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कामाख्या मंदिर में चार दिवसीय अंबुवाची मेला, देश-विदेश से आएंगे श्रद्धालु

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नई दिल्ली। पूर्वी भारत का प्रसिद्ध और आस्था का बड़ा केंद्र 'अंबुवाची मेला' सोमवार से असम के कामाख्या मंदिर में शुरू होने जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस पावन मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों, साधु-संतों और पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। नारी शक्ति और प्रजनन क्षमता के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला यह मेला देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र का उत्सव है, जिन्हें दैवीय स्त्री रचनात्मक ऊर्जा का साक्षात् स्वरूप माना जाता है। भारत में शक्ति उपासना और तांत्रिक परंपराओं से जुड़े लोगों के लिए इस आयोजन का विशेष महत्व है।

तीन दिनों तक बंद रहेंगे गर्भगृह के कपाट

धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत सोमवार रात 'प्रवृत्ति समारोह' के साथ होगी, जो इस पावन और विशेष काल की शुरुआत का प्रतीक है। अनुष्ठान शुरू होने के बाद कामाख्या मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इस अवधि के दौरान मंदिर के भीतर सभी सामान्य धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं, जो देवी के मासिक धर्म के दौरान पालन किए जाने वाले एकांतवास को दर्शाता है। इस दौरान किसी भी भक्त को गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है।

मंदिर खुलने की तिथि और विशेष महाप्रसाद का महत्व

नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। तीन दिनों के एकांतवास के बाद, 26 जून की सुबह 'निवृत्ति अनुष्ठान' और पारंपरिक नित्य पूजा पूरी होने के साथ ही मंदिर के कपाट दोबारा आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद ले सकेंगे। मंदिर के कपाट खुलने पर भक्तों को बेहद पवित्र माने जाने वाले 'अंगोदक' (पवित्र जल) और 'अंगवस्त्र' (रक्तवर्ण वस्त्र) का प्रसाद वितरित किया जाता है, जिसे पाने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।

प्रशासन की व्यापक तैयारियां और सुरक्षा इंतजाम

इस बड़े आध्यात्मिक समागम को देखते हुए असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने व्यापक और पुख्ता तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुवाहाटी आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, ठहरने (आवास) और भोजन वितरण के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि मेले का संचालन सुचारू रूप से हो सके। हर साल आयोजित होने वाला यह अंबुवाची मेला पूरे गुवाहाटी शहर को एक जीवंत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र में बदल देता है।

स्वदेशी हथियारों पर खाड़ी देशों का भरोसा बढ़ा, UAE ने दिखाई दिलचस्पी

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नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई ने भारत की बेहद अचूक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आधुनिक 'आकाशतीर' (Akashteer) एयर डिफेंस नेटवर्क को खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच इस रक्षा सौदे को लेकर बातचीत जारी है, जो यदि सफल होती है तो वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख को एक नई ऊंचाई मिलेगी।

ब्रह्मोस और आकाशतीर प्रणालियों की मांग

यूएई ने भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' को अपनी सेना में शामिल करने की इच्छा जताई है। यदि यह डील फाइनल होती है, तो फिलीपींस, आर्मेनिया और मिस्र के बाद यूएई ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला चौथा विदेशी देश बन जाएगा। इसके साथ ही, यूएई ने भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित 'आकाशतीर' एयर डिफेंस कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में भी रुचि दिखाई है। यह प्रणाली हवाई खतरों की निगरानी और जवाबी कार्रवाई को पूरी तरह ऑटोमैटिक तरीके से संचालित करने में सक्षम है। चूँकि ब्रह्मोस एक संयुक्त परियोजना है, इसलिए इसके निर्यात के लिए रूस की मंजूरी जरूरी होगी, लेकिन रूस और यूएई के मधुर संबंधों को देखते हुए इसमें किसी बाधा की आशंका नहीं है।

खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और यूएई की रणनीति

भू-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हालिया मध्य-पूर्वी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यूएई अपनी सैन्य क्षमताओं को अभेद्य बनाना चाहता है। यूएई का विशेष ध्यान रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) की सुरक्षा को पुख्ता करने पर है, जो वैश्विक ऊर्जा और तेल आपूर्ति का एक मुख्य समुद्री मार्ग है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई अब किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं का दायरा बढ़ाना चाहता है ताकि उसे अधिक रणनीतिक स्वतंत्रता मिल सके। भारत के साथ इस साझेदारी से यूएई को खाड़ी क्षेत्र में अपना शक्ति संतुलन बनाए रखने में बड़ी मदद मिलेगी।

भारतीय रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल

यह संभावित रक्षा सौदा भारत के वैश्विक डिफेंस हब बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात 4 अरब डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपये) के सर्वकालिक रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है, जो कि वर्ष 2013-14 में महज 7.26 मिलियन डॉलर था। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ पिछले वर्ष हुए सीमा संघर्ष के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल के सफल व सटीक उपयोग ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसकी धाक और बढ़ा दी है। यही वजह है कि यूएई के अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और चिली जैसे कई अन्य देश भी इस मिसाइल को खरीदने की कतार में शामिल हैं।

नीट (यूजी) पुनः परीक्षा का जिला कलेक्टर संदेश नायक साहित प्रशासन एवम् पुलिस के अधिकारी दिन भर करते रहे मॉनिटरिंग

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जयपुर। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) की पुनः परीक्षा का आयोजन जयपुर जिले में पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। जिला प्रशासन और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के आपसी तालमेल के चलते परीक्षा के दौरान सभी केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम देखने को मिले।

अधिकारियों द्वारा परीक्षा केंद्रों का सघन निरीक्षण

परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिला कलेक्टर संदेश नायक और प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद मोर्चे पर रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल, शहीद अभय कुमार पारीक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सहित केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, 3, 4, पोद्दार स्कूल, माहेश्वरी पब्लिक स्कूल और आदर्श स्कूल सिंधी कॉलोनी जैसे प्रमुख केंद्रों की कड़ी निगरानी की गई। परीक्षा के नोडल प्रशासनिक अधिकारी और अतिरिक्त जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि कुल 15 परीक्षा केंद्रों का सघन निरीक्षण किया गया, जबकि 24 मोबाइल ड्यूटी मजिस्ट्रेट्स ने पुलिस, एनटीए और चिकित्सा शिक्षा टीम के साथ मिलकर लगातार पेट्रोलिंग की।

91.66 प्रतिशत दर्ज की गई अभ्यर्थियों की उपस्थिति

जयपुर जिले में इस परीक्षा के लिए कुल 37,128 अभ्यर्थी पंजीकृत (रजिस्टर्ड) थे। इनमें से 34,031 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होने के लिए केंद्रों पर उपस्थित रहे, जबकि 3,097 अभ्यर्थी अनुपस्थित पाए गए। इस प्रकार जयपुर जिले में परीक्षा का कुल उपस्थिति प्रतिशत 91.66 प्रतिशत दर्ज किया गया।

समयबद्ध आयोजन और परीक्षार्थियों के लिए बुनियादी सुविधाएं

सभी केंद्रों पर परीक्षा पूरी तरह तय समय पर शुरू हुई और समय पर ही संपन्न कराई गई। जिला प्रशासन द्वारा परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए परीक्षा केंद्रों के बाहर और आसपास सुरक्षा, सुचारू यातायात, पेयजल और निर्बाध विद्युत (बिजली) आपूर्ति जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से ही सुनिश्चित कर ली गई थीं, जिससे दूर-दराज से आए छात्रों और उनके अभिभावकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

12 वां अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: अजमेर में जिला स्तरीय कार्यक्रम पुलिस लाईन मैदान में हुआ आयोजित

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जयपुर। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अजमेर जिले के पुलिस लाईन ग्राउण्ड में उत्साहपूर्वक योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, आयुर्वेद विभाग व अन्य विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों सहित स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राओं और आम जनता ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

प्रधानमंत्री के उद्बोधन का सीधा प्रसारण और दीप प्रज्वलन

कार्यक्रम का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, जिला कलक्टर लोक बन्धु, अतिरिक्त जिला कलक्टर अभिषेक गोयल एवं आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. हनुमान मीना द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर मौजूद सभी प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर दिए गए संदेश का सीधा प्रसारण (टेलीकास्ट) भी दिखाया गया, जिसमें उन्होंने योग को स्वस्थ जीवन और वैश्विक एकता का सशक्त माध्यम बताते हुए इसे दैनिक दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान किया।

स्वस्थ जीवन शैली और 'विकसित भारत 2047' का संकल्प

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि योग मात्र व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को जोड़ने का साधन है। आधुनिक जीवन शैली में योग अपनाकर बीमारियों से बचा जा सकता है और नियमित अभ्यास से ही 'विकसित भारत 2047' का सपना साकार होगा। वहीं, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने 'पहला सुख निरोगी काया' का महत्व समझाते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में योग स्वयं को पहचानने का मार्ग है। आधुनिक युग के तनाव और बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए योग को जीवन का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है।

'योगा फॉर हेल्दी एजिंग' थीम पर सामूहिक अभ्यास

जिला कलक्टर लोक बन्धु ने बताया कि आयुष विभाग के संयोजन में आयोजित इस जिला स्तरीय कार्यक्रम को 'योगा फॉर हेल्दी एजिंग' (स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग) की थीम पर आयोजित किया गया था। भारत स्वाभिमान न्यास एवं पतंजलि योग समिति के योगाचार्य यतीन्द्र शास्त्री के निर्देशन में उपस्थित जनसमुदाय ने सामूहिक योग किया। जिला मुख्यालय के साथ-साथ अजमेर के सभी उपखण्ड, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर भी इस प्रकार के योग कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया।

बंगाल बजट 2026: महिलाओं के लिए ₹36,000 करोड़, कल्याण योजनाओं पर बड़ा दांव

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने सोमवार, 22 जून को विधानसभा में अपना पहला ऐतिहासिक बजट पेश किया। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता द्वारा पेश किए गए इस बजट में राज्य के विकास, सरकारी कर्मचारियों, युवाओं और महिलाओं के लिए कई बड़े और लोक-कल्याणकारी वादे किए गए हैं। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि उन्हें पिछली सरकार से विरासत में 8.15 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज मिला है। उन्होंने साफ किया कि नई सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में राजकोषीय अनुशासन को वापस पटरी पर लाना और प्रशासनिक व्यवस्था में आम जनता का खोया हुआ विश्वास बहाल करना शामिल है। बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और वित्त मंत्री ने विधानसभा परिसर में एक संक्षिप्त प्रार्थना सभा में भी हिस्सा लिया।

कर्मचारियों को तोहफा और बंपर सरकारी नौकरियां

राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए इस बजट में एक बड़ी राहत दी गई है। वित्त मंत्री ने लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन को शांत करते हुए महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) में 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। आगामी 1 अक्टूबर से प्रभावी होने वाली इस वृद्धि के बाद अब कुल डीए बढ़कर 38 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे केंद्र और राज्य के भत्ते का अंतर घटकर 22 फीसदी रह गया है। इसके साथ ही, युवाओं के रोजगार के लिए पुलिस में 20,000 और शिक्षा क्षेत्र में 50,000 पदों समेत कुल एक लाख खाली पड़े सरकारी पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने की घोषणा की गई है। इन सरकारी भर्तियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और पात्र क्षेत्रों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत का आरक्षण लागू किया जाएगा, जबकि सरकारी नौकरियों के लिए बढ़ाई गई अधिकतम आयु सीमा की छूट अगले दो वर्षों तक जारी रहेगी।

महिलाओं, बेरोजगारों और बुजुर्गों के लिए बड़ी योजनाएं

बजट में सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए 'अन्नपूर्णा योजना' की शुरुआत की गई है, जिसके लिए 36,000 करोड़ रुपये का भारी बजट आवंटित किया गया है। इसके तहत 25 से 60 वर्ष की महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता उनके बैंक खातों में दी जाएगी, जबकि महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा के लिए अलग से 550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। युवाओं की मदद के लिए 'भरोसा' योजना का ऐलान हुआ है, जिसमें एक लाख रुपये से कम सालाना आय वाले परिवारों के बेरोजगार स्नातकों (ग्रेजुएट) को 3,000 रुपये मासिक और अन्य पात्र बेरोजगारों को 2,000 रुपये महीना दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन में 500 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी की गई है, तथा आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में 5,000 रुपये मासिक की वृद्धि की गई है। वहीं, सिविक वालंटियर और ग्रीन पुलिस जैसे कर्मियों को अगस्त से हर महीने 2,000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।

शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिक रोडमैप

शिक्षा के क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए उत्तर बंगाल में एक आईआईटी (IIT) और एक आईआईएम (IIM) की स्थापना को सुगम बनाने, झारग्राम में एक जनजातीय विश्वविद्यालय और तीन नए महिला विश्वविद्यालय खोलने का प्रस्ताव है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कॉलेज छात्रों को 25,000 रुपये का एकमुश्त अनुदान दिया जाएगा, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र में 3,100 करोड़ रुपये के बजट के साथ 'आयुष्मान भारत योजना' को लागू किया जाएगा, जिससे राज्य के 7 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर कोलकाता में चिंगरीघाटा से न्यू टाउन के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर, दादनपात्राबर में गहरा समुद्री बंदरगाह और दुर्गापुर, आसनसोल व सिलीगुड़ी में मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अध्ययन का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में सस्ते भोजन के लिए 'मां आहार' केंद्रों का विस्तार होगा, रिटायर्ड पत्रकारों को 5,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाएगी और राज्य में तकनीकी विकास के लिए एक विशेष एआई (AI) मिशन की शुरुआत की जाएगी।

विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती से रुपया क्यों टूटा?

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मुंबई। घरेलू शेयर बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार में जारी हलचल के बीच सोमवार, 22 जून को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली रूप से 4 पैसे टूटकर 94.36 के स्तर पर खुला। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता में सकारात्मक प्रगति के संकेतों से भारतीय मुद्रा को लगातार सहारा मिल रहा है। गौरतलब है कि पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान रुपया 0.8% की मजबूती के साथ 94.32 पर बंद हुआ था, जो बीते तीन महीनों में इसकी सबसे शानदार साप्ताहिक बढ़त रही। लगातार छह सत्रों की इस तेजी के दौरान रुपये ने कई महीनों के उच्चतम स्तर 94.18 को भी छुआ, जिससे पिछले महीने 97 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें एक बेहतरीन रिकवरी दर्ज की गई है।

कच्चे तेल में गिरावट और जियोपॉलिटिकल राहत

विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल के दामों में आई नरमी और वाशिंगटन व तेहरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत के सकारात्मक नतीजों से रुपये की मजबूती को और बल मिल सकता है। वैश्विक बाजार में अगस्त डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड वायदा 1.7% फिसलकर $79.24 प्रति बैरल पर आ गया है। यह गिरावट तब देखने को मिली जब ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ हुई वार्ता में अच्छी प्रगति होने के संकेत दिए। यह बातचीत ईरानी अधिकारियों और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद आगे बढ़ी है। ईरान के इस सकारात्मक रुख से निवेशकों की वह चिंताएं दूर हुई हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट) को बंद करने की धमकी के बाद पैदा हुई थीं।

ग्लोबल रिस्क और घरेलू फ्लो के बीच फंसा रुपया

करेंसी रणनीतिकारों का मानना है कि भारतीय रुपया इस समय दो विपरीत ताकतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ जहां देश में लगातार हो रहा विदेशी निवेश (डेट इनफ्लो) और विदेशी मुद्रा जमा (फॉरेन करेंसी डिपॉजिट) रुपये को मजबूती दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपया आने वाले समय में एक सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आएगा। बाजार की अगली दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू स्तर पर आने वाला पूंजी प्रवाह बाहरी भू-राजनीतिक दबावों और डॉलर की मजबूती पर कितना हावी हो पाता है।

तकनीकी स्तर और रुपये का भविष्य का रुख

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, तकनीकी नजरिए से देखें तो डॉलर के मुकाबले रुपये के लिए 94.00 से 94.20 का स्तर एक बेहद मजबूत सपोर्ट जोन के रूप में काम करेगा। इसके विपरीत, ऊपरी स्तरों पर 94.80 से 95.00 का दायरा इसके लिए तत्काल कड़े रेजिस्टेंस बैंड की तरह देखा जा रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बढ़ते निवेश और कच्चे तेल की कीमतों के नियंत्रण में रहने के कारण फिलहाल रुझान रुपये की बढ़त की तरफ ही झुका हुआ है। यदि बाजार के फंडामेंटल्स इसी तरह मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94.00 से 93.80 के स्तर की तरफ भी कदम बढ़ा सकता है।

होर्मुज पर संकट गहराया, ईरान के फैसले से हड़कंप; भारतीय जहाज सुरक्षित निकला

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तेहरान। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लेबनान पर इज़राइली सेना की लगातार बमबारी से असंतुष्ट होकर ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को यातायात के लिए पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है। हालांकि, इस नाकेबंदी से ठीक पहले भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। भारतीय ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े चार जहाज ईरान के इस कड़े कदम से ऐन पहले सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं, जिससे देश की एनर्जी सुरक्षा पर मंडरा रहा तत्काल खतरा टल गया है।

भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी और उनका महत्व

ईरान द्वारा जलमार्ग बंद किए जाने से ठीक पहले जो 55 जहाज वहां से रवाना हुए, उनमें भारत आ रहा एलएनजी (LNG) से लदा एक प्रमुख जहाज 'अल हामरा' भी शामिल है। सुरक्षा कारणों से इस जहाज ने संवेदनशील इलाकों से गुजरते समय अपनी ट्रैकिंग प्रणाली को बंद कर दिया था। यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय तेल कंपनी से 1 लाख 32 हजार 890 क्यूबिक मीटर गैस लेकर तमिलनाडु के एन्नोर टर्मिनल की तरफ बढ़ रहा है। दक्षिण भारत के ऊर्जा संकट को दूर रखने और वहां मौजूद बिजली व खाद कारखानों को चालू रखने के लिए इस कार्गो का समय पर पहुंचना बेहद जरूरी है। भारत अपनी आवश्यकता का 10 से 15 प्रतिशत एलएनजी अबू धाबी से जबकि सबसे बड़ा हिस्सा (40 से 45 फीसदी) कतर से आयात करता है।

कच्चे तेल के तीन अन्य टैंकरों का सफर

केंद्रीय मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, 'अल हामरा' के अलावा भारतीय ध्वज वाले तीन अन्य बड़े कच्चे तेल के टैंकर भी 94 भारतीय क्रू मेंबर्स के साथ होर्मुज जलमार्ग को पार कर सुरक्षित आगे बढ़ चुके हैं। इन जहाजों में कुल मिलाकर 8.6 लाख टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। इन तीनों जहाजों के भारत पहुंचने का विवरण इस प्रकार है:

  • देश वैभव: इसके 24 जून को वाडीनार बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है।

  • देश विभोर: इसके भी 24 जून को सिक्का बंदरगाह पर लंगर डालने की संभावना है।

  • सनमार हेराल्ड: इस तीसरे टैंकर के 1 जुलाई तक पारादीप बंदरगाह पहुंचने का अनुमान है।

ईरान की चेतावनी और शांति बहाली के प्रयास

ईरान के सैन्य मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज को बंद करने का फैसला विरोधी देशों द्वारा किए गए वादों को तोड़ने और लेबनान पर हमलों के विरोध में लिया गया पहला कदम है। यदि परिस्थितियां नहीं सुधरीं, तो ईरान आगे और भी कड़े कदम उठा सकता है। इस बीच, खाड़ी देशों में शांति बहाल करने के लिए स्विट्जरलैंड के एक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी शुरू हो चुकी है। हालांकि, मौजूदा सत्र में यह बातचीत कुछ हद तक रुक सी गई है, लेकिन दोनों पक्षों के राजनयिकों को फिर से चर्चा की मेज पर लाने के लिए परदे के पीछे से प्रयास (बैकचैनल संपर्क) लगातार किए जा रहे हैं।

नॉन-प्रॉफिट FIFA इतना बड़ा बिजनेस कैसे चलाता है? ₹1,22,734 करोड़ की कमाई पर सवाल

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नई दिल्ली। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा फीफा विश्व कप खेला जा रहा है। एक गैर-लाभकारी (नॉन-प्रॉफिट) संस्था होने के बावजूद फीफा इस 48 टीमों वाले महाकुंभ के जरिए साल 2023 से 2026 के व्यावसायिक चक्र में लगभग 13 अरब डॉलर (करीब ₹122734 करोड़) का रिकॉर्ड राजस्व बटोरने की तैयारी में है। 'फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन' (फीफा) दुनिया भर में फुटबॉल की सर्वोच्च शासी संस्था है, जिसकी स्थापना 1904 में पेरिस में हुई थी और वर्तमान में इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में है। 211 राष्ट्रीय संघों की सदस्यता वाले इस संगठन का काम सिर्फ वर्ल्ड कप कराना नहीं, बल्कि खेल के नियम बनाना, ट्रांसफर की निगरानी और कोचिंग मानकों को तय करना भी है।

कमाई में ऐतिहासिक उछाल और बिजनेस मॉडल

फीफा की कमाई मुख्य रूप से चार साल के चक्र पर आधारित होती है। पिछले कतर विश्व कप (2019-2022) के 7.6 अरब डॉलर के मुकाबले इस बार राजस्व में 72% की भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस अप्रत्याशित मुनाफे के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं: टीमों की संख्या का 32 से बढ़कर 48 होना जिससे मैचों की संख्या बढ़ी, अमेरिका जैसे समृद्ध मीडिया बाजार में टूर्नामेंट का आयोजन और वहां एक नए 'क्लब वर्ल्ड कप' की शुरुआत करना। फीफा के खजाने में सबसे बड़ा हिस्सा टीवी ब्रॉडकास्टिंग राइट्स (40% यानी 5.3 अरब डॉलर) से आता है। इसके बाद हॉस्पिटैलिटी व टिकटिंग से 28% (3.6 अरब डॉलर), कोका-कोला व वीज़ा जैसे बड़े ब्रांड्स की स्पॉन्सरशिप से 25% (3.3 अरब डॉलर) और मर्चेंडाइजिंग व वीडियो गेम्स के लाइसेंसिंग से 3% (0.4 अरब डॉलर) की आय होती है।

बेशुमार दौलत का खर्च और राजनीतिक समीकरण

एक नॉन-प्रॉफिट संस्था होने के नाते फीफा इस भारी-भरकम राशि को वापस फुटबॉल के विकास में लगाने का दावा करती है। इस बार कतर की तरह नए स्टेडियमों पर खर्च नहीं हो रहा है, बल्कि अमेरिका के मौजूदा एनएफएल स्टेडियमों का उपयोग किया जा रहा है। बजट का 58% (7.6 अरब डॉलर) प्रतियोगिताओं और इनामी राशि पर खर्च होगा, जिसमें से विजेता टीम को 50 मिलियन डॉलर मिलेंगे। वहीं, 30% (3.9 अरब डॉलर) सभी 211 सदस्य देशों को फुटबॉल विकास के लिए ग्रांट के रूप में दिया जाता है और 7% (0.9 अरब डॉलर) प्रशासनिक कार्यों व अधिकारियों के वेतन में जाता है। हालांकि, समीक्षक इस फंडिंग व्यवस्था को एक राजनीतिक 'संरक्षण तंत्र' (पैट्रोनेज मशीन) के रूप में देखते हैं, क्योंकि फंड पाने वाले प्रत्येक देश के पास फीफा अध्यक्ष के चुनाव में एक वोट होता है। कागजों पर मुनाफा न दिखाने के बावजूद फीफा का रिजर्व फंड आज 2.7 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है।

महंगे टिकट, स्थानीय अर्थव्यवस्था और भविष्य की रणनीति

इस बार विश्व कप में पहली बार विमान किराए की तरह मांग के आधार पर तय होने वाली 'डायनेमिक प्राइसिंग' प्रणाली लागू की गई है। इसके चलते टिकटों की कीमतें 60 डॉलर से शुरू होकर प्रीमियम कैटेगरी में 32,000 डॉलर तक पहुंच गई हैं, जो 1994 के अमेरिकी विश्व कप की तुलना में करीब 1000% अधिक है। जहां फीफा का दावा है कि मेजबान शहरों को पर्यटन से करोड़ों डॉलर का फायदा होगा, वहीं खेल अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए जीडीपी के 0.1% से भी कम है, जबकि सुरक्षा और परिवहन का खर्च स्थानीय प्रशासन को उठाना पड़ रहा है। इस बीच, भारत जैसे देशों में फुटबॉल की बढ़ती डिजिटल व्यूअरशिप फीफा के लिए एक नया ग्रोथ मार्केट बन रही है। भविष्य को सुरक्षित करने के लिए फीफा अब महिला विश्व कप और क्लब वर्ल्ड कप जैसे आयोजनों का एक बड़ा पोर्टफोलियो तैयार कर रही है, ताकि किसी एक टूर्नामेंट पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि, अत्यधिक व्यावसायीकरण और आसमान छूते दामों के कारण खेल की साख पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जबलपुर: कुत्ते के काटने से युवक की मौत, कई जगह मिले गहरे घाव

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जबलपुर। शहर के गोहलपुर थाना क्षेत्र में एक बेहद दर्दनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आवारा कुत्ते के हमले में 33 वर्षीय युवक की जान चली गई। हमले के बाद युवक को गंभीर हालत में जिला अस्पताल भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान सोमवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश का माहौल है।

अचानक हुआ जानलेवा हमला और इलाज के दौरान मौत

यह दर्दनाक वाकया रविवार रात का है, जब गोहलपुर क्षेत्र में एक युवक गुजर रहा था। इसी दौरान एक श्वान ने उस पर अचानक हमला कर दिया और बुरी तरह नोच डाला। इस हमले में युवक के शरीर पर कई जगह गहरे और गंभीर घाव हो गए। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए गंभीर रूप से घायल युवक को विक्टोरिया अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों की टीम ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए तुरंत इलाज शुरू किया और उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

मृतक की पहचान और परिजनों की तलाश

अस्पताल में दम तोड़ने वाले युवक की पहचान चंदन कोल (33 वर्ष) के रूप में हुई है, जो माढ़ोताल की कोल बस्ती का रहने वाला था और लोहा बांधने (सेंटींग) का काम करता था। परिजनों के अनुसार, चंदन दो दिन पहले घर से काम पर जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिवार के लोग लगातार अपने स्तर पर उसकी तलाश कर रहे थे, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल पा रहा था। पुलिस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि हमला करने वाला कुत्ता आवारा था या किसी का पालतू श्वान, जिसे लापरवाही पूर्वक खुला छोड़ दिया गया था।

श्मशान घाट में दफनाने के वक्त पहुंचे घरवाले

गोहलपुर थाना पुलिस ने सोमवार को चंदन के शव का पोस्टमार्टम कराया। चूंकि उस समय तक उसकी शिनाख्त नहीं हो पाई थी, इसलिए पुलिस शव को अंतिम संस्कार के लिए चौहानी श्मशान घाट ले गई। वहां जब नियमानुसार शव को दफनाने के लिए गड्ढा खोदा जा रहा था, ठीक उसी समय ढूंढते हुए चंदन के परिजन भी वहां पहुंच गए। उन्होंने शव को देखते ही अपने लापता बेटे के रूप में उसकी पहचान की। इसके बाद परिजन शव को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अपने साथ ले गए और रीति-रिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया।

‘40 करोड़’ वाले बयान पर महुआ मोइत्रा फंसीं, बागी सांसदों की मानहानि की तैयारी

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कोलकाता / नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुई ऐतिहासिक बगावत के बाद अब पार्टी के अंदरूनी विवाद कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गए हैं। TMC से अलग हुए 20 बागी सांसद अब अपनी ही पूर्व सहयोगी और फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इन बागी सांसदों ने एक अहम बैठक की है, जिसमें महुआ मोइत्रा के खिलाफ मानहानि (Defamation) का मुकदमा दर्ज करने का फैसला लिया गया है। बागी सांसदों का कहना है कि महुआ मोइत्रा ने उन पर बिकने का सरासर झूठा और बेहद अपमानजनक आरोप लगाया है, जिससे उनकी छवि खराब हुई है।

क्या था महुआ मोइत्रा का '40 करोड़' वाला आरोप?

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर पाला बदलने वाले सांसदों को लेकर एक बेहद संगीन और तीखा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया था कि TMC छोड़ने वाले सभी 20 सांसदों को दल बदलने के लिए 40-40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत दी गई है। महुआ ने दावा किया था कि इन सांसदों को 4 करोड़ रुपये एडवांस (नकद) दिए गए हैं और बाकी के 36 करोड़ रुपये अगले 36 महीनों तक 1-1 करोड़ की मासिक किस्तों में दिए जाएंगे।

महुआ का यह तीखा बयान शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत के उस बयान के बाद आया था, जिसमें राउत ने महाराष्ट्र के सांसदों को तोड़ने के लिए 15 करोड़ रुपये के ऑफर मिलने की बात कही थी। इस पर तंज कसते हुए महुआ मोइत्रा ने 17 जून को सोशल मीडिया पर लिखा था, "सिर्फ 15 करोड़ रुपये? इतने सस्ते में क्यों जा रहे हैं? यकीन मानिए, हमारे वालों को तो 4 करोड़ रुपये एडवांस मिले हैं और अगले 36 महीनों तक हर महीने 1 करोड़ रुपये मिलेंगे… शहद के साथ पैसा भी।"

TMC के इतिहास की सबसे बड़ी टूट और 'NCPI' का सहारा

यह कानूनी और राजनीतिक घमासान तब सामने आया है जब संसद में TMC को अपने इतिहास का सबसे बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (Chief Whip) रहीं काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया। इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होने और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का ऐलान कर दिया।

इस बगावत के बाद अपनी संसद सदस्यता बचाने और दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता से बचने के लिए इन सभी 20 सांसदों ने एक सोची-समझी रणनीति अपनाई। कानूनन अयोग्य होने से बचने के लिए इन सांसदों ने त्रिपुरा की एक पंजीकृत लेकिन छोटी सी पार्टी 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का दामन थाम लिया और उसमें तकनीकी रूप से विलय कर लिया। हालांकि, यह गुट सीधे तौर पर भाजपा में शामिल नहीं हुआ है, लेकिन उन्होंने केंद्र की NDA सरकार को अपना समर्थन सौंप दिया है। इस अभूतपूर्व टूट के कारण लोकसभा में TMC की ताकत घटकर महज 8 सांसदों की रह गई है, जिसे साल 1998 में पार्टी के गठन के बाद से ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।

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