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हिजाब नियम तोड़ने पर ईरानी गायिका पर बड़ी कार्रवाई

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तेहरान: ईरान की एक अदालत ने देश के बेहद कड़े इस्लामी कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप में 29 वर्षीय मशहूर गायिका और संगीतकार परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की अमानवीय सजा सुनाई है। परस्तू पर आरोप है कि उन्होंने एक ऑनलाइन प्रस्तुति के दौरान देश के अनिवार्य हिजाब कानून का पालन नहीं किया और बिना हिजाब के स्लीवलेस (बिना आस्तीन की) ड्रेस पहनकर परफॉर्म किया। कोम प्रांत की अदालत ने उनके इस कृत्य को 'अश्लीलता फैलाना' करार देते हुए यह सख्त सजा मुकर्रर की है।

पूरी प्रोडक्शन टीम पर गाज और करियर पर पूर्ण प्रतिबंध

अदालत का यह सख्त रुख केवल गायिका तक ही सीमित नहीं रहा। कोर्ट ने परस्तू अहमदी की प्रोडक्शन टीम के आठ अन्य सदस्यों को भी इस कृत्य का दोषी मानते हुए 74-74 कोड़े मारने का हुक्म दिया है। इसके साथ ही परस्तू के करियर को पूरी तरह प्रभावित करने वाले कई प्रतिबंध भी लगाए गए हैं, जिसके तहत अगले दो वर्षों तक उनके देश छोड़ने पर रोक लगा दी गई है और वे किसी भी तरह के कॉन्सर्ट या पब्लिक इवेंट में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।

यूट्यूब लाइव कॉन्सर्ट से शुरू हुआ विवाद और मानवाधिकारों पर बहस

यह पूरा विवाद दिसंबर 2024 में आयोजित एक ऑनलाइन कॉन्सर्ट से जुड़ा है, जिसमें परस्तू ने यूट्यूब पर लाइव आकर प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'अज खूने जवानाने वतन' गाया था। इस प्रदर्शन के दौरान काले रंग की स्लीवलेस पोशाक पहनने के कारण उन्हें और उनकी टीम को तुरंत हिरासत में ले लिया गया था। ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक और डिजिटल मंचों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। इस फैसले के सामने आने के बाद दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने इसकी तीखी आलोचना की है और सोशल मीडिया पर ईरान में महिलाओं की आजादी तथा मानवाधिकारों की दयनीय स्थिति को लेकर वैश्विक स्तर पर आक्रोश देखा जा रहा है।

प्रसूताओं की मौत के बीच स्वास्थ्य मंत्री का दावा, सिजेरियन ट्रेंड पर दिया बयान

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जयपुर। राजस्थान के कोटा, बीकानेर और जोधपुर शहरों में प्रसूताओं की मौत के गंभीर मामलों पर चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली भले ही सवालों के घेरे में हो, लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर अपने बयानों को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के पास इस गंभीर समस्या का ठोस समाधान भले न हो, लेकिन उनके विवादित बयानों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में उनका एक नया बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि आज के दौर की युवा पीढ़ी प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) का सामना करने से बचना चाहती है, जो सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन से प्रसव) के बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी माना कि अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे गंभीर मरीज आते हैं, जिन्हें अन्य जगहों से रेफर किया जाता है।

जोधपुर, कोटा और बीकानेर के मामलों पर सफाई

स्वास्थ्य मंत्री खींवसर ने मीडिया से बातचीत में तर्क दिया कि जोधपुर के मामलों को कोटा और बीकानेर की घटनाओं के साथ मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जोधपुर में जिन महिलाओं का स्वास्थ्य बिगड़ा था, उनमें से अधिकांश की स्थिति अब पूरी तरह सामान्य है और सरकार पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रभावित महिलाओं में से छह की हालत ठीक है, जबकि एक महिला को गंभीर डायबिटीज के चलते बेहतर इलाज के लिए एम्स जोधपुर भेजा गया है और एक अन्य महिला का पीलिया का उपचार चल रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच कर रही है ताकि प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारणों को स्पष्ट किया जा सके।

सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर जताया भरोसा

मंत्री ने सरकारी चिकित्सा तंत्र का बचाव करते हुए कहा कि दूर-दराज के इलाकों से महिलाएं बेहद गंभीर और नाजुक हालत में लंबी दूरी तय करके बड़े सरकारी अस्पतालों में पहुंचती हैं। ऐसे संवेदनशील मामलों का इलाज करना डॉक्टरों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का आना यह भी साबित करता है कि आम जनता का आज भी बड़े सरकारी अस्पतालों और वहां तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों की चिकित्सा सेवाओं पर गहरा विश्वास है।

पूर्व के बयानों से भी गरमाई थी सियासत

यह पहली बार नहीं है जब प्रसूताओं की मौतों के संवेदनशील मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री ने ऐसा बयान दिया हो। इससे पहले जब बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में हुई प्रसूताओं की मौतों को लेकर मीडिया ने उनसे लापरवाही पर सवाल पूछा था, तो उन्होंने जवाब देने के बजाय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा की तरफ इशारा करते हुए मजाकिया लहजे में कह दिया था कि 'बताइए प्रिंसिपल साहब, गर्भवती महिलाएं गंभीर हालत में आई थीं या नाचते हुए आई थीं।' इसी तरह कोटा के मामले पर भी उन्होंने एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि महिलाओं को जो ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन लगाए गए थे, उनमें दवा की जगह केवल पानी भरा हुआ था, जिसने स्वास्थ्य महकमे की सजगता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए थे।

जासूसी केस में मुश्ताक को रिमांड पर भेजा गया, वित्तीय लेनदेन की जांच तेज

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जैसलमेर। पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के गंभीर आरोप में घिरे संदिग्ध मुश्ताक को शुरुआती पांच दिनों की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद आज पुनः अदालत में पेश किया गया। सीआईडी इंटेलिजेंस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी से आगे की पूछताछ के लिए न्यायालय से तीन दिन की और कस्टडी मांगी थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया है। विशेष लोक अभियोजक (पीपी) सुदेश सतवान के अनुसार, इस अतिरिक्त रिमांड अवधि के दौरान आरोपी के कॉल रिकॉर्ड्स, डिजिटल डेटा और बैंक खातों के लेन-देन की गहनता से पड़ताल की जाएगी क्योंकि वह पिछले दो वर्षों से लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था।

लोकेशन पर ले जाकर की गई तफ्तीश

इससे पहले मिली पांच दिनों की रिमांड के दौरान सीआईडी की टीम आरोपी मुश्ताक को जैसलमेर के उन तमाम संवेदनशील इलाकों में लेकर गई, जहां वह निवास कर रहा था और जिनकी तस्वीरें व वीडियो उसने सीमा पार साझा किए थे। जांच एजेंसियों ने इन सभी ठिकानों पर ले जाकर घटनाक्रम का सत्यापन किया है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात का पुख्ता संदेह है कि इस जासूसी नेटवर्क में कुछ अन्य स्थानीय नागरिक भी उसकी मदद कर रहे थे। इसके साथ ही, सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान आरोपी ने कोई गोपनीय सामरिक जानकारी साझा की थी या नहीं, इस बिंदु पर भी सीआईडी हर नजरिए से जांच को आगे बढ़ा रही है।

सामरिक ठिकानों की निगरानी और पाकिस्तानी संपर्क

अब तक की पूछताछ और जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुश्ताक पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के इशारे पर भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गतिविधियों पर चौकस नजर रखता था। वह गूगल मैप कैम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर सटीक लोकेशन के साथ तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेजता था। पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देश पर ही उसने क्षेत्र में एक चाय की दुकान खोली थी, जहां से लाइव फीड कैमरे लगाकर सेना के मूवमेंट की निगरानी करने की साजिश थी। तलाशी के दौरान उसके मोबाइल से 'खालिद' और 'नजीर अहमद' नाम के दो संदिग्ध नंबर मिले हैं, जो पाकिस्तान में बैठकर एजेंटों को ट्रेनिंग देने का काम करते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय नेटवर्क पर बड़े सवाल

देश की आंतरिक व राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में सीआईडी इंटेलिजेंस लगातार कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा तंत्र के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जैसे कि आरोपी अब तक भारत की कौन-कौन सी गोपनीय जानकारियां सीमा पार भेज चुका है? क्या इस देश विरोधी कृत्य में सीमावर्ती इलाके के कुछ और लोग भी उसके साझीदार थे? और सबसे अहम यह कि पाकिस्तानी हैंडलर्स किस तरह स्थानीय नागरिकों को अपने जाल में फंसाकर देश के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जा सके।

जयपुर में आतंकी साजिश का खुलासा, जैश की महिला स्लीपर सेल दबोची गई

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिले एक इनपुट के आधार पर आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने जयपुर से बबीता नामक एक महिला को गिरफ्तार किया है, जिस पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला स्लीपर सेल के रूप में काम करने का आरोप है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस महिला ने इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन कलमा पढ़कर अपना मत परिवर्तन कर लिया था। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई हैं।

कट्टरपंथ और मत परिवर्तन का संदेह

इस पूरे मामले पर एटीएस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि शुरुआती जांच के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि सीमा पार के प्रतिबंधित संगठनों ने इस महिला को अपने जाल में फंसाया और उसका ब्रेनवॉश कर उसे कट्टरपंथ की राह पर धकेल दिया। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, अभी जांच बिल्कुल शुरुआती चरण में है, इसलिए आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि उसका पूरी तरह से मत परिवर्तन हो चुका था या नहीं। फिलहाल सभी सबूत डिजिटल रूप में मौजूद हैं, जिनकी बारीकी से जांच और पुष्टि की जा रही है, लेकिन शुरुआती तौर पर यह बात पुख्ता हुई है कि पिछले छह-सात महीनों से विदेशी ताकतें उसे प्रभावित कर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रच रही थीं।

सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी नेटवर्क का खुलासा

जांच टीम को महिला के सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगालने पर कई चौंकाने वाले सुराग मिले हैं। बबीता के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कुछ ऐसे संदिग्ध अकाउंट्स सक्रिय पाए गए हैं, जो सीधे तौर पर प्रतिबंधित संगठनों से ताल्लुक रखते हैं। एटीएस अब इस बात की तस्दीक करने में जुटी है कि क्या ये सोशल मीडिया हैंडल उन्हीं मूल आतंकियों के हैं जिन्होंने अतीत में बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है। यह भी अंदेशा है कि ये जैश-ए-मोहम्मद के ही सदस्य हैं या फिर उससे जुड़े अन्य सहयोगी संगठन हैं, जिन्होंने जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए अपने नाम बदल लिए हैं।

देश में बड़ी साजिश रचने की थी तैयारी

अधिकारियों ने साफ किया है कि हालांकि तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों की अंतिम पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन यह बात पूरी तरह से सच साबित हो चुकी है कि संदिग्ध महिला के तार सीधे तौर पर पड़ोसी देश पाकिस्तान और आतंकी संगठन जैश से जुड़े लोगों से मिले हुए थे। वे लोग इस महिला को एक मोहरे की तरह इस्तेमाल कर भारत की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने और यहां किसी बड़ी अनहोनी या हिंसक घटना को अंजाम देने की फिराक में थे, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया है।

NEET एग्जाम में ड्रेस को लेकर विवाद, बुर्का मुद्दे पर गरमाई राजनीति

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अजमेर। राजस्थान के अजमेर जिले में नीट परीक्षा के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर बुर्का पहनकर आई मुस्लिम महिला अभ्यर्थी को लगभग एक घंटे तक प्रवेश से रोके जाने का एक विवादित मामला प्रकाश में आया है। इस संवेदनशील वाकये के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है। घटना की जानकारी सामने आते ही कांग्रेस, भाजपा और मुस्लिम धर्मगुरुओं की तरफ से अलग-अलग और कड़े रुख देखने को मिल रहे हैं।

कांग्रेस ने उत्पीड़न का लगाया आरोप

इस घटनाक्रम को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रूबी खान ने इस पूरे मामले को सीधे तौर पर छात्रा का उत्पीड़न करार दिया है। उनका कहना है कि बुर्के में प्रवेश देने के नाम पर किसी परीक्षार्थी को एक घंटे तक रोके रखना पूरी तरह से गलत और अमानवीय है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि परीक्षा देने आई छात्रा को बेवजह परेशान किया गया, जिससे परीक्षा से ठीक पहले वह गंभीर मानसिक तनाव से गुजरने को मजबूर हुई।

बीजेपी ने की नियमों की वकालत

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को किसी भी तरह का धार्मिक या राजनीतिक रंग न देने की नसीहत दी है। भाजपा के प्रांत मीडिया सह प्रभारी रचित कच्छावा ने इस संदर्भ में कहा कि परीक्षा के तय नियमों का पालन करना हर एक अभ्यर्थी के लिए अनिवार्य है। इसे किसी भी तरह से मजहबी या सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए अगर प्रशासन को और अधिक कड़े कदम उठाने की आवश्यकता हो, तो वह भी उठाए जाने चाहिए क्योंकि परीक्षा की शुचिता और निष्पक्षता सबसे ऊपर है।

मुस्लिम धर्मगुरुओं ने व्यक्त की नाराजगी

इस पूरे विवाद पर मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों और धर्मगुरुओं ने अपनी गहरी असंतुष्टि और नाराजगी प्रकट की है। जयपुर स्थित इस्लामिक सेंटर के संयोजक मोहम्मद नाजिम ने इस वाकये की कड़े शब्दों में निंदा की है। मोहम्मद नाजिम का आरोप है कि इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि किस तरह से एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर परेशान करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि शिक्षा और परीक्षा जैसे क्षेत्रों में इस तरह का भेदभावपूर्ण रवैया किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन पर कप्तान चामरी ने खुद को ठहराया जिम्मेदार

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महिला टी20 विश्व कप 2026 में श्रीलंकाई महिला क्रिकेट टीम का निराशाजनक और लचर प्रदर्शन लगातार जारी है। वेस्टइंडीज के खिलाफ मिली करारी शिकस्त के साथ ही टूर्नामेंट में श्रीलंका की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें लगभग मटियामेट हो गई हैं। टीम की इस लगातार नाकामी और खराब खेल से कप्तान चामरी अटापट्टू बेहद आहत और निराश हैं। उन्होंने इस शर्मनाक हार की पूरी नैतिक जिम्मेदारी किसी अन्य खिलाड़ी पर डालने के बजाय खुद अपने कंधों पर ली है।

'18 साल के करियर का सबसे बड़ा दर्द, कप्तान के तौर पर मैं नाकाम रही'

वेस्टइंडीज से मैच गंवाने के बाद श्रीलंकाई कप्तान चामरी अटापट्टू भावुक हो गईं और उन्होंने कहा, "इस वक्त मेरे दिल में जो दुख और निराशा है, उसे शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है। मैंने अपने देश की राष्ट्रीय टीम के लिए लगभग 18 वर्षों तक क्रिकेट खेला है, लेकिन यह मेरे करियर की सबसे बड़ी कसक रहेगी कि मैं कभी भी अपनी टीम को विश्व कप के सेमीफाइनल तक ले जाने में कामयाब नहीं हो सकी। भले ही एक व्यक्तिगत खिलाड़ी के तौर पर मैंने मैदान पर कई बड़े कीर्तिमान और उपलब्धियां हासिल की हों, लेकिन एक कप्तान के तौर पर मैं पूरी तरह विफल रही हूं। मुझे लगता है कि किसी भी नेतृत्वकर्ता के लिए यह बहुत बड़ा दर्द है, और अब मुझे जिंदगीभर इसी मलाल के साथ जीना होगा।"

श्रीलंका के लिए सेमीफाइनल के रास्ते पूरी तरह बंद, इंग्लैंड-इंडीज मजबूत

इस वैश्विक टूर्नामेंट में श्रीलंका ने अब तक कुल तीन मुकाबले खेले हैं, जिनमें से दो मैचों में उसे एकतरफा हार का सामना करना पड़ा है। इस लचर प्रदर्शन के बाद श्रीलंका की नॉकआउट स्टेज में पहुंचने की उम्मीदें गणितीय रूप से बेहद धुंधली हो चुकी हैं। ग्रुप-बी के समीकरणों को देखें तो इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमों ने अपने तीनों ही शुरुआती मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज कर अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया हुआ है।

ऐसे में इस ग्रुप से सेमीफाइनल में जाने की सबसे बड़ी दावेदार भी यही दोनों टीमें हैं। श्रीलंका की टीम यदि अपने आगामी दोनों मैच जीत भी जाती है, तो वह अधिकतम छह अंकों तक ही पहुंच पाएगी, जो क्वालीफाई करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। श्रीलंका को अपने अगले दो औपचारिक मैच स्कॉटलैंड और आयरलैंड के खिलाफ खेलने हैं।

'मुझे अधिक जिम्मेदारी से खेलना चाहिए था, मैंने आखिरी मौका खो दिया'

कप्तान अटापट्टू ने आत्ममंथन करते हुए आगे कहा, "मैदान पर मैंने अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन मुझे लगता है कि टीम की सबसे अनुभवी खिलाड़ी होने के नाते मुझे क्रीज पर और अधिक जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करनी चाहिए थी। अगर मैं वेस्टइंडीज के खिलाफ विकेट पर टिककर खेलती, तो मैच का नतीजा कुछ और हो सकता था और हम जीत दर्ज कर सकते थे। मुझे हार के लिए अपनी टीम के युवा खिलाड़ियों को दोष देना बिल्कुल पसंद नहीं है। मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत दुखी हूं क्योंकि मुझे अहसास हो चुका है कि मैंने विश्व कप जीतने का अपना आखिरी सुनहरा मौका भी हमेशा के लिए खो दिया है।"

कैरेबियाई गेंदबाजों के सामने 100 रन भी नहीं बना सकी श्रीलंकाई टीम

यदि मुकाबले की बात करें, तो वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की बल्लेबाजी बेहद गैर-जिम्मेदाराना रही। पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई और महज 98 रनों के मामूली स्कोर पर ऑलआउट हो गई। टीम की कोई भी शीर्ष क्रम की बल्लेबाज क्रीज पर रुककर कैरेबियाई गेंदबाजों की रणनीति का सामना नहीं कर सकी।

जवाब में वेस्टइंडीज की महिला टीम ने 99 रनों के इस आसान लक्ष्य को मात्र 5 विकेट खोकर 16.1 ओवरों में ही बेहद आसानी से हासिल कर लिया। श्रीलंकाई गेंदबाजों ने शुरुआती सफलताएं हासिल कर मैच में वापसी का प्रयास जरूर किया, लेकिन कम स्कोर के कारण वे अपनी टीम की हार को टालने में पूरी तरह नाकाम रहीं।

डूंगरपुर में दर्दनाक हादसा, तालाब में डूबने से दो मासूम बच्चियों की मौत

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डूंगरपुर। राजस्थान के डूंगरपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां तालाब में डूबने से दो मासूम बच्चियों की अकाल मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा मांडवा खापड़ा गांव का है, जहां इस घटना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय पुलिस ने सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचकर दोनों बच्चियों के शवों को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करवाई।

बकरियां चराने के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा

मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को मांडवा खापड़ा गांव की रहने वाली 12 वर्षीय उषा (पुत्री राजू कोटेड) और नैना (पुत्री दशरथ खराड़ी) गांव के पास स्थित घाटी तालाब के किनारे बकरियां चराने के लिए गई थीं। इसी दौरान दोनों बच्चियों का संतुलन अचानक बिगड़ गया और वे तालाब में बने करीब 15 फीट गहरे पानी से भरे एक गड्ढे में जा गिरीं। गहरा पानी होने के कारण दोनों बालिकाएं खुद को संभाल नहीं पाईं और डूबने लगीं। जैसे ही इस हादसे की खबर आसपास के लोगों को मिली, मौके पर भारी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठा हो गई।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें

हादसे की जानकारी मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस और सिविल डिफेंस की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग और सिविल डिफेंस के जवानों की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला जा सका। उन्हें बिना वक्त गंवाए तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दोनों मासूमों को मृत घोषित कर दिया। इस खबर के सुनते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और जांच शुरू

पुलिस ने दोनों मृत बच्चियों के शवों को जिला अस्पताल के शवगृह में रखवा कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि मृतका नैना सातवीं कक्षा की छात्रा थी, जबकि उषा आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी। इन दो मासूमों की असमय मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। इस हृदयविदारक घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए जलाशयों के आसपास उचित सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।

वैभव सूर्यवंशी के साथी खिलाड़ी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म, जानें पूरा मामला

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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2027 के महाकुंभ को शुरू होने में भले ही अभी लंबा वक्त बाकी है, लेकिन इसके आगामी सत्र को लेकर सभी फ्रेंचाइजियों में अंदरूनी रणनीतियों और बड़े बदलावों की सुगबुगाहट अभी से तेज हो गई है। इस फेहरिस्त में सबसे ज्यादा सुर्खियां पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस बटोर रही है, जो अगले सीजन के लिए एक नए सिरे से 'कोर टीम' को तैयार करने की कवायद में जुटी हुई है। मुंबई का प्रबंधन अब पुराने और सीनियर चेहरों के स्थान पर युवा रक्त को तरजीह देने की योजना बना रहा है। इसी सिलसिले में मुंबई इंडियंस ने अन्य फ्रेंचाइजियों के साथ खिलाड़ियों की अदला-बदली (ट्रेड) को लेकर औपचारिक बातचीत का पहला दौर भी शुरू कर दिया है, जिसमें उनका सबसे पहला और बड़ा निशाना राजस्थान रॉयल्स के स्टार ओपनर यशस्वी जायसवाल हैं।

हार्दिक पांड्या को ट्रेड करेगी मुंबई, राजस्थान रॉयल्स ने दिखाई गहरी दिलचस्पी

खेल जगत की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई इंडियंस के खेमे से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक फ्रेंचाइजी अपने मौजूदा कप्तान और स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को रिलीज या ट्रेड करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। दूसरी तरफ, हार्दिक पांड्या ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे आगामी सीजन मुंबई इंडियंस के साथ नहीं बिताना चाहते हैं। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे फ्रेंचाइजी के कुछ नीतिगत फैसलों और सीनियर खिलाड़ियों के असहयोगात्मक रवैये से खुश नहीं हैं, जिसके चलते उन्होंने टीम छोड़ने का मन पूरी तरह बना लिया है।

इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए मुंबई इंडियंस ने हार्दिक के ट्रेड को लेकर राजस्थान रॉयल्स के प्रबंधन से संपर्क साधा है। राजस्थान रॉयल्स भी एक बेहतरीन ऑलराउंडर और अनुभवी भारतीय खिलाड़ी के रूप में हार्दिक को अपने साथ जोड़ने में गहरी रुचि दिखा रहा है। हालांकि, इस मेगा ट्रेड के बदले में मुंबई इंडियंस ने राजस्थान से उनके सबसे बड़े मैच विनर यशस्वी जायसवाल की मांग कर दी है।

राजस्थान रॉयल्स में क्यों असंतुष्ट दिखे यशस्वी जायसवाल?

यशस्वी जायसवाल के फ्रेंचाइजी छोड़ने की अटकलें आईपीएल के पिछले सत्रों से ही लगाई जा रही हैं। इसके पीछे कुछ रणनीतिक कारण रहे हैं:

  • कप्तानी का विवाद: साल 2025 में जब नियमित कप्तान संजू सैमसन के चोटिल होने पर प्रबंधन ने उनकी गैरमौजूदगी में रियान पराग को कार्यवाहक कप्तान नियुक्त किया था, तब यशस्वी के खेमे में गहरी नाराजगी देखी गई थी।

  • सैमसन के जाने के बाद भी उपेक्षा: साल 2026 में भी टीम रियान पराग की अगुवाई में खेली और केवल पराग की अनुपस्थिति में ही यशस्वी को कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। संजू सैमसन के राजस्थान फ्रेंचाइजी छोड़ने के बाद यशस्वी के पास टीम का सबसे बड़ा मार्गदर्शक बनने का मौका था, लेकिन कप्तानी को लेकर हुए इन फैसलों के बाद अब उनके मुंबई जाने की अटकलें दोबारा सच होती दिख रही हैं।

वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी की सुपरहिट जोड़ी टूटने की कगार पर

यदि यशस्वी जायसवाल राजस्थान रॉयल्स का साथ छोड़ते हैं, तो क्रिकेट फैंस को आईपीएल 2026 की सबसे विस्फोटक सलामी जोड़ी का अंत देखना पड़ेगा। पिछले सीजन में यशस्वी और युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी की जोड़ी ने राजस्थान रॉयल्स को कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में बेहद आक्रामक और ऐतिहासिक शुरुआत दिलाई थी।

वैभव सूर्यवंशी ने भी कई साक्षात्कारों में यह माना था कि क्रीज पर यशस्वी उन्हें लगातार तकनीकी टिप्स देते हैं और मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में बड़ी मदद करते हैं। हालांकि, यदि यशस्वी का मुंबई इंडियंस में ट्रांसफर होता है, तो यह उनके व्यक्तिगत करियर के लिए टर्निंग पॉइंट हो सकता है। यशस्वी घरेलू क्रिकेट में रणजी ट्रॉफी मुंबई की टीम से ही खेलते हैं, ऐसे में मुंबई इंडियंस की जर्सी पहनना उनके लिए अपने घर लौटने जैसा होगा।

सूर्यकुमार यादव भी छोड़ सकते हैं मुंबई का साथ, दो टीमों ने दिया कप्तानी का ऑफर

मुंबई इंडियंस अगले सीजन से पहले टीम का पूरी तरह कायाकल्प करने के मूड में है। इस बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग प्रक्रिया में न केवल हार्दिक पांड्या, बल्कि टी-20 के धाकड़ बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव को भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आईपीएल की दो बड़ी फ्रेंचाइजियों ने सूर्यकुमार यादव को अपनी टीम में शामिल करने के लिए मुंबई इंडियंस से संपर्क किया है और वे दोनों ही टीमें सूर्या को आगामी सीजन के लिए अपना मुख्य कप्तान नियुक्त करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

नई जनरेशन की टीम बनाने पर मुंबई इंडियंस का पूरा जोर

दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा अपने अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं। ऐसे में यदि हार्दिक पांड्या और सूर्यकुमार यादव जैसे सीनियर खिलाड़ी भी टीम से बाहर हो जाते हैं, तो मुंबई इंडियंस का प्रबंधन पूरी तरह से 'न्यू जनरेशन' यानी युवा पीढ़ी की टीम बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। इस भविष्यवादी योजना में यशस्वी जायसवाल से बेहतर और प्रतिभाशाली विकल्प भारत में दूसरा कोई नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या मुंबई की टीम यशस्वी को सिर्फ एक बल्लेबाज के तौर पर जोड़ेगी या उन्हें टीम की कप्तानी भी सौंपेगी। बहरहाल, आईपीएल 2027 को लेकर क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह अभी से चरम पर पहुंच गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट विवाद पर शंकराचार्य का तीखा बयान

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छिंदवाड़ा: द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज के छिंदवाड़ा आगमन पर उनके अनुयायियों और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान मीडिया और श्रद्धालुओं से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने देश के वर्तमान धार्मिक, प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर में सामने आए कथित दान चोरी मामले पर गहरा दुख प्रकट करने के साथ-साथ देश में बढ़ रहे धर्मांतरण के मामलों पर भी चिंता जताई और इसके स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों को निम्नलिखित तीन मुख्य शीर्षकों के तहत समझा जा सकता है:

राम मंदिर दान चोरी पर दुख और 'सनातन संरक्षण बोर्ड' का सुझाव

शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार और दान राशि के दुरुपयोग को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई और अगाध श्रद्धा के साथ मंदिरों में दान करते हैं, इसलिए उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने देश के मंदिरों के संचालन और संरक्षण हेतु एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण बोर्ड’ या विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग की, ताकि सरकारी नियंत्रण से इतर मंदिरों की व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।

सरकारी अधिकारियों की कार्यशैली और प्रशासनिक समझ पर सवाल

मंदिरों के प्रबंधन पर बात करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को सनातन धर्म के विधि-विधान, पूजा-पद्धति, धार्मिक नैतिकता और आध्यात्मिक व्यवस्थाओं की पर्याप्त समझ नहीं होती है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति जिस क्षेत्र का विशेषज्ञ होता है, वही उस कार्य को बेहतर ढंग से संभाल सकता है। इसलिए धार्मिक स्थलों का प्रबंधन प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय धर्मशास्त्रों के ज्ञाताओं, अनुभवी संतों और विषय के विशेषज्ञों को ही सौंपा जाना चाहिए ताकि व्यवस्थाओं की पवित्रता और मर्यादा बनी रहे।

धर्मांतरण और 'लव जिहाद' को रोकने के लिए कड़े कानून की मांग

धर्मांतरण और 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि किसी भी देश में 'संख्या बल' का बहुत बड़ा महत्व होता है, क्योंकि जिसकी संख्या अधिक होगी, वही देश पर शासन करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत देश में इन गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, जिस पर सरकार और समाज उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं जितना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को तत्काल रोकने के लिए कठोरतम कानून बनाकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, जबकि संत समाज इस विषय में जनजागरण का कार्य लगातार कर रहा है।

शिवसेना UBT में बगावत: 6 सांसद शिंदे गुट में जाने की तैयारी

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मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा उलटफेर होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे उद्धव ठाकरे को तगड़ा झटका लग सकता है। सूबे के कैबिनेट मंत्री और शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद सोमवार को पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं। अगर यह दावा सच साबित होता है, तो लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से सीधे बढ़कर 13 हो जाएगी, जो उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ी राजनीतिक चोट होगी।

प्रताप सरनाईक ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि ये छह सांसद सोमवार दोपहर तीन बजे आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट का दामन थाम लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इन सांसदों ने पहले ही लोकसभा अध्यक्ष को इस संबंध में पत्र सौंप दिया है। सरनाईक ने इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया और कहा कि शिवसेना को मजबूत करने का यह अभियान साल के 365 दिन चलता रहता है। उन्होंने तंज कसते हुए संजय राउत का शुक्रिया भी अदा किया और कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मानने वाले नेता अब शिंदे जी के साथ आ रहे हैं।

इन सांसदों के पाला बदलने की है चर्चा

जिन छह सांसदों के शिंदे गुट में जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टीकर, परभणी से संजय जाधव, शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दिना पाटिल और धाराशिव से ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। इन अटकलों को हवा तब मिली जब ये सभी सांसद हाल ही में हुई शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक से नदारद रहे थे, जिसके बाद से ही उनके पाला बदलने के कयास लगाए जा रहे थे।

नेताओं की प्रतिक्रिया और उद्धव ठाकरे का अगला कदम

इस पूरे सियासी घमासान पर दोनों तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उद्धव गुट के विधायक महेश सावंत ने इस पर बेरुखी दिखाते हुए कहा कि 'जाने वाले चले गए', वहीं शिंदे गुट की एमएलसी डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि आने वाले नेता बागी नहीं बल्कि सच्चे शिवसैनिक हैं और एकनाथ शिंदे उनका स्वागत कर रहे हैं। दूसरी ओर, इस बड़े संकट को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने जमीन पर उतरने का फैसला किया है। वह 27 जून से महाराष्ट्र के उन सभी इलाकों का तूफानी दौरा करेंगे जहां के सांसदों के टूटने की खबर है, ताकि संगठन को बिखरने से बचाया जा सके और कार्यकर्ताओं का हौसला बरकरार रहे।

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