (+2.511) दक्षिण अफ्रीका (-0.546) से काफी मजबूत स्थिति में है।

  • बांग्लादेश से हारे तो पैक होगा बोरिया-बिस्तर: यदि भारतीय टीम 25 जून को होने वाले मुकाबले में बांग्लादेश के हाथों उलटफेर का शिकार हो जाती है, तो उसका विश्व कप का सफर लगभग यहीं समाप्त हो जाएगा। वहीं दोनों मैच हारने की सूरत में भारत आधिकारिक तौर पर टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा।

अब हर मुकाबला बनेगा 'करो या मरो' का नॉकआउट

ग्रुप-ए में वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को अब 23 जून को पाकिस्तान से भिड़ना है, जहां एक जीत उनकी सेमीफाइनल में जगह पक्की कर देगी। इसके बाद 28 जून को ऑस्ट्रेलिया और भारत का आमना-सामना होगा, जो भारत के लिए करो या मरो वाला मैच साबित हो सकता है। दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका के अगले दो मैच तुलनात्मक रूप से आसान टीमों (नीदरलैंड और बांग्लादेश) के खिलाफ हैं।

भारतीय टीम का अगला मुकाबला 25 जून को मैनचेस्टर में बांग्लादेश से होगा, जबकि आखिरी ग्रुप मैच 28 जून को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला जाएगा। ग्रुप चरण अब अपने सबसे अंतिम और निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुका है, जिसके चलते भारत के लिए अब हर मैच नॉकआउट की तरह होगा। भारतीय टीम को अब न केवल मैच जीतने होंगे, बल्कि अपनी पुरानी गलतियों को सुधारते हुए खेल के हर विभाग में शत-प्रतिशत प्रदर्शन करना होगा।

गुरुद्वारे में हंगामा, निहंगों ने भक्त को बंधक बनाकर दी धमकी

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देहरादून/रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के चमोली स्थित कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए आपसी विवाद के बाद अब रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। शनिवार देर शाम पंजाब से आए हथियारों से लैस छह निहंगों ने हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर स्थित इस गुरुद्वारे पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और वहां मौजूद दो लोगों को बंधक बना लिया। हालांकि बाद में उन्होंने एक व्यक्ति को छोड़ दिया, लेकिन एक सेवादार को अभी भी बंधक बना रखा है। निहंगों ने परिसर में घुसने वाले को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और आईटीबीपी की टीमें पिछले 24 घंटों से मौके पर डटी हुई हैं, लेकिन दो दौर की बातचीत विफल होने के बाद गतिरोध अब भी बरकरार है।

प्रशासनिक प्रयास और गुरुद्वारे में बढ़ा गतिरोध

विवाद को शांत करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। रविवार सुबह रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी निहंगों से संवाद करने पहुंचे, लेकिन उन्होंने बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया। इससे पहले पुलिस कप्तान ने भी दो दौर की वार्ता के जरिए उन्हें समझाने की कोशिश की थी, जो बेअसर रही। आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे की छत पर चढ़कर परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया और इस दौरान वहां तैनात सेवादारों के साथ मारपीट व अभद्रता भी की गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे इलाके में भारी संख्या में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।

पंजाब से आए प्रतिनिधिमंडल का हस्तक्षेप और मांग

इस संवेदनशील मामले के तूल पकड़ते ही पंजाब से एक सिख प्रतिनिधिमंडल भी उत्तराखंड पहुंच चुका है। इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि इस पूरी घटना में शामिल सिख युवकों के साथ अन्याय हुआ है और स्थानीय प्रशासन द्वारा एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत 16 जून को हुई थी, जब हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौट रहे कुछ निहंगों और स्थानीय व्यापारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी, जिसके बाद से यह तनाव लगातार बढ़ता चला गया।

एहतियातन इंटरनेट सेवाएं बंद और सुरक्षा सख्त

माहौल को बिगड़ने से बचाने और अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। रुद्रप्रयाग और श्रीनगर (गढ़वाल) के क्षेत्रों में एहतियातन इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि सोशल मीडिया के जरिए किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी न फैलाई जा सके। हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया गया है और उच्च अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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