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अमृत भारत स्टेशन योजना: 15 स्टेशनों पर सिनेमा हॉल और गेमिंग जोन की तैयारी

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भोपाल। यदि आप एक व्यापारी हैं, स्टार्टअप चलाते हैं या निवेश के लिए किसी ऐसे स्थान की तलाश में हैं जहां ग्राहकों की भारी मौजूदगी (गारंटीड फुटफॉल) हो, तो भारतीय रेलवे आपके लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया है। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत नया रूप ले रहे 15 रेलवे स्टेशनों पर कमर्शियल स्पेस (वाणिज्यिक स्थानों) के उपयोग के लिए बिजनेस प्रपोजल मांगे हैं। इस योजना के जरिए अब रेलवे स्टेशनों को सिर्फ यात्रा का जरिया नहीं, बल्कि शहरों के बड़े आर्थिक और व्यापारिक केंद्र (सिटी सेंटर) के रूप में तब्दील किया जा रहा है।

ड्राइव-इन सिनेमा से लेकर गेमिंग जोन जैसे आधुनिक आइडिया

रेल प्रशासन स्टेशन परिसरों को हाई-टेक लुक देने के लिए पारंपरिक दुकानों के ढर्रे से अलग हटकर नए और यात्री-केंद्रित बिजनेस आइडिया को प्राथमिकता दे रहा है। कारोबारी नीचे दी गई श्रेणियों या किसी अन्य नए कांसेप्ट पर अपने प्रस्ताव दे सकते हैं:

  • मनोरंजन और गैजेट्स: ड्राइव-इन सिनेमा, गेमिंग जोन, बाल मनोरंजन केंद्र और डिजिटल एक्सपीरियंस सेंटर।

  • सुविधाएं और आतिथ्य: आधुनिक प्रतीक्षालय/लाउंज, पर्यटन एवं आतिथ्य सेवाएं और मल्टीफंक्शनल कॉम्प्लेक्स।

  • बैंकिंग और टेक: डिजिटल बैंकिंग यूनिट, ई-लॉबी और हाई-टेक एटीएम।

भोपाल मंडल के ये 15 स्टेशन बनेंगे नए 'बिजनेस हब'

अमृत भारत योजना के तहत नर्मदापुरम और शाजापुर स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 13 अन्य प्रमुख स्टेशनों पर काम बहुत तेजी से चल रहा है। इस पूरी योजना में शामिल 15 स्टेशन जहां बिजनेस सेंटर विकसित किए जाएंगे, वे इस प्रकार हैं:

  • नर्मदापुरम, शाजापुर, हरदा, खिरकिया, बनापुरा, इटारसी, साँची, विदिशा, गंजबासौदा, अशोकनगर, गुना, रुठियाई, शिवपुरी, ब्यावरा-राजगढ़ और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) स्टेशन।

पारदर्शी टेंडर और ई-नीलामी के जरिए अलॉटमेंट

रेलवे स्टेशनों पर व्यापार शुरू करने के लिए आवंटन की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सरल रखा गया है:

  • सम्पर्क और सर्वेक्षण: इच्छुक कारोबारी सीधे संबंधित स्टेशन के मंडल वाणिज्य निरीक्षक से मिलकर उपलब्ध खाली जगहों का निरीक्षण और अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं।

  • चयन प्रक्रिया: प्राप्त सभी प्रस्तावों का रेलवे बोर्ड की नीतियों के तहत परीक्षण किया जाएगा। जो प्रस्ताव व्यावहारिक और उपयोगी पाए जाएंगे, उन्हें ई-नीलामी या टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से अंतिम रूप दिया जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य स्टेशनों को केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित न रखकर व्यापार, निवेश और आर्थिक विकास का मुख्य केंद्र बनाना है, जिससे शहरों के विकास में रेलवे का योगदान और अधिक बढ़ सके।

मध्य प्रदेश सरकार का ‘तबादला उद्योग’ और व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध समाजवादी पार्टी का गंभीर रुख

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भोपाल।  समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने आज आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में मध्य प्रदेश सरकार के उद्यानिकी विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की तबादला निति पर निशाना साधते हुए प्रदेश में चल रहे ‘तबादला उद्योग’ और सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुख्य बिंदु:

यश भारतीय ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि मध्य प्रदेश सरकार की ‘स्थानांतरण नीति 2026’ पूर्णतः विफल और भ्रष्टाचार का जरिया बन चुकी है। नीति का उद्देश्य पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना था, लेकिन धरातल पर यह केवल चहेते अधिकारियों को बचाने और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का माध्यम बन गई है। लेकिन बडे दुख की बात है कि उ‌द्यानिकी विभाग ने जानबूझकर इस नीति की खुलेआम अनदेखी की गई है | जब प्रदेश के अन्य बड़े-बड़े विभागों ने शासन द्वारा निर्धारित अंतिम तिथि तक अपने सभी स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए, तब प्रदेश के उ‌द्यानिकी एवं खाद्या प्रसंस्करण विभाग में जानबूझकर फाइलें रोकी गई और आदेश जारी नहीं किए । इसका क्या कारण हो सकता है ? क्या सालो से एक ही पद पर जमे अधिकारियों को मलाईदार पदों पर स्थानांतरण से (अन्यत्र कम फायदे वाले स्थान पर तबादले से ) रोकना था या कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को विशेष संरक्षण देना है। गौरतलब है की हमारी जानकारी के अनुसार विभागीय मंत्री के द्वारा स्थानांतरण नीति 2026 की अंतिम तारीख से पहले ही तबादले की सूचि जॉन किंग्सली सचिव महोदय को भेजी जा चुकी थी | में सरकार से मांग करता हूं की इस पूरे स्थानांतरण प्रकरणों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। वही इन सवालों के जवाब दियें जाये की शासन ने स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी थी, तो फिर अंतिम तिथि तक आदेश क्यों नहीं निकाले गए ? किसके दबाव में फाइलें रोकी गई ? किसके हित में नियमों की अनदेखी की गई ? जब दूसरे विभाग शासन के निर्देशों का पालन कर सकते हैं, तो उ‌द्यानिकी विभाग में किन मजबूरियों में अलग व्यवस्था चली ? अंतिम तिथि तक लंबित रखी गई फाइलों और निर्णयों की समीक्षा की जाए तथा यह पता लगाया जाए कि आदेश समय पर जारी न होने के लिए कौन जिम्मेदार था ? वही मेरी मांग है की यदि किसी प्रकार का भ्रष्टाचार, पद का दुरुपयोग या भ्रष्टाचार सामने आता है तो दोषी अधिकारी के विरु‌द्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।

वही मेरी बातो के आधार इन प्रमुख मामलों से ओर भी अधिक स्पष्ट होंगे :

1.    मध्य प्रदेश के जिला धार में प्रभारी उप संचालक उद्यान के पद पर पदस्थ नीरज सांवलिया के विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं अनियमितता के संबंधी लोकायुक्त कार्यालय, इंदौर में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी का उसी जिले एवं उसी पद पर निरंतर बने रहने से साक्ष्यों की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है और कार्यालय में रखे दस्तावेज सुरक्षित नहीं होने और उसमे छेडछाड़ कर प्रभावित किये जाने की पूरी संभावना हर वक्त बनी हुई है। अत्यंत आश्चर्य एवं चिंता का विषय यह है कि उक्त शिकायतों तथा लोकायुक्त जांच की जानकारी विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद आज दिनांक तक नीरज सांवलिया को न तो वर्तमान पद से हटाया गया है और न ही अन्यत्र पदस्थ किया गया है।  जबकी मध्यप्रदेश शासन, सामान्य के प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक GAD/4/0001/2026-GAD-9-01 दिनांक 22 मई 2026 के माध्यम से जारी की स्थानान्तरण निति – 2026 के प्रावधान अंतर्गत बिंदु क्रमांक 8.4 में स्पष्ट उल्लेख किया गया है की लोकायुक्त संगठन/आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो अथवा पुलिस द्वारा शासकीय सेवक के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने अथवा अभियोजन की कार्यवाही प्रारंभ होने पर प्रशासकीय विभाग की संतुष्टि उपरांत जांच प्रभावित न होने की दृष्टि से किए जाने वाले स्थानान्तरण कियें जा सकेंगे । 
2.    नियमों की अनदेखी: ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी, इंदौर, सौरभ व्यास के मामले में गोपनीय चरित्रावली (CR) में नियम विरुद्ध छेड़छाड़ की गई। 12 जनवरी 2026 को आयुक्त द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी उन्हें पद से न हटाना अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाता है।(ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी, इंदौर, सौरभ व्यास के मामले में आयुक्त उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण के द्वारा जारी किया गया कारण बताओ नोटिस पत्र क्रमांक/उद्यान/अ – 1 – स/स्था/2025-26/260/भोपाल दिनांक 12-01-2026 इस प्रेस रिलीज के साथ संलग्न है )

3.    तीसरा मामला सबसे रोचक है  कुछ अधिकारी मनपसंद जगह छोड़ना नहीं चाहते तो कुछ अधिकारी मनपसंद जगह जाना चाहते है एसा ही मामला सामने आया है उद्यान विभाग में धार जिले के प्रभारी अधिकारी भूपेंद्र सगोरे का जिन्होंने कोशिश तो की उन्हें मनपसंद जगह मिल जाए पर एसा हो न सका और सचिव महोदय ने उन्हें भोपाल में पदस्थ कर दिया लेकिन इन सब बातो के बिच उद्यान विभाग में धार जिले के प्रभारी अधिकारी भूपेंद्र सगोरे का एक व्हाटसप चैट बड़ी तेजी से बाजार में वायरल हो रहा है जिसमे उद्यान विभाग में भूपेंद्र सगोरे अपने एक मित्र से चैट कर रहे है की उनका तबादला डायरेक्ट सचिव साहब के बात करने पर हुआ है, उन्होंने ही मुझे यहा (भोपाल ) आने का बोला मुझे जिला देने से माना कर गए, इस पर मित्र के द्वारा जब उनसे पूछा गया की जॉन किंग्सली सचिव सर ने कितने रुपये लिए आपके ऑडर के लिए, तो भूपेंद्र सगोरे ने जवाब दिया की भोपाल लूप लाइन है, इसलिए 5 L लगे |
अब इसमें प्रश्न यह उठता है की तबादला किस के कहने से हुआ ?…….. और भूपेंद्र सगोरे का भोपाल तबादला क्यों किया गया ?……… लूप लाइन क्या है ?……. और ये 5 L क्यों और कहा लगे ?….. इसकी जाँच होना बहुत ही जरुरी है | (उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग के द्वारा जारी तबादला आदेश की कॉपी और धार जिले के प्रभारी अधिकारी भूपेंद्र सगोरे और उनके मित्र की व्हाटसप चैट के स्क्रीन शॉट इस प्रेस रिलीज के साथ संलग्न है )
       
4.    वही उद्यानिकी एव खाद्य प्रसंस्करण विभाग मंत्रालय में ओएसडी पद पर पदस्थ डॉ. पूजा सिंह की न्युक्ति कई सवालों के घेरे में है डॉ पूजा सिंह मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड मुख्यालय में संपर्क अधिकारी के रूप में पदस्थ थी जिनको लेकर कृषि विभाग के द्वारा दिनांक 06 मई 2026 को एक आदेश निकला गया जिसमे उनके मूल विभाग राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में सहायक प्राध्यापक (जैव रसायन) को उनकी सेवाए वापस कर दी गई | इसके बाद 13 मई 2026 को पुनः कृषि विभाग द्वारा विभाग के सचिव महोदय के अनुमोदन से 06 मई 2026 के आदेश में संशोधन करते हुए उन्हें उद्यानिकी एवं खाद्या प्रसंस्करण विभाग मंत्रालय में ओएसडी पद पर कार्य करने के आदेश जारी कर दिए गए | जबकि शासन के नियम अनुसार एक विभाग के सचिव को दुसरे विभाग में किसी भी अधिकारी को पदस्थ करने के अधिकार नहीं होते है  वही 13 मई 2026 से 20 दिन बाद 3 जून 2026 को उद्यानिकी एव खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा आदेश निकला जाता है की डॉ. पूजा सिंह ओएसडी पद पर विभाग में पदस्थ किया जाता है | गौरतलब है की जब किसी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति की जाती है तो सबसे पहले विभाग द्वारा पद को लेकर मांग की जाती है उसके बाद अधिकारी/कर्मचारी को लेकर दोनों विभाग की सहमती के आधार पर प्रतिनियुक्ति की जाती है लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया जिस पर कई प्रश्न उठाते है 

वही इन सवालों के जवाब दियें जाये की ….. 

1)    शासन ने स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी थी, तो फिर अंतिम तिथि तक आदेश क्यों नहीं निकाले गए ?……. 
2)    किसके दबाव में फाइलें रोकी गई ?……. 
3)    किसके हित में नियमों की अनदेखी की गई ?……. 
4)    जब दूसरे विभाग शासन के निर्देशों का पालन कर सकते हैं, तो उ‌द्यानिकी विभाग में किन मजबूरियों में अलग व्यवस्था क्यों चली ?…… 

समाजवादी पार्टी की मांग:

1)    इस पूरे स्थानांतरण प्रकरण की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए |
2)    अंतिम तिथि तक लंबित रखी गई फाइलों और निर्णयों की समीक्षा की जाए | 
3)    तथा यह पता लगाया जाए कि आदेश समय पर जारी न होने के लिए कौन जिम्मेदार था. 
4)    यदि किसी प्रकार का भ्रष्टाचार, पद का दुरुपयोग या भ्रष्टाचार सामने आता है तो दोषी अधिकारी के विरु‌द्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
5)    स्थानांतरण नीति की समीक्षा: सरकार स्पष्ट करे कि किस आधार पर स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

यश भारतीय ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रदेश सरकार ने इस ‘तबादला उद्योग’ को तुरंत बंद नहीं किया और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की, तो समाजवादी पार्टी कड़ा रुख अपनाने के लिए बाध्य होगी।

मेहनत लाई रंग, पहले प्रयास में BPSC पास कर अभिनव बने स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर

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दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले के अंतर्गत आने वाले बिरौल प्रखंड के छोटे से गांव पड़री के रहने वाले होनहार छात्र अभिनव कुमार ठाकुर ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में ऐतिहासिक सफलता अर्जित की है। अभिनव ने अपने पहले ही प्रयास (फर्स्ट अटेम्प्ट) में इस कठिन परीक्षा को पास कर 'स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर' का प्रतिष्ठित पद हासिल किया है। उनकी इस शानदार कामयाबी से न केवल उनके परिवार का सिर ऊंचा हुआ है, बल्कि पूरे जिले का नाम रौशन हुआ है।

सीमित संसाधनों के बीच कपड़ा व्यवसायी के बेटे ने रचा इतिहास

अभिनव कुमार ठाकुर एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता संजय ठाकुर गांव में ही एक छोटी सी कपड़े की दुकान चलाते हैं, जिससे उनके पूरे परिवार का गुजर-बसर होता है। वहीं उनकी माता ममता ठाकुर एक कुशल गृहिणी हैं। घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत न होने और सीमित संसाधन होने के बावजूद अभिनव के हौसलों में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने अपनी कड़े अनुशासन, अटूट आत्मविश्वास और दिन-रात की कड़ी मेहनत के दम पर आज इस सर्वोच्च मुकाम को हासिल कर दिखाया है।

रामकृष्ण मिशन देवघर से हुई स्कूलिंग, फिर दिल्ली जाकर पूरा किया सपना

अभिनव बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बेहद मेधावी और कुशाग्र बुद्धि के छात्र रहे हैं। अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा गांव के ही स्कूल से पूरी करने के बाद उनका चयन प्रतिष्ठित रामकृष्ण मिशन विद्यालय, देवघर (झारखंड) के लिए हुआ, जहां रहकर उन्होंने दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे उच्च शिक्षा हासिल करने और अपने सपनों को नई उड़ान देने के लिए देश की राजधानी दिल्ली चले गए। दिल्ली में रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक सेवा (सिविल सर्विसेज) में जाने का अपना बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया और बिना विचलित हुए लगातार इसकी तैयारी में जुट गए।

पहले ही प्रयास में मिली बड़ी कामयाबी, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल

नियमित रूप से कई घंटों की सेल्फ स्टडी और सही रणनीति के बल पर अभिनव ने बीपीएससी की 70वीं परीक्षा में शामिल होकर अपने पहले ही प्रयास में बाजी मार ली। उन्हें राज्य सरकार के कर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर का पद मिला है। उनकी इस अभूतपूर्व उपलब्धि को ग्रामीण क्षेत्र के उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़े प्रेरणास्रोत (रोल मॉडल) के रूप में देखा जा रहा है, जो सुख-सुविधाओं की कमी के कारण आगे बढ़ने से कतराते हैं।

सफलता की खबर आते ही पड़री गांव में बंटी मिठाइयां, क्षेत्र में हर्ष का माहौल

जैसे ही अभिनव के स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर बनने की आधिकारिक खबर उनके गृहग्राम पड़री पहुंची, पूरा गांव जश्न के माहौल में डूब गया। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने अभिनव के घर पहुंचकर उनके माता-पिता को बधाई दी और पूरे इलाके में मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया।

इस अवसर पर स्थानीय सरपंच संघ के अध्यक्ष व जाने-माने समाजसेवी अच्युतानंद ठाकुर ने कहा कि अभिनव ने इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी सफलता पाकर हमारे पूरे क्षेत्र का गौरव और मान बढ़ाया है। वहीं ग्रामीण बुजुर्ग घनश्याम राय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अभिनव की यह शानदार जीत ग्रामीण परिवेश और देहाती माहौल में रहकर पढ़ाई करने वाले अन्य प्रतिभावान विद्यार्थियों को भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान, बोले- ‘काफिर कहते हो तो हमारी सड़क पर मत चलो’

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इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रविवार को इंदौर के राजनगर क्षेत्र में आयोजित विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कभी भी विकास कार्यों में किसी भी व्यक्ति या समुदाय के साथ कोई भेदभाव नहीं किया है और समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से जनहितैषी काम किए हैं।

मंत्री विजयवर्गीय ने विरोधियों और कट्टरपंथियों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यदि कुछ लोग हमें 'काफिर' कहते हैं, तो उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए। वे जिन चमचमाती सड़कों पर सफर करते हैं और जिन सरकारी जन कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा रहे हैं, वे सभी बुनियादी सुविधाएं इसी सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अगर हम आपकी नजरों में काफिर हैं, तो हमारी बनाई हुई सड़कों पर मत चलो।

सवा करोड़ की लागत से बनी सड़क का किया लोकार्पण

राजनगर बड़ा कुआं से लेकर धार रोड तक करीब 1.25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुई नई डामर सड़क के उद्घाटन समारोह में कैलाश विजयवर्गीय ने क्षेत्र की डेमोग्राफी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस इलाके में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोग मिलजुलकर रहते हैं। सरकार ने बजट जारी करते समय या काम करते समय कभी किसी का धर्म नहीं देखा और बिना किसी तुष्टिकरण के विकास को धरातल पर उतारा है। इसके बावजूद कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग उन्हें और उनकी सरकार को काफिर कहकर संबोधित करते हैं, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

आप हमें वोट दें या न दें, जनता की सेवा और विकास जारी रहेगा

कैबिनेट मंत्री ने सरकार के कामकाज की शैली को स्पष्ट करते हुए कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' ही वर्तमान भाजपा सरकार की मूल आत्मा और नीति है। मुख्यमंत्री की 'लाड़ली बहना योजना' और 'लाड़ली लक्ष्मी योजना' जैसी अत्यंत महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग की माताओं, बहनों और बेटियों को बिना किसी रुकावट के सीधे तौर पर मिल रहा है।

जनता को आश्वस्त करते हुए विजयवर्गीय ने कहा, "जनता जनार्दन की सेवा करना हम जनप्रतिनिधियों का परम कर्तव्य और दायित्व है। आप चुनाव में हमें वोट दें या न दें, क्षेत्र के विकास कार्य कभी नहीं रुकेंगे। यदि आप हमें वोट देकर अपना आशीर्वाद देंगे, तो हमारे काम करने का उत्साह और अधिक बढ़ जाएगा, लेकिन यदि आप वोट नहीं भी देंगे, तब भी आपके क्षेत्र का विकास पूरी ईमानदारी से किया जाएगा।"

महापौर की मौजूदगी में करोड़ों के कार्यों का हुआ भूमिपूजन

इस गरिमामय विकास उत्सव कार्यक्रम में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित क्षेत्र के कई अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, पार्षद और प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान राजनगर और आसपास के क्षेत्रों के लिए कई नए विकास कार्यों का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमिपूजन और शिलान्यास किया गया। इसके साथ ही मंच से विभिन्न शासकीय और कल्याणकारी योजनाओं के स्थानीय लाभार्थियों (हितग्राहियों) को लाभ पत्र, प्रमाण पत्र और अधिकार पत्रों का वितरण भी अतिथियों द्वारा किया गया।

‘ऑपरेशन टाइगर’ क्या है? शिवसेना (UBT) में टूट के पीछे की पूरी कहानी

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मुंबई। देश की सियासत में इन दिनों बगावतों और राजनीतिक उलटफेर का दौर चरम पर है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा खेमे में सुगबुगाहट, तमिलनाडु चुनाव के बाद एआईएडीएमके सांसदों के बागी तेवर और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में मची रार के बाद अब महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को चार साल के भीतर एक और बड़े बिखराव का सामना करना पड़ा है। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाला बदलने की पुष्टि कर दी है। राजनीतिक गलियारों में इस पूरे दलबदल अभियान को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया गया है, जिसने मुंबई से लेकर दिल्ली तक सियासी तापमान बढ़ा दिया है। उद्धव गुट ने इसे भारतीय जनता पार्टी की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

क्या है 'ऑपरेशन टाइगर' और इसकी पृष्ठभूमि

'ऑपरेशन टाइगर' दरअसल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना द्वारा उद्धव ठाकरे गुट के जनप्रतिनिधियों को अपने पाले में लाने के लिए चलाए गए एक कथित अभियान का नाम है। इस नामकरण के पीछे मुख्य वजह यह है कि बाघ हमेशा से अविभाजित शिवसेना का पारंपरिक प्रतीक रहा है, जिसे दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने तैयार किया था। शिंदे गुट का मकसद उद्धव खेमे को कमजोर कर बालासाहेब की असली राजनीतिक विरासत पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है। इस अभियान की भनक अप्रैल महीने से ही मिलने लगी थी, जब शिंदे गुट के नेताओं ने दावा किया था कि कई सांसद उनके संपर्क में हैं। यह सुगबुगाहट तब सच साबित हुई जब उद्धव ठाकरे द्वारा मुंबई में बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक और आदित्य ठाकरे के जन्मदिन समारोह से कई सांसद नदारद रहे और उनके फोन 'नॉट रीचेबल' हो गए। इसके बाद खबर आई कि छह सांसदों ने गुपचुप तरीके से दिल्ली का रुख कर लिया है, जिसके बाद दलबदल की यह पटकथा खुलकर सामने आ गई।

पार्टी का स्टैंड और दल-बदल विरोधी कानून

इस बड़ी टूट पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग पार्टी में सेंधमारी कर रहे हैं वे बाघ नहीं बल्कि भेड़िये हैं, और इसके जवाब में उनकी पार्टी 'ऑपरेशन वुल्फ' शुरू करेगी। राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को तोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रलोभन दिया जा रहा है। टूट को रोकने के लिए उद्धव गुट के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने व्हिप भी जारी किया था और अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर बागी गुट को मान्यता न देने का अनुरोध किया था। जहां तक कानूनी स्थिति का सवाल है, संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत सदन में अयोग्यता से बचने के लिए मूल दल के कम से कम दो-तिहाई विधायी सदस्यों का अलग होना जरूरी है। लोकसभा में उद्धव गुट के कुल नौ सांसदों में से छह का टूटना ठीक दो-तिहाई का आंकड़ा बैठता है, जिससे फिलहाल उनकी संसद सदस्यता पर तात्कालिक संकट टल सकता है। हालांकि, पूर्ण कानूनी संरक्षण के लिए विधानसभा के विधायकों का भी इसी अनुपात में टूटना आवश्यक माना जा रहा है।

एनडीए को सियासी फायदा और आगामी विधेयकों का गणित

इस देशव्यापी राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा फायदा केंद्र की सत्ताधारी एनडीए सरकार को मिलता दिख रहा है। वर्तमान में एनडीए के पास 293 सांसद हैं। यदि तृणमूल कांग्रेस के संभावित 19-20 बागी सांसद और शिवसेना के ये छह बागी सांसद एनडीए खेमे को समर्थन देते हैं, तो यह संख्या बढ़कर 320 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, तमिलनाडु में द्रमुक और कांग्रेस के बीच पैदा हुए मतभेदों के चलते यदि द्रमुक के 22 सांसद भी मुद्दों के आधार पर सरकार को समर्थन देते हैं, तो एनडीए का आंकड़ा 342 तक जा सकता है। हालांकि, लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत (सदन की वर्तमान संख्या के अनुसार लगभग 360 सांसद) की आवश्यकता होगी। ऐसे में इन तमाम बगावतों और नए समीकरणों के बाद भी एनडीए जादुई आंकड़े से थोड़ा दूर रह सकता है, जिसके लिए उसे अन्य क्षेत्रीय दलों पर निर्भर रहना होगा।

Simhastha Kumbh Mela 2028 की तैयारी तेज, RPF ने पेश किया सुरक्षा प्लान

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उज्जैन: सिंहस्थ 2028 महाकुंभ के दौरान उमड़ने वाली लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को सुरक्षित और सुव्यवस्थित यात्रा का अनुभव देने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने एक व्यापक 'मेगा प्लान' तैयार कर लिया है। देश के इस सबसे बड़े धार्मिक समागम में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए आरपीएफ ने आधुनिक तकनीक, अतिरिक्त सुरक्षाबल और विशेष निगरानी तंत्र की मांग का एक विस्तृत प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा है। उज्जैन के मुख्य रेलवे स्टेशन से लेकर सभी नवनिर्मित फ्लैग स्टेशनों तक चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का कड़ा पहरा रहेगा।

हाईटेक तकनीक, ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से आसमान तक निगरानी

सुरक्षा को अचूक बनाने के लिए इस बार अत्याधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर सहारा लिया जा रहा है। योजना के मुताबिक, उज्जैन मुख्य स्टेशन और सभी फ्लैग स्टेशनों पर कुल 700 हाई-डेफिनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके। इसके साथ ही, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा की समीक्षा के लिए प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक आधुनिक ड्रोन तैनात किया जाएगा, जो आसमान से पूरे परिसर की लाइव मॉनिटरिंग करेगा। सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने के लिए उज्जैन मुख्य स्टेशन पर दो और अन्य सभी फ्लैग स्टेशनों पर एक-एक डॉग स्क्वॉड की तैनाती का भी प्रावधान किया गया है।

लाखों यात्रियों के लिए 7800 विशेष ट्रेनें और भारी बल की मांग

आगामी सिंहस्थ में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा रेल मार्ग के जरिए उज्जैन पहुंचेगा। इस भारी भीड़ को संभालने के लिए रेलवे ने लगभग 7,800 विशेष ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है। इतनी विशाल संख्या को ध्यान में रखते हुए आरपीएफ ने सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए 4,500 अतिरिक्त जवानों की मांग का प्रस्ताव भेजा है, जो रेलवे परिसरों और ट्रेनों में कानून व्यवस्था और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

जीआरपी की चाक-चौबंद तैयारी और अस्थायी थानों का जाल

रेलवे सुरक्षा बल के साथ-साथ शासकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने भी इस महाकुंभ के लिए कमर कस ली है। जीआरपी ने सुरक्षा चक्र को मजबूत करने के लिए 6,000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग का प्रस्ताव शासन को भेजा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए सिंहस्थ क्षेत्र के सभी फ्लैग स्टेशनों (नईखेड़ी, पिंगलेश्वर, मोहनपुरा, पंवासा, चिंतामन और विक्रमनगर) के परिसरों में अस्थायी पुलिस थाने स्थापित किए जाएंगे। इन थानों में प्रत्येक शिफ्ट में कम से कम 100 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, जो दिन-रात (24×7) मुस्तैदी से अपनी सेवाएं देंगे।

सिंहस्थ 2028: मुख्य सुरक्षा एवं परिवहन आंकड़े

सुरक्षा/परिवहन घटकप्रस्तावित क्षमता/संख्या
अतिरिक्त RPF बल4,500 जवान
अतिरिक्त GRP बल6,000 जवान
हाईटेक CCTV कैमरे700 अत्याधुनिक कैमरे
निगरानी ड्रोनहर स्टेशन पर 1 ड्रोन
डॉग स्क्वॉडउज्जैन स्टेशन पर 2 (बाकी फ्लैग स्टेशनों पर 1-1)
स्पेशल ट्रेनें7,800 ट्रेनें (प्रस्तावित संचालन)

कामाख्या मंदिर में चार दिवसीय अंबुवाची मेला, देश-विदेश से आएंगे श्रद्धालु

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नई दिल्ली। पूर्वी भारत का प्रसिद्ध और आस्था का बड़ा केंद्र 'अंबुवाची मेला' सोमवार से असम के कामाख्या मंदिर में शुरू होने जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस पावन मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों, साधु-संतों और पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। नारी शक्ति और प्रजनन क्षमता के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला यह मेला देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र का उत्सव है, जिन्हें दैवीय स्त्री रचनात्मक ऊर्जा का साक्षात् स्वरूप माना जाता है। भारत में शक्ति उपासना और तांत्रिक परंपराओं से जुड़े लोगों के लिए इस आयोजन का विशेष महत्व है।

तीन दिनों तक बंद रहेंगे गर्भगृह के कपाट

धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत सोमवार रात 'प्रवृत्ति समारोह' के साथ होगी, जो इस पावन और विशेष काल की शुरुआत का प्रतीक है। अनुष्ठान शुरू होने के बाद कामाख्या मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इस अवधि के दौरान मंदिर के भीतर सभी सामान्य धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं, जो देवी के मासिक धर्म के दौरान पालन किए जाने वाले एकांतवास को दर्शाता है। इस दौरान किसी भी भक्त को गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है।

मंदिर खुलने की तिथि और विशेष महाप्रसाद का महत्व

नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। तीन दिनों के एकांतवास के बाद, 26 जून की सुबह 'निवृत्ति अनुष्ठान' और पारंपरिक नित्य पूजा पूरी होने के साथ ही मंदिर के कपाट दोबारा आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद ले सकेंगे। मंदिर के कपाट खुलने पर भक्तों को बेहद पवित्र माने जाने वाले 'अंगोदक' (पवित्र जल) और 'अंगवस्त्र' (रक्तवर्ण वस्त्र) का प्रसाद वितरित किया जाता है, जिसे पाने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।

प्रशासन की व्यापक तैयारियां और सुरक्षा इंतजाम

इस बड़े आध्यात्मिक समागम को देखते हुए असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने व्यापक और पुख्ता तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुवाहाटी आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, ठहरने (आवास) और भोजन वितरण के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि मेले का संचालन सुचारू रूप से हो सके। हर साल आयोजित होने वाला यह अंबुवाची मेला पूरे गुवाहाटी शहर को एक जीवंत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र में बदल देता है।

स्वदेशी हथियारों पर खाड़ी देशों का भरोसा बढ़ा, UAE ने दिखाई दिलचस्पी

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नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई ने भारत की बेहद अचूक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आधुनिक 'आकाशतीर' (Akashteer) एयर डिफेंस नेटवर्क को खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच इस रक्षा सौदे को लेकर बातचीत जारी है, जो यदि सफल होती है तो वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख को एक नई ऊंचाई मिलेगी।

ब्रह्मोस और आकाशतीर प्रणालियों की मांग

यूएई ने भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' को अपनी सेना में शामिल करने की इच्छा जताई है। यदि यह डील फाइनल होती है, तो फिलीपींस, आर्मेनिया और मिस्र के बाद यूएई ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला चौथा विदेशी देश बन जाएगा। इसके साथ ही, यूएई ने भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित 'आकाशतीर' एयर डिफेंस कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में भी रुचि दिखाई है। यह प्रणाली हवाई खतरों की निगरानी और जवाबी कार्रवाई को पूरी तरह ऑटोमैटिक तरीके से संचालित करने में सक्षम है। चूँकि ब्रह्मोस एक संयुक्त परियोजना है, इसलिए इसके निर्यात के लिए रूस की मंजूरी जरूरी होगी, लेकिन रूस और यूएई के मधुर संबंधों को देखते हुए इसमें किसी बाधा की आशंका नहीं है।

खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और यूएई की रणनीति

भू-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हालिया मध्य-पूर्वी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यूएई अपनी सैन्य क्षमताओं को अभेद्य बनाना चाहता है। यूएई का विशेष ध्यान रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) की सुरक्षा को पुख्ता करने पर है, जो वैश्विक ऊर्जा और तेल आपूर्ति का एक मुख्य समुद्री मार्ग है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई अब किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं का दायरा बढ़ाना चाहता है ताकि उसे अधिक रणनीतिक स्वतंत्रता मिल सके। भारत के साथ इस साझेदारी से यूएई को खाड़ी क्षेत्र में अपना शक्ति संतुलन बनाए रखने में बड़ी मदद मिलेगी।

भारतीय रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल

यह संभावित रक्षा सौदा भारत के वैश्विक डिफेंस हब बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में भारत का रक्षा निर्यात 4 अरब डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपये) के सर्वकालिक रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है, जो कि वर्ष 2013-14 में महज 7.26 मिलियन डॉलर था। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ पिछले वर्ष हुए सीमा संघर्ष के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल के सफल व सटीक उपयोग ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसकी धाक और बढ़ा दी है। यही वजह है कि यूएई के अलावा वियतनाम, इंडोनेशिया, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और चिली जैसे कई अन्य देश भी इस मिसाइल को खरीदने की कतार में शामिल हैं।

नीट (यूजी) पुनः परीक्षा का जिला कलेक्टर संदेश नायक साहित प्रशासन एवम् पुलिस के अधिकारी दिन भर करते रहे मॉनिटरिंग

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जयपुर। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) की पुनः परीक्षा का आयोजन जयपुर जिले में पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। जिला प्रशासन और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के आपसी तालमेल के चलते परीक्षा के दौरान सभी केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम देखने को मिले।

अधिकारियों द्वारा परीक्षा केंद्रों का सघन निरीक्षण

परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिला कलेक्टर संदेश नायक और प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद मोर्चे पर रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल, शहीद अभय कुमार पारीक सीनियर सेकेंडरी स्कूल सहित केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, 3, 4, पोद्दार स्कूल, माहेश्वरी पब्लिक स्कूल और आदर्श स्कूल सिंधी कॉलोनी जैसे प्रमुख केंद्रों की कड़ी निगरानी की गई। परीक्षा के नोडल प्रशासनिक अधिकारी और अतिरिक्त जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि कुल 15 परीक्षा केंद्रों का सघन निरीक्षण किया गया, जबकि 24 मोबाइल ड्यूटी मजिस्ट्रेट्स ने पुलिस, एनटीए और चिकित्सा शिक्षा टीम के साथ मिलकर लगातार पेट्रोलिंग की।

91.66 प्रतिशत दर्ज की गई अभ्यर्थियों की उपस्थिति

जयपुर जिले में इस परीक्षा के लिए कुल 37,128 अभ्यर्थी पंजीकृत (रजिस्टर्ड) थे। इनमें से 34,031 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होने के लिए केंद्रों पर उपस्थित रहे, जबकि 3,097 अभ्यर्थी अनुपस्थित पाए गए। इस प्रकार जयपुर जिले में परीक्षा का कुल उपस्थिति प्रतिशत 91.66 प्रतिशत दर्ज किया गया।

समयबद्ध आयोजन और परीक्षार्थियों के लिए बुनियादी सुविधाएं

सभी केंद्रों पर परीक्षा पूरी तरह तय समय पर शुरू हुई और समय पर ही संपन्न कराई गई। जिला प्रशासन द्वारा परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए परीक्षा केंद्रों के बाहर और आसपास सुरक्षा, सुचारू यातायात, पेयजल और निर्बाध विद्युत (बिजली) आपूर्ति जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से ही सुनिश्चित कर ली गई थीं, जिससे दूर-दराज से आए छात्रों और उनके अभिभावकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

12 वां अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: अजमेर में जिला स्तरीय कार्यक्रम पुलिस लाईन मैदान में हुआ आयोजित

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जयपुर। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अजमेर जिले के पुलिस लाईन ग्राउण्ड में उत्साहपूर्वक योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, आयुर्वेद विभाग व अन्य विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों सहित स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राओं और आम जनता ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

प्रधानमंत्री के उद्बोधन का सीधा प्रसारण और दीप प्रज्वलन

कार्यक्रम का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, जिला कलक्टर लोक बन्धु, अतिरिक्त जिला कलक्टर अभिषेक गोयल एवं आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. हनुमान मीना द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर मौजूद सभी प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर दिए गए संदेश का सीधा प्रसारण (टेलीकास्ट) भी दिखाया गया, जिसमें उन्होंने योग को स्वस्थ जीवन और वैश्विक एकता का सशक्त माध्यम बताते हुए इसे दैनिक दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान किया।

स्वस्थ जीवन शैली और 'विकसित भारत 2047' का संकल्प

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि योग मात्र व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को जोड़ने का साधन है। आधुनिक जीवन शैली में योग अपनाकर बीमारियों से बचा जा सकता है और नियमित अभ्यास से ही 'विकसित भारत 2047' का सपना साकार होगा। वहीं, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने 'पहला सुख निरोगी काया' का महत्व समझाते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में योग स्वयं को पहचानने का मार्ग है। आधुनिक युग के तनाव और बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए योग को जीवन का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है।

'योगा फॉर हेल्दी एजिंग' थीम पर सामूहिक अभ्यास

जिला कलक्टर लोक बन्धु ने बताया कि आयुष विभाग के संयोजन में आयोजित इस जिला स्तरीय कार्यक्रम को 'योगा फॉर हेल्दी एजिंग' (स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग) की थीम पर आयोजित किया गया था। भारत स्वाभिमान न्यास एवं पतंजलि योग समिति के योगाचार्य यतीन्द्र शास्त्री के निर्देशन में उपस्थित जनसमुदाय ने सामूहिक योग किया। जिला मुख्यालय के साथ-साथ अजमेर के सभी उपखण्ड, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर भी इस प्रकार के योग कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया।

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