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नकली शराब मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध और जहरीली नकली शराब के काले कारोबार के खिलाफ जिला पुलिस प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को और अधिक कड़ा कर दिया है। रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह ने नकली शराब के इस संगठित गिरोह के मुख्य व फरार आरोपी विनय सिंह ठाकुर की धरपकड़ तेज करने के लिए उसके ऊपर ₹10,000 के नगद पुरस्कार (इनाम) की आधिकारिक घोषणा की है। पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति इस शातिर आरोपी के ठिकाने के बारे में सटीक जानकारी देगा या उसकी गिरफ्तारी में पुलिस की मदद करेगा, उस जागरूक नागरिक का नाम और पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी।

8 जून को हुआ था अवैध शराब बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश

उल्लेखनीय है कि इसी महीने 8 जून 2026 की रात को रायगढ़ जिला पुलिस और आबकारी विभाग (Excise Department) की एक संयुक्त विशेष टीम ने कोतरारोड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम धनागर में चल रहे एक अवैध मिनी शराब कारखाने पर अचानक छापा मारकर इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।

इस बड़ी छापेमारी के दौरान मौके से लगभग 240 लीटर तैयार नकली शराब, स्प्रिट से भरे बड़े ड्रम, नामी ब्रांड्स के फर्जी लेबल, हूबहू दिखने वाले नकली होलोग्राम, ढक्कन और शराब की री-पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में मशीनें व सामग्री बरामद की गई थी। इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले मुख्य सरगना दुष्यंत उर्फ पप्पू पटेल को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। कड़ाई से की गई पूछताछ में पप्पू पटेल ने कबूला था कि वह अपने सगे भाई सुभाष पटेल और साथी विनय सिंह ठाकुर के साथ मिलकर इस अवैध धंधे को बड़े पैमाने पर चला रहा था।

चायपत्ती के पानी से असली जैसा रंग देने का घिनौना खेल, दूसरा आरोपी भी गिरफ्तार

मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस जांच टीम ने 10 जून को दूसरे सह-आरोपी सुभाष पटेल को उसके निजी फार्म हाउस से घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की तफ्तीश में एक बेहद चौंकाने वाला और सेहत से खिलवाड़ करने वाला सच सामने आया। पूछताछ में पता चला कि इस फार्म हाउस का इस्तेमाल अवैध शराब के बड़े भंडारण (गोदाम) के रूप में किया जाता था, जहां मूल शराब में अत्यधिक मात्रा में स्प्रिट और पानी मिलाकर उसकी क्वांटिटी (मात्रा) को दोगुना-तिगुना किया जाता था।

मिलावट के कारण जब शराब का रंग हल्का या फीका पड़ जाता था, तो आरोपी उसमें चायपत्ती को उबालकर उसका रंग मिला देते थे, जिससे वह हुबहू असली और ब्रांडेड शराब जैसी दिखने लगती थी। इसके बाद इस जानलेवा मिश्रण पर फर्जी लेबल और नकली होलोग्राम लगाकर बाजार में खपाया जाता था। पुलिस ने सुभाष की निशानदेही पर भारी मात्रा में गैस सिलेंडर, गैस चूल्हा, मिलावट के लिए इस्तेमाल होने वाले एल्यूमिनियम के बड़े बर्तन और हजारों खाली बोतलें जब्त की थीं।

फरार आरोपी विनय के घर पुलिस ने चस्पा किया कड़ा नोटिस

इस पूरे रैकेट का तीसरा और मुख्य सूत्रधार विनय सिंह ठाकुर छापेमारी के बाद से ही लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है और फरार चल रहा है। बीते 17 जून को जब कोतरारोड़ पुलिस की एक विशेष टीम उसके विकास नगर स्थित आलीशान निवास पर दबिश देने पहुंची, तो वहां ताला लटका मिला। आसपास के पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि आरोपी अपने पूरे परिवार के साथ कई दिनों से गायब है। इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके सूने मकान के मुख्य दरवाजे पर एक आधिकारिक नोटिस चस्पा कर दिया, जिसमें आरोपी को तीन दिनों के भीतर थाने में आत्मसमर्पण करने की अंतिम चेतावनी दी गई थी।

अब घर-जमीन की कुर्की करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू

निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी आरोपी के सामने न आने पर अब रायगढ़ पुलिस उसकी चल-अचल संपत्तियों को जब्त (कुर्क) करने की तैयारी में जुट गई है। इस प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत जिला राजस्व प्रशासन और पंजीयन विभाग (रजिस्ट्री ऑफिस) को पत्र भेजकर विनय सिंह ठाकुर के नाम पर दर्ज सभी जमीनों, मकानों और बैंक खातों का पूरा विवरण मांगा गया है। पूरी जानकारी हाथ में आते ही पुलिस कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर आरोपी की संपत्ति को राजसात (कुर्की) करने की कार्रवाई शुरू कर देगी।

एसएसपी की जनता से अपील: अपराधियों को पकड़वाने में करें सहयोग

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह ने कड़े लहजे में कहा कि रायगढ़ जिले की शांति व्यवस्था को भंग करने वाले और लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संगठित अपराधी या अवैध कारोबारी को कतई बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यदि किसी भी नागरिक को फरार आरोपी विनय सिंह ठाकुर की हलचल या उसके छिपने के ठिकाने के बारे में कोई भी पुख्ता इनपुट मिले, तो वे तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या सीधे कंट्रोल रूम को सूचित करें, सही सूचना पर तत्काल ₹10,000 का नगद इनाम दिया जाएगा।

शॉर्ट सर्किट से नगर निगम ट्रक में आग, भोपाल में अफरा-तफरी

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भोपाल। शहर के रायसेन रोड पर स्थित एलएनसीटी यूनिवर्सिटी (LNCT University) गेट के सामने से गुजर रहे नगर निगम के एक कचरा ट्रक में अचानक भीषण आग लग गई। शॉर्ट सर्किट की वजह से ट्रक के केबिन के निचले हिस्से में भड़की आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। वहां मौजूद कर्मचारियों और राहगीरों ने बोतलों में पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।

चलते ट्रक में भड़की आग और रेस्क्यू की कोशिश

बताया जा रहा है कि रविवार रात को नगर निगम का यह कंटेनरनुमा ट्रक आदमपुर कचरा खंती (कचरा डंपिंग साइट) से वापस लौट रहा था। जैसे ही ट्रक एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार के सामने पहुंचा, केबिन से अचानक तेज धुआं निकलने लगा। ड्राइवर ने तुरंत गाड़ी रोककर नीचे उतरकर देखा तो केबिन के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी। आग बुझाने के लिए वहां से गुजर रहे राहगीरों की मदद ली गई और एक अन्य गाड़ी में रखीं पानी की बड़ी बोतलों से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई, लेकिन आग लगातार बढ़ती गई।

दमकल की देरी और हुआ भारी नुकसान

स्थानीय लोगों के प्रयास विफल रहने के बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे केबिन को अपनी चपेट में ले लिया और ट्रक के आगे के दोनों टायर भी पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इस आपातकालीन स्थिति में एक बड़ी लापरवाही यह भी सामने आई कि हादसे की सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद तक दमकल (फायर ब्रिगेड) की गाड़ी मौके पर नहीं पहुंच सकी, जिससे ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया।

बिना फिटनेस, इंश्योरेंस और परमिट के दौड़ रहा था ट्रक

इस हादसे के बाद जब नगर निगम के इस दुर्घटनाग्रस्त ट्रक के दस्तावेजों की जांच की गई, तो बेहद चौंकाने वाली और गंभीर लापरवाही उजागर हुई। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार, इस सरकारी वाहन का न तो फिटनेस था, न इंश्योरेंस और न ही इसके पास वैध रोड परमिट था। रिकॉर्ड से पता चला है कि इस ट्रक का फिटनेस साल 2021 से और इंश्योरेंस साल 2019 से रिन्यू नहीं कराया गया था, जिससे सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है।

कैलाश विजयवर्गीय का बयान बना विवाद की वजह, विपक्ष ने साधा निशाना

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इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रविवार को शहर के राजनगर इलाके में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों में किसी भी वर्ग के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता है और प्रशासन सभी नागरिकों के कल्याण के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध है।

इस कार्यक्रम के मुख्य संदेश और घटनाक्रम को निम्नलिखित तीन प्रमुख बिंदुओं के तहत समझा जा सकता है:

बिना भेदभाव विकास कार्यों की प्रतिबद्धता

राजनगर बड़ा कुआं से धार रोड तक करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित सड़क का लोकार्पण करते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। उन्होंने एक टिप्पणी में कहा कि यदि कुछ लोग उन्हें 'काफिर' कहते हैं, तो उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि जिन सड़कों और सरकारी योजनाओं का लाभ वे उठा रहे हैं, वे भी इसी व्यवस्था द्वारा बिना किसी सामाजिक भेदभाव के उपलब्ध कराई गई हैं।

सरकारी योजनाओं का समान लाभ और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' ही शासन की मूल नीति है। लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी जैसी जनकल्यणकारी योजनाओं का फायदा समाज के हर तबके को समान रूप से मिल रहा है। जनता को संबोधित करते हुए कहा गया कि वोट देना या न देना जनता का अधिकार है, लेकिन जनप्रतिनिधि होने के नाते विकास कार्य करना उनका दायित्व है। यदि जनता समर्थन देती है तो काम और अधिक उत्साह से होता है, लेकिन समर्थन न मिलने पर भी विकास की गति नहीं रुकेगी।

विकास कार्यों की सौगात और प्रमाण पत्रों का वितरण

इस गरिमामयी कार्यक्रम में शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित कई अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कई नए कार्यों का भूमिपूजन किया गया। इसके साथ ही विभिन्न शासकीय कल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को मंच से प्रमाण पत्र और अधिकार पत्र भी वितरित किए गए।

समय से पहले बूढ़ा दिखने के पीछे हो सकते हैं ये स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी कारण

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सदाबहार जवां और खूबसूरत दिखना हम सबकी चाहत होती है। इस ख्वाहिश को हकीकत में बदलने के लिए लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स, क्रीम और न जाने क्या-क्या उपाय करते हैं। इसके बावजूद, कई बार मनमुताबिक परिणाम नहीं मिल पाते। असल में, हमारी रोजमर्रा की कुछ ऐसी गंभीर गलतियां होती हैं, जो त्वचा की प्राकृतिक चमक को अंदर से खत्म कर देती हैं। इन आदतों की वजह से शरीर में 'कोलेजन' (Collagen) का उत्पादन तेजी से घटने लगता है, जिसके परिणामस्वरूप उम्र से पहले ही चेहरे पर झुर्रियां, महीन रेखाएं और बुढ़ापे के लक्षण साफ दिखाई देने लगते हैं।

त्वचा, बाल और हड्डियों का आधार है 'कोलेजन'

कोलेजन एक विशेष प्रकार का प्रोटीन है, जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है। यह हमारी त्वचा में लचीलापन और कसाव बनाए रखने के साथ-साथ बालों की मजबूती और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होता है। जब शरीर में इसका स्तर गिरने लगता है, तो त्वचा अपनी प्राकृतिक रंगत खोने लगती है और ढीली पड़ जाती है। आइए जानते हैं उन 5 आदतों के बारे में जो कोलेजन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं:

1. अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन (रिफाइंड शुगर)

यदि आप मीठे पकवानों, चॉकलेट या कोल्ड ड्रिंक्स के शौकीन हैं, तो सावधान हो जाएं। जरूरत से ज्यादा चीनी खाने से शरीर में 'ग्लाइकेशन' (Glycation) नामक एक हानिकारक रासायनिक प्रक्रिया तेज हो जाती है। यह प्रक्रिया कोलेजन प्रोटींस को कड़ा और बेजान बना देती है, जिससे नए कोलेजन का बनना बंद हो जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने से चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां नजर आने लगती हैं। मीठे की लत से बचने के लिए रिफाइंड चीनी की जगह सीमित मात्रा में शहद या देसी गुड़ का इस्तेमाल करना एक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है।

2. धूम्रपान (सिगरेट पीने की लत)

यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो यह आपकी त्वचा के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है। सिगरेट में पाया जाने वाला हानिकारक तत्व 'निकोटिन' शरीर की रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है, जिससे त्वचा की परतों तक ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) ठीक से नहीं हो पाता। खून का बहाव रुकने से त्वचा की कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व (न्यूट्रिएंट्स) नहीं पहुंच पाते, जिससे त्वचा समय से पहले बूढ़ी और बेजान दिखने लगती है।

3. सनस्क्रीन का इस्तेमाल न करना (यूवी किरणों का हमला)

मौसम चाहे कड़कती धूप का हो, बरसात का हो या फिर सर्दियों का— घर से बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले चेहरे और गर्दन पर सनस्क्रीन लगाना बेहद अनिवार्य है। जब आप बिना सनस्क्रीन के धूप में निकलते हैं, तो सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणें त्वचा की गहराई में जाकर कोलेजन के स्ट्रक्चर को तोड़ देती हैं। इसके कारण चेहरे पर फाइन लाइन्स, झाइयां और काले धब्बे (पिगमेंटेशन) तेजी से उभरने लगते हैं।

4. अधूरी नींद और खराब स्लीपिंग पैटर्न

क्या आप भी रात में देर तक जागते हैं और अपनी नींद से समझौता करते हैं? पर्याप्त नींद न लेना भी शरीर में कोलेजन घटने का एक मुख्य कारण है। जब हम गहरी और सुकून की नींद सोते हैं, तब हमारा शरीर 'सेलुलर रिपेयर मोड' में जाता है, यानी त्वचा खुद की कमियों को ठीक करती है और नया कोलेजन बनाती है। नींद पूरी न होने से शरीर को खुद को रिपेयर करने का समय नहीं मिलता, जिससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स और चेहरे पर थकान व ढीलापन साफ नजर आने लगता है।

5. मानसिक तनाव (क्रोनिक स्ट्रेस)

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कभी-कभार तनाव होना सामान्य है, लेकिन जब आप लगातार मानसिक तनाव या अवसाद से घिरे रहते हैं, तो शरीर में 'कोर्टिसोल' (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर कोलेजन को नष्ट करने का काम करता है। अत्यधिक मानसिक तनाव की वजह से त्वचा अपनी स्वाभाविक चमक खो देती है, जिससे चेहरा पूरी तरह डल और अस्वस्थ दिखाई देने लगता है।

उज्जैन में 814 फ्लैट का बड़ा प्रोजेक्ट, PM आवास योजना के तहत EWS-LIG-MIG को मिलेगा लाभ

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उज्जैन। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत बाबा महाकाल की नगरी में एक बड़ी आवासीय परियोजना की तैयारी की जा रही है। श्री महाकालेश्वर मंदिर से महज दो किलोमीटर दूर नीलगंगा स्थित कवेलू कारखाना परिसर में 814 आधुनिक फ्लैटों का निर्माण प्रस्तावित है। खास बात यह है कि केंद्र सरकार से अभी इस परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन मंदिर के नजदीक होने के कारण लोगों में इसे लेकर इतना उत्साह है कि अब तक 2 हजार से अधिक आवेदन आ चुके हैं।

नगर निगम द्वारा करीब 260 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की जाने वाली इस बहुमंजिला आवासीय परियोजना को मेयर इन काउंसिल (MIC) की मंजूरी मिल चुकी है। इस पूरे प्रोजेक्ट का विवरण और इसकी मुख्य चुनौतियां निम्नलिखित हैं:

चार हेक्टेयर में आधुनिक टाउनशिप और कमर्शियल हब

इस परियोजना को लगभग चार हेक्टेयर क्षेत्र में अलग-अलग ब्लॉकों में बहुमंजिला इमारतों के रूप में विकसित किया जाएगा। परिसर में चौड़ी सड़कें और सार्वजनिक सुविधाओं समेत एक बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, जिसमें मंदिर और तालाब क्षेत्र को सुरक्षित व अलग रखा जाएगा। इसके अलावा, प्रोजेक्ट को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए निगम ने यहां 5 से 8 हजार वर्गफीट के 12 बड़े व्यावसायिक भूखंड (कमर्शियल प्लॉट) प्रस्तावित किए हैं, जिनका उपयोग होटल या रेस्टोरेंट के लिए होगा। साथ ही 20 दुकानों का निर्माण भी किया जाएगा ताकि इनसे होने वाली आय का उपयोग प्रोजेक्ट के प्रबंधन में हो सके।

विभिन्न वर्गों के लिए फ्लैट्स की श्रेणियां और कीमतें

टाउनशिप में समाज के हर वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीन अलग-अलग श्रेणियों में फ्लैट बनाए जाएंगे:

  • ईडब्ल्यूएस (EWS) – 206 फ्लैट: यह 1 बीएचके फ्लैट होंगे, जिनका साइज 375 वर्गफीट और अनुमानित कीमत 10 से 12 लाख रुपए होगी। इसमें पात्र परिवारों को सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलेगा।

  • एलआईजी (LIG) – 304 फ्लैट: यह 2.5 बीएचके फ्लैट होंगे, जिनका साइज 950 वर्गफीट और अनुमानित कीमत 25 से 30 लाख रुपए होगी। इस श्रेणी में बैंक लोन पर निर्धारित छूट मिलने की संभावना है।

  • एमआईजी (MIG) – 304 फ्लैट: यह 3 बीएचके फ्लैट होंगे, जिनका साइज 1200 वर्गफीट और अनुमानित कीमत 45 से 50 लाख रुपए होगी। इसमें भी नियमानुसार बैंक लोन पर रियायत का प्रावधान संभावित है।

समय पर निर्माण और वित्तीय प्रबंधन की बड़ी चुनौती

निगम के लिए यह नई योजना जितनी बड़ी सौगात है, उतनी ही बड़ी चुनौती पुराने अधूरे प्रोजेक्ट्स से सीख लेकर इसे समय पर पूरा करने की होगी। कानीपुरा में ईडब्ल्यूएस ब्लॉक बनने के बाद भी एलआईजी और एमआईजी प्रोजेक्ट्स सालों से लटके हुए हैं, जबकि मंछामन में 288 फ्लैटों का काम आठ साल बाद भी अधूरा है। ऐसे में नीलगंगा परियोजना को सफल बनाने के लिए मजबूत वित्तीय योजना और तय समय सीमा में काम पूरा करना सबसे अहम होगा, जिसमें कमर्शियल भूखंडों से होने वाली कमाई मददगार साबित हो सकती है।

थकान और कमजोरी से राहत दिला सकते हैं एनीमिया से बचाव के ये तरीके

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मानव शरीर के रक्त (खून) में हीमोग्लोबिन या लाल रक्त कोशिकाओं (रेड ब्लड सेल्स) के स्तर में आने वाली भारी गिरावट को चिकित्सा विज्ञान में 'एनीमिया' कहा जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब या तो हमारा शरीर पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाता, या फिर किसी चोट, दुर्घटना या अन्य कारणों से अत्यधिक मात्रा में खून बह जाता है। एनीमिया को एक गंभीर बीमारी माना जाता है, जो विशेष रूप से महिलाओं को अपनी चपेट में लेती है। महिलाओं में इसकी एक सबसे बड़ी और मुख्य वजह हर महीने होने वाला मासिक धर्म (पीरियड्स) है।

चिकित्सकीय मानकों के अनुसार, यदि पुरुषों के प्रति 100 मिलीलीटर रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 13.5 ग्राम से कम हो और महिलाओं में यह स्तर 12 ग्राम से कम पाया जाए, तो उसे एनीमिया की श्रेणी में रखा जाता है। कई बार एनीमिया के शुरुआती लक्षण इतने धीमे और हल्के होते हैं कि लोग उन्हें सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, खून की एक सामान्य जांच, जिसे सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) टेस्ट कहा जाता है, के जरिए इस बीमारी का बेहद आसानी से और सटीक पता लगाया जा सकता है।

शरीर में एनीमिया होने के मुख्य कारण

  • आयरन की भारी कमी: एनीमिया होने की सबसे बड़ी और प्रमुख वजह शरीर में आयरन (लोह तत्व) का कम होना है। एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में औसतन 3 से 5 ग्राम आयरन होना आवश्यक है। जब भोजन में आयरन की मात्रा कम हो जाती है, तो अस्थि मज्जा (बोन मैरो) पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाती, जिससे खून की कमी हो जाती है।

  • अत्यधिक रक्तस्राव: किसी दुर्घटना, ऑपरेशन, प्रसव (डिलीवरी) या पेट में अल्सर जैसी बीमारियों के कारण शरीर से अचानक या धीरे-धीरे अधिक खून बह जाना भी एनीमिया का कारण बनता है।

  • कैल्शियम की अधिकता: शरीर में जरूरत से ज्यादा कैल्शियम का होना भी एनीमिया को बुलावा दे सकता है। यदि आप कैल्शियम से भरपूर चीजों या सप्लीमेंट्स का अत्यधिक मात्रा में सेवन करते हैं, तो यह शरीर में आयरन के अवशोषण (एब्जॉर्प्शन) को रोक देता है, जो आगे चलकर खतरनाक साबित होता है।

एनीमिया से बचाव और खून बढ़ाने के अचूक उपाय

एनीमिया जैसी बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित रहने के लिए आपको अपने खान-पान और दैनिक जीवनशैली में कुछ बेहद जरूरी और सकारात्मक सुधार करने होंगे:

  • आयरन से भरपूर डाइट: अपने दैनिक भोजन में उन चीजों को प्राथमिकता दें जो शरीर में प्राकृतिक रूप से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाती हैं। इसके लिए चुकंदर, गाजर, टमाटर, पालक, बथुआ, मेथी और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों का प्रचुर मात्रा में सेवन करें।

  • गुड़ और भीगे चने का सेवन: हरी सब्जियों के अलावा काले चने और देसी गुड़ को आयरन का पावरहाउस माना जाता है। रोजाना सुबह खाली पेट रात के भीगे हुए काले चने गुड़ के साथ चबा-चबाकर खाने से शरीर में खून की कमी बहुत तेजी से दूर होती है।

  • लोहे के बर्तनों का प्रयोग: रसोई में भोजन या हरी सब्जियां पकाने के लिए लोहे की कड़ाही या बर्तनों का इस्तेमाल करना शुरू करें। इससे भोजन में आयरन के कण प्राकृतिक रूप से मिल जाते हैं, जो शरीर में खून की कमी को पूरा करने का सबसे पुराना और वैज्ञानिक तरीका है।

  • चिकित्सकीय परामर्श: यदि शरीर में आयरन और हीमोग्लोबिन का स्तर बहुत ज्यादा गिर गया है, तो बिना देर किए डॉक्टर की सलाह लें और उनके परामर्श के अनुसार नियमित रूप से आयरन की गोलियों (सप्लीमेंट्स) का कोर्स पूरा करें।

इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

यदि आपका शरीर नीचे दिए गए इन संकेतों को दर्शा रहा है, तो समझ जाएं कि आपके शरीर में खून की कमी हो चुकी है:

  • थोड़ा सा भी काम करने या पैदल चलने पर बहुत जल्दी थकान हो जाना।

  • पर्याप्त नींद और आराम के बाद भी दिनभर शरीर में कमजोरी और सुस्ती महसूस होना।

  • चेहरे और शरीर की त्वचा का रंग स्वाभाविक चमक खोकर पीला या सफेद पड़ जाना।

  • सीढ़ियां चढ़ते समय या अचानक खड़े होने पर आंखों के आगे अंधेरा छाना और चक्कर आना।

  • शारीरिक परिश्रम करने पर सीने में भारीपन, धड़कन तेज होना और बार-बार सिरदर्द होना।

  • मौसम सामान्य होने पर भी हाथ की हथेलियों और पैर के तलवों का अचानक ठंडा पड़ जाना।

हनुमान सिंह राठौड़ ने संभाली RBSE की कमान, बोले- NEP लागू करना ही मुख्य लक्ष्य

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अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के नवनियुक्त अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने आधिकारिक तौर पर अपना कार्यभार संभाल लिया है। सोमवार को वह अपने परिजनों के साथ बोर्ड कार्यालय पहुंचे और विधिवत रूप से पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने में बोर्ड की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। उन्होंने भरोसा जताया कि नई नीति के लागू होने के बाद बोर्ड के परीक्षा परिणामों में संख्यात्मक और गुणात्मक दोनों ही स्तरों पर बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करना मुख्य एजेंडा

नवनियुक्त चेयरमैन हनुमान सिंह राठौड़ ने बोर्ड की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू करना उनका सबसे पहला और मूल लक्ष्य है। इसके लिए केवल पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करना ही काफी नहीं है, बल्कि शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देना और इस नई व्यवस्था के प्रति सभी का मानस तैयार करना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि अब परीक्षाओं के लिए तैयार होने वाले प्रश्न पत्रों का प्रारूप भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मापदंडों के अनुसार ही तैयार किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर देश के अन्य शिक्षा बोर्ड्स के मुकाबले कहीं अधिक बेहतर और प्रतिस्पर्धी बन सके।

अनुभवी स्टाफ के साथ टीमवर्क पर रहेगा जोर

बोर्ड के आंतरिक कामकाज और व्यवस्थाओं पर बात करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पास एक बेहद अनुभवी और कार्यकुशल अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम है। चूंकि यहां स्टाफ के बार-बार तबादले नहीं होते हैं, इसलिए हर कर्मचारी बोर्ड की कार्यप्रणाली और बारीकियों से पूरी तरह वाकिफ है। उन्होंने साफ किया कि वह सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर एक टीम की तरह काम करेंगे, जिससे आपसी मतभेद या विवाद की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी और सभी के सामंजस्य से प्रशासनिक कार्यों को गति दी जाएगी।

विद्यार्थियों की सुविधाओं को बनाएंगे और बेहतर

विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि बोर्ड का इरादा पुरानी व्यवस्थाओं को पूरी तरह बदलने का नहीं, बल्कि जो बेहतर चल रहा है उसे और उत्कृष्ट बनाने का है। वर्तमान में छात्रों को अपने अंकपत्र या अन्य सामान्य दस्तावेज लेने के लिए मुख्य मुख्यालय तक दौड़ने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि जिला और संभाग स्तर पर यह सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। इसके बावजूद यदि किसी विशेष कार्य के लिए छात्रों को बोर्ड कार्यालय आना पड़ता है, तो उनके लिए सुबह रजिस्ट्रेशन और शाम तक दस्तावेज देने की त्वरित व्यवस्था को और सुचारू किया जाएगा। साथ ही, कार्यालय परिसर में उनके बैठने के लिए उचित और आरामदायक प्रबंध किए जाएंगे।

लखनऊ: कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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लखनऊ। राजधानी के अलीगंज इलाके में स्थित सेक्टर डी में सोमवार दोपहर को एक निजी कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय निवासियों की सूचना पर दमकल विभाग की तीन गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य के साथ आग बुझाने की कोशिशों में जुट गईं।

अंदर लोगों के फंसे होने की आशंका और अनिश्चितता

हादसे के वक्त कोचिंग सेंटर में गतिविधियां चल रही थीं। आसपास के लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ छात्र या स्टाफ सदस्य अभी भी इमारत के अंदर फंसे हो सकते हैं। हालांकि, आग लगने के सटीक कारणों और अंदर फंसे लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर अभी तक प्रशासन या दमकल विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

मुख्यमंत्री का त्वरित संज्ञान और निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगंज में हुई इस अग्नि-दुर्घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को पूरी मुस्तैदी के साथ मौके पर डटने और राहत कार्यों की खुद निगरानी करने के लिए कहा है।

राहत, बचाव और घायलों के उपचार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी अलर्ट मोड पर आ गई हैं। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य (रेस्क्यू ऑपरेशन) में तेजी लाएं। साथ ही, धुएं या आग की चपेट में आने वाले किसी भी व्यक्ति को तुरंत बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाने और उन्हें बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

डिजिटल दुनिया का साइड इफेक्ट: मोबाइल की अधिकता से स्वास्थ्य पर खतरा

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आधुनिक दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा और लगातार इस्तेमाल हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। चिकित्सा विज्ञान और नवीनतम शोधों के अनुसार, घंटों स्मार्टफोन में डूबे रहने से न केवल आंखों पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि पीठ दर्द, गर्दन व कंधों में जकड़न, स्पॉन्डिलाइटिस और रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) से जुड़ी गंभीर बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। चिकित्सा जगत में इस स्थिति को 'टेक नेक' (Tech Neck) या 'स्मार्टफोन सिंड्रोम' (Smartphone Syndrome) का नाम दिया गया है।

लगातार झुककर फोन देखने से रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है एक्स्ट्रा वजन

जब हम मोबाइल का उपयोग करते समय लगातार अपनी गर्दन को नीचे की ओर झुकाए रखते हैं, तो हमारी रीढ़ की हड्डी और गर्दन के जोड़ों पर उसकी प्राकृतिक क्षमता से कई गुना अधिक अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस गलत पोस्चर (मुद्रा) के कारण गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में गंभीर दर्द और धीरे-धीरे हड्डियों में कमजोरी आने लगती है।

स्पॉन्डिलाइटिस रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक बेहद दर्दनाक समस्या है, जिसमें कशेरुकाओं (Vertebrae) के जोड़ों में सूजन आ जाती है। लगातार और गलत तरीके से बैठकर या लेटकर मोबाइल का इस्तेमाल करने से यह बीमारी कम उम्र में ही लोगों को अपना शिकार बना रही है।

युवाओं और किशोरों में तेजी से बढ़ रहा है खतरा

यह समस्या सबसे ज्यादा युवाओं और किशोर वर्ग में देखी जा रही है। लोग लगातार कई घंटों तक स्क्रीन पर ऑनलाइन गेम खेलते हैं, रील्स या वीडियो देखते हैं और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। इस दौरान वे अपने बैठने या लेटने के तरीके (पोस्चर) पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते, जिससे पीठ और कमर की मांसपेशियों पर लगातार दबाव बना रहता है। शुरुआत में मामूली लगने वाला यह खिंचाव धीरे-धीरे क्रोनिक (गंभीर) कमर और गर्दन के दर्द में तब्दील हो जाता है, जिसे ठीक करने के लिए बाद में लंबे इलाज की जरूरत पड़ती है।

आंखों को सुखा रही है स्क्रीन की नीली रोशनी (ब्लू लाइट)

स्मार्टफोन के बेहिसाब इस्तेमाल का सबसे पहला और सीधा हमला हमारी आंखों पर होता है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली हाई-एनर्जी विजिबल यानी नीली रोशनी (ब्लू लाइट) आंखों की नाजुक रेटिना को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती है।

लंबे समय तक बिना पलक झपकाए स्क्रीन की तरफ देखते रहने से आंखों में सूखापन (ड्राई आइज), लगातार जलन होना, नजर का धुंधला हो जाना और माइग्रेन या सिरदर्द जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं।

डिजिटल स्क्रीन से मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा आघात

मोबाइल का अत्यधिक उपयोग केवल हमारे शरीर को ही बीमार नहीं बना रहा, बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी खोखला कर रहा है। दिनभर फोन पर आने वाले लगातार नोटिफिकेशन्स, सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी से खुद की तुलना करना और ऑनलाइन गेमिंग की लत युवाओं में मानसिक तनाव, गंभीर चिंता (एंजायटी) और अनिद्रा (इंसोमनिया) की वजह बन रही है। रात में देर तक फोन चलाने से नींद का चक्र प्रभावित होता है, जिससे शरीर की मांसपेशियों को रिकवर होने का समय नहीं मिल पाता और व्यक्ति मानसिक रूप से हमेशा थका हुआ महसूस करता है।

विशेषज्ञों की सलाह: इन 4 आदतों को बदलकर खुद को रखें सुरक्षित

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और फिजियोथेरेपिस्ट्स ने इस डिजिटल बीमारी से बचने के लिए कुछ बेहद जरूरी और व्यावहारिक उपाय सुझाए हैं:

  • आई-लेवल पर रखें स्क्रीन: मोबाइल का इस्तेमाल करते समय हमेशा फोन को अपनी आंखों की ऊंचाई (आई-लेवल) पर रखें, ताकि गर्दन को आगे की तरफ ज्यादा न झुकाना पड़े।

  • 20-20-20 का नियम अपनाएं: लंबे समय तक लगातार स्क्रीन न देखें। हर 20 से 30 मिनट के बाद मोबाइल से नजरें हटाएं, थोड़ा टहलें और गर्दन व पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करें।

  • पोस्चर सुधारें: बैठते समय हमेशा अपनी पीठ को सीधा और कंधों को रिलैक्स (आरामदायक मुद्रा में) रखें। बिस्तर पर लेटकर या पेट के बल होकर फोन चलाने से पूरी तरह परहेज करें।

  • ब्लू लाइट फिल्टर्स का करें प्रयोग: आंखों को सुरक्षित रखने के लिए अपने स्मार्टफोन में 'आई कम्फर्ट' मोड या ब्लू लाइट फिल्टर ऐप्स का इस्तेमाल करें, खासकर सूर्यास्त के बाद या रात के समय।

कटहल: स्वाद ही नहीं, सेहत का भी खजाना है यह अनोखा फल

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कटहल (आर्टोकार्पस हेटरोफिलस) एक ऐसा अनूठा और बहुमुखी फल है, जिसने अपनी विशिष्ट बनावट, लाजवाब स्वाद और अनगिनत औषधीय गुणों के कारण दुनिया भर में एक खास लोकप्रियता हासिल की है। मूल रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया का मूल निवासी माना जाने वाला यह फल आज भारत, बांग्लादेश, थाईलैंड और श्रीलंका जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। आकार में यह दुनिया के सबसे बड़े फलों में गिना जाता है, जिसका वजन औसतन 5 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है। इसके कांटेदार बाहरी आवरण के भीतर पीले रंग के रसदार और गूदेदार बल्ब (कोश) छिपे होते हैं, जो इसे एक अनूठा रूप और मनमोहक सुगंध प्रदान करते हैं।

कच्चा या पका: दो अलग रूपों में पोषण का खजाना

कटहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका सेवन दो बिल्कुल अलग-अलग रूपों और स्वादों में किया जाता है:

  • कच्चा (हरा) कटहल: इसे आमतौर पर रसोई में एक बेहतरीन सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी समृद्ध बनावट के कारण लोग इसकी स्वादिष्ट करी, सूखी सब्जी या अचार बनाना पसंद करते हैं। वजन नियंत्रित करने या घटाने के इच्छुक लोगों के लिए कच्चा कटहल एक वरदान है, क्योंकि पके हुए फल की तुलना में इसमें प्राकृतिक शर्करा (चीनी) की मात्रा न के बराबर होती है, जिससे यह एक बेहतरीन लो-कैलोरी और हाई-फाइबर डाइट विकल्प बन जाता है।

  • पका हुआ कटहल: पकने के बाद इसका गूदा बेहद मीठा, रसीला और स्वादिष्ट हो जाता है। इसे सीधे तौर पर एक मुख्य फल के रूप में खाया जाता है या फिर इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की पारंपरिक मिठाइयों, पुडिंग और शेक्स बनाने में किया जाता है।

दोनों ही रूप अपने भीतर अनूठे विटामिन्स, मिनरल्स, डाइटरी फाइबर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स समेटे हुए हैं, जिन्हें दैनिक आहार में शामिल करना बेहद फायदेमंद होता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) को देता है गजब की मजबूती

कटहल विटामिन-सी का एक अत्यंत समृद्ध और प्राकृतिक स्रोत है। विटामिन-सी हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सबसे मुख्य भूमिका निभाता है। यह शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं (वाइट ब्लड सेल्स) के उत्पादन और उनकी कार्यप्रणाली को सक्रिय करता है, जिससे शरीर बाहरी संक्रमणों से लड़ने में सक्षम बनता है। सर्दियों के मौसम में या मौसम बदलने के दौरान होने वाले सामान्य सर्दी-जुकाम, खांसी, गले की खराश और फ्लू जैसे वायरल संक्रमणों से बचाव करने में कटहल का नियमित सेवन बेहद मददगार साबित होता है।

पाचन क्रिया को दुरुस्त और आंतों को रखता है स्वस्थ

आधुनिक जीवनशैली में पाचन संबंधी समस्याएं बेहद आम हैं। कटहल में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला डाइटरी फाइबर (रेशा) हमारी पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है। यह मल को भारी बनाकर आंतों की सफाई करता है, जिससे पुरानी से पुरानी कब्ज (कॉन्स्टिपेशन) और गैस की समस्या से स्थायी राहत मिलती है। इसके अलावा, यह पेट में मौजूद स्वस्थ आंत माइक्रोबायोम (गुड बैक्टीरिया) के विकास में सहायक है, जो भोजन के सही पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण के लिए बेहद जरूरी हैं।

हृदय स्वास्थ्य और रक्तचाप को रखता है नियंत्रित

दिल की सेहत के लिए भी कटहल को एक सुरक्षा कवच माना जा सकता है। इसमें पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है। पोटेशियम हमारे शरीर में सोडियम (नमक) के दुष्प्रभावों को कम करके रक्त वाहिकाओं को आराम पहुंचाता है, जिससे उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) को नियंत्रित रखने में बड़ी मदद मिलती है। ब्लड प्रेशर संतुलित रहने से दिल का दौरा (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

डाइट में जरूर शामिल करें यह सर्वगुण संपन्न 'सुपरफ्रूट'

अपने इन्हीं जादुई और सेहतमंद गुणों के कारण कटहल को वैश्विक स्तर पर 'सुपरफ्रूट' का दर्जा दिया गया है। यह न केवल हमारी जीभ को एक बेहतरीन स्वाद देता है, बल्कि एक सर्वगुण संपन्न खाद्य पदार्थ के रूप में हमारे समग्र स्वास्थ्य की देखभाल भी करता है। चाहे आप इसे दोपहर के भोजन में मसालेदार करी के रूप में खाएं, या फिर शाम को पके हुए फल के मीठे स्वाद का आनंद लें— कटहल को अपनी जीवनशैली और आहार का हिस्सा बनाना आपकी सेहत के लिए एक बेहतरीन और दूरगामी फैसला साबित होगा।

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