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मुख्यमंत्री डॉ. यादव आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026 के समापन समारोह में मंगलवार को होंगे शामिल

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान मध्यप्रदेश (एनआईडी एमपी) एवं वन्या, जनजातीय कार्य विभाग, द्वारा एनआईडी मध्यप्रदेश परिसर, अचारपुरा, भोपाल में आयोजित 23 जून मंगलवार को आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026 समापन समारोह में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महोत्सव के दौरान जनजातीय शिल्पकारों द्वारा विकसित नवाचारपूर्ण उत्पादों एवं डिजाइन हस्तक्षेपों की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। साथ ही शिल्पकारों, डिजाइन विशेषज्ञों और प्रतिभागियों से संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समारोह में जनजातीय कला, शिल्प और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों तथा डिजाइन आधारित नवाचारों की जानकारी दी जाएगी।

पांच दिवसीय महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार भाग लेंगे। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों द्वारा अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। महोत्सव में आयोजित डिजाइन हस्तक्षेप कार्यशालाओं में शिल्पकारों ने एनआईडी मध्यप्रदेश के संकाय सदस्यों एवं छात्र स्वयं सेवकों के सहयोग से बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पाद विकसित किए हैं।

समापन समारोह के अवसर पर इन कार्यशालाओं के दौरान विकसित उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी शाम 5:30 बजे से आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी, जहां आगंतुक उत्पादों को देख सकेंगे। साथ ही, भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों द्वारा प्रदर्शित मूल कलाकृतियां एवं हस्तशिल्प उत्पाद खरीद के लिए उपलब्ध रहेंगे।

आदिरंग शिल्पकार महोत्सव जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ शिल्पकारों के लिए नए बाजार एवं आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एनआईडी मध्यप्रदेश और वन्या के संयुक्त प्रयास से आयोजित यह महोत्सव डिजाइन और परंपरा के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।
 

धमतरी में आकाशीय बिजली से 40 भेड़-बकरियों की मौत

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रायपुर :      धमतरी जिले के विकासखंड मगरलोड के अंतर्गत ग्राम डुमरपाली में आकाशीय बिजली गिरने से भारी संख्या में मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है। विगत 17 जून की रात हुई इस प्राकृतिक आपदा में लगभग 40 भेड़-बकरियों की जान चली गई। घटना की भनक लगते ही पशुधन विकास विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया है।

*​घुमंतू चरवाहों के थे पशु, संक्रमण का खतरा नहीं*

     ​विभागीय अमले ने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों से सघन चर्चा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली। जांच में यह बात सामने आई है कि मृत पशु अन्य राज्यों से आए घुमंतू चरवाहों के थे। आकाशीय बिजली की इस दर्दनाक घटना के बाद चरवाहों ने मृत पशुओं को नियमानुसार गड्ढा खोदकर सुरक्षित रूप से दफना दिया और वहां से आगे चले गए।
      ​पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों ने दफन स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में वहां किसी भी प्रकार के संक्रमण या पशुजनित बीमारी (Zoonotic Disease) फैलने की स्थिति नहीं है।

*​विभाग रख रहा है पल-पल की नजर*

      ​पशुधन विकास विभाग के अनुसार, प्राकृतिक आपदा के कारण हुई इस आकस्मिक घटना के सभी आवश्यक तथ्यों और आंकड़ों का संकलन कर लिया गया है, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पशुधन विकास विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने और पशुपालकों को त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए टीमें 24×7 प्रतिबद्ध हैं।
      ​वर्तमान में विभाग द्वारा एहतियातन कदम उठाते हुए प्रभावित क्षेत्र और आसपास के गांवों में स्थिति पर सतत निगरानी (Continuous Monitoring) रखी जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
 

निर्माण और जन सुविधाएं विकसित करने के कार्यों को गति देने सक्रियता से करें मॉनिटरिंग – शंगीता आर.

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रायपुर :  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव शंगीता आर. ने नगरीय निकायों के कार्यों की मॉनिटरिंग व समन्वय के लिए जिलेवार नियुक्त नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर उनके कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में आयोजित बैठक में सभी नोडल अधिकारियों को नगर निगमों, नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों में निर्माण और जन सुविधाएं विकसित करने के कार्यों को गति देने सक्रियता एवं गंभीरता से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों की समस्याओं का हल निकालकर विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी तरीके से धरातल पर उतारने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में मैदानी निरीक्षण के दौरान वहां की जरूरतों और व्यवस्थाओं का आकलन भी करने को कहा।

नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव शंगीता आर. ने बैठक में नोडल अधिकारियों से उनके नगरीय निकायों के भ्रमण और बैठकों का फीडबैक लेकर निकायों में कार्यों की वस्तुस्थिति जानी। उन्होंने कहा कि निकायों में कार्यों के निरीक्षण के लिए पूरी तैयारी से जाएं। विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों के लिए पिछले दो वित्तीय वर्षों में कितनी राशि जारी की गई है, इसकी भी जानकारी रखें। उन्होंने निकायों में प्रगतिरत निर्माण कार्यों के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की भी हर महीने समीक्षा करने के निर्देश दिए।

शंगीता आर. ने नोडल अधिकारियों को आबंटित जिले के आय-व्यय की स्थिति पर भी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो निकाय खुद की आय से अपनी सभी व्यवस्थाएं कर सकते हैं, उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने निकायों में लक्ष्य निर्धारित कर वार्डवार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को सेचुरेट करने को कहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक आर. एक्का, उप सचिव भागवत जायसवाल, राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य और मुख्य अभियंता राजेश शर्मा भी बैठक में मौजूद थे।

शहरी विकास योजनाओं की निगरानी को और सशक्त करने नोडल अधिकारी कर रहे स्थल निरीक्षण, अब तक 103 निकायों का निरीक्षण कर चुके नोडल अधिकारी

नगरीय प्रशासन विभाग ने विकास कार्यों और योजनाओं की जमीनी स्तर पर निगरानी को सुदृढ़ करने सभी राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों को अपने-अपने आबंटित जिलों के नगरीय निकायों के नियमित भ्रमण के निर्देश दिए हैं। विगत 6 जून को एक साथ सभी नोडल अधिकारियों ने अपने जिलों में पहुंचकर योजनाओं की प्रगति, चुनौतियों और क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन किया। विभाग की इस पहल का उद्देश्य योजनाओं की प्रभावी निगरानी, समस्याओं का त्वरित समाधान तथा मैदानी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। अलग-अलग जिलों के नोडल अधिकारी अब तक राज्य के 194 नगरीय निकायों में से 103 में मैदानी निरीक्षण के लिए जा चुके हैं।
 

राष्ट्रपति मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद और चीता संरक्षण की ली जानकारी

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भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने दो दिवसीय कूनो नेशनल पार्क के प्रवास के दौरान सोमवार को चीता मित्रों से संवाद कर चीता संरक्षण के प्रयासों की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने चीता मित्रों से चर्चा करते हुए उनके द्वारा चीतों की सुरक्षा और आमजन के बीच चीतों के व्यवहार को लेकर किये जा रहे जन-जागरूकता के प्रयासों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी चीता मित्रों से वन-टू-वन चर्चा कर परियोजना के लिए उनके द्वारा मानसेवी रूप से किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।

राष्ट्रपति मुर्मु को चीता मित्रों ने अवगत कराया कि कूनो नेशनल पार्क से लगे सभी ग्रामों में चीता मित्र मौजूद है, जिनके द्वारा चीतो की सुरक्षा के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। चीतो के आबादी क्षेत्र में आवागमन की स्थिति पर किये जाने वाले कार्यों के संबंध में सभी को अवगत कराया गया है। ग्रामीणों को यह जानकारी भी दी जा रही है कि स्वभाविक रूप से चीते किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते है। चीता जब आबादी क्षेत्र अथवा खेतों में दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को अवगत कराया जाये, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुँचे। भारत में चीतों की पुनर्बसाहट के लिए यह परियोजना अति महत्वपूर्ण है।

इस दौरान चीता मित्र कुलदीप आदिवासी सिलोरी, संग्राम आदिवासी एवं कु. राजनदंनी आदिवासी हथेडी, मल्हा आदिवासी सेसईपुरा, शिवम आदिवासी पालपुर, विनोद आदिवासी पैरा, रामलखन आदिवासी कराहल, लालाराम आदिवासी सेसईपुरा, दौलतराम आदिवासी सेसईपुरा और सतीश आदिवासी मोरावन मौजूद रहें।

इस अवसर पर वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव, पीसीसीएफ शुभरंजन सेन, कमिश्नर सुरेश कुमार, आईजी सचिन अतुलकर, कलेक्टर सुशीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल, सीसीएफ उत्तम कुमार, डीएफओ आर थिरूकुराल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहें।

उल्लेखनीय है कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुनर्स्थापन योजना को लगभग साढ़े तीन वर्ष से अधिक का समय हो गया है। नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका एवं बोत्सवाना से चीतों को लाया गया है, वर्तमान में देश में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो नेशनल पार्क में तथा 03 चीते मंदसौर स्थित गांधी सागर अभ्यारण में मौजूद है। भारत में जन्मे चीतो की संख्या 32 है, चीता प्रोजेक्ट निरंतर सफलता की ओर आगे बढ रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मु चीता मित्रों से संवाद के उपरांत हेलीकॉप्टर से ग्वालियर के लिये रवाना हुई। हेलीपेड पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मीनिस्टर इन वेटिंग एवं जिले के प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने आदरपूर्वक विदाई दी।
 

मानसून हुआ कमजोर, मध्य प्रदेश के कई जिलों में पानी की किल्लत का खतरा

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भोपाल। देशभर में अल नीनो (El Niño) के असर के कारण मानसून की रफ्तार काफी सुस्त पड़ गई है। इसका सीधा प्रभाव मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है, जहां जून के मध्य तक आ जाने वाला मानसून इस बार अब तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेशवासियों को मानसूनी बारिश के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के चलते राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।

मानसून में देरी और सूखे की आहट

आमतौर पर मध्य प्रदेश में मानसून 15 जून के आसपास दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार 22 जून बीत जाने के बाद भी इसकी मजबूत एंट्री नहीं हो सकी है। देश में मानसून के प्रवेश को करीब 20 दिन हो चुके हैं, फिर भी अल नीनो प्रभाव के कारण इसकी गति कमजोर है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के साथ मिलकर मोर्चा संभाल लिया है। वर्तमान में प्रदेश के 16 जिलों पर सूखे का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। आम जनता और किसानों में घबराहट न फैले, इसलिए सरकार ने सभी प्रभावित जिलों की सूची को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि, धार, झाबुआ, बड़वानी, नीमच, रतलाम, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, शिवपुरी, मंडला, सतना, बैतूल, छिंदवाड़ा और खंडवा जैसे जिलों को हाई अलर्ट पर माना जा रहा है।

किसानों के लिए बन रहा विशेष कंटिजेंसी प्लान

बारिश में हो रही इस देरी का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों की बुआई और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। इस संकट से निपटने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्य सरकार मिलकर एक विशेष 'कंटिजेंसी प्लान' (आपातकालीन योजना) तैयार कर रहे हैं। इसके तहत किसानों को वैकल्पिक और कम पानी में पकने वाली फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि यदि मानसून सामान्य नहीं रहता है, तो किसानों को ऐसी फसलों की ओर रुख करना होगा जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकें, ताकि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

जून के अंत में मानसून सक्रिय होने की संभावना

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियों के दोबारा मजबूत होने में अभी कुछ दिनों का समय और लगेगा। वर्तमान मौसमी प्रणालियों को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि 29 जून के आसपास प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का यह प्रभाव केवल मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्य भी इससे प्रभावित हैं। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को भेज दी गई है ताकि समय रहते सभी जरूरी कदम उठाए जा सकें।

सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी और आवासों में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के उपयोग को करें प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर जिला मुख्यालयों पर होने वाले कार्यक्रमों में जिलों के प्रभारी मंत्री, जिलों में हुए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करेंगे। समारोह स्थल पर विकास कार्यों और योजनाओं को जनसामन्य के सामने रखने के लिए प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी, यह प्रेजेंटेशन एक तरह से विकास कार्यों के सोशल ऑडिट जैसा होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला विकास समितियों का राजधानी भोपाल में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिला विकास समितियां विकास गतिविधियों के लिए शासकीय नियोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करने के लिए जिला विकास समितियां प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने और किफायती आवासों के निर्माण में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य के विभागवार, संभागवार और जिलावार समस्त सांख्यिकी आंकड़े एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में योजना, आर्थिक एवं साख्यिकी विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, मनीष रस्तोगी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 विश्राम घाट पर ही मृत्यु पंजीयन की हो व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र में सभी विभागों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। योजना अंतर्गत कराए गए कार्यों के संधारण की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योजना में श्रेष्ठ कार्य तथा नवाचार करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु पंजीकरण की व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मृत्यु पंजीयन के लिए विश्राम घाट पर ही पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करने की व्यवस्था के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के लोगों को मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में आसानी होगी।

जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों पर हों आधारित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अलग-अलग निर्धारित किया जाए। औद्योगिक पृष्ठ भूमि, कृषि आधारित व्यवस्था, वन क्षेत्र संपन्न जिलों के लिए विकास के सूचकांक अलग-अलग हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं का मकान बनाने वालों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और उपयुक्त भवन निर्माण सामग्री के संबंध में जागरूक करने के लिए भी जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों की रही सक्रिय सहभागिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक एक लाख 37 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों ने कुएँ, बावड़ी, तालाब, नदी घाट सफाई, जल संगोष्ठी और बावड़ी उत्सव जैसे आयोजनों में सक्रिय सहभागिता की। बैठक में बताया गया कि विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु परिवारों के चिन्हाकंन और पंजीकरण के लिए जारी अभियान में अब तक पच्चीस हजार से अधिक परिवारों की जानकारी पोर्टल पर प्रविष्ट की जा चुकी है। प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी है।
 

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ने बदली दुर्गेश यादव के खेती की तस्वीर

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रायपुर :  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सहारे का मजबूत आधार बन रही है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के ग्राम बिजरवार निवासी किसान श्री दुर्गेश यादव भी उन लाभार्थियों में शामिल हैं, जिनके जीवन में इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है। सीमित कृषि भूमि होने के बावजूद वे खेती-किसानी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले खेती के लिए बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री की व्यवस्था करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली सहायता ने उनकी राह आसान कर दी है।

श्री दुर्गेश यादव बताते हैं कि योजना के तहत उन्हें प्रत्येक तीन माह में दो हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होती है। समय पर मिलने वाली यह आर्थिक सहायता खेती के मौसम में आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने में मददगार साबित हो रही है। इससे खेती की लागत का बोझ कम हुआ है और उन्हें आर्थिक परेशानियों से काफी राहत मिली है।

उन्होंने बताया कि पहले कृषि कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग बीज, उर्वरक और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है। इससे खेती का कार्य अधिक व्यवस्थित ढंग से हो पा रहा है और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिल रही है।

श्री दुर्गेश यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अनेक किसानों को मिल रहा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे खेती के कार्यों को बेहतर योजना और उत्साह के साथ कर पा रहे हैं। किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी और सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से किसानों को समय पर सहायता मिल रही है, जिससे वे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आज ग्रामीण भारत के लाखों किसानों की तरह गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के किसान श्री दुर्गेश यादव के जीवन में भी नई उम्मीद, आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है।
 

महिला राजमिस्त्री बनकर गढ़ रहीं आत्मनिर्भरता की नई इबारत

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रायपुर :  ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दुर्ग जिले के ग्राम बठेना में एक प्रेरणादायक पहल आकार ले रही है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में बैंक ऑफ बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), दुर्ग द्वारा संचालित 30 दिवसीय रूरल मेसन (राजमिस्त्री) प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ आवास निर्माण को बढ़ावा देने के साथ यह प्रशिक्षण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित कर रहा है।

कभी निर्माण कार्य को पुरुषों का क्षेत्र मानती थीं
            ग्राम बठेना में आयोजित इस प्रशिक्षण में 35 ग्रामीण महिलाएं उत्साहपूर्वक भाग ले रही हैं। जो महिलाएं कभी निर्माण कार्य को पुरुषों का क्षेत्र मानती थीं, वे आज राजमिस्त्री बनने का कौशल सीखकर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं। यह प्रशिक्षण केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आर्थिक स्वावलंबन की भावना भी विकसित कर रहा है।

आधुनिक निर्माण तकनीक के साथ सीखे सुरक्षा मानक और गुणवत्ता नियंत्रण
        प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को भवन निर्माण की विभिन्न तकनीकों का व्यवहारिक और तकनीकी ज्ञान दिया जा रहा है। इसमें नींव निर्माण, दीवारों की वैज्ञानिक संरचना, छत ढलाई, प्लास्टर, फ्लोरिंग, फिनिशिंग तथा निर्माण सामग्री के सही अनुपात और उपयोग की जानकारी शामिल है। साथ ही आधुनिक निर्माण तकनीकों, सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे बेहतर और टिकाऊ निर्माण सुनिश्चित हो सके।

प्रशिक्षणार्थियों को मिली निःशुल्क ड्रेस, टूल किट, भोजन  सुविधा
         इस प्रशिक्षण की विशेषता यह है कि महिलाओं को केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं, बल्कि वास्तविक निर्माण कार्यों के माध्यम से व्यवहारिक अनुभव भी प्रदान किया जा रहा है। मास्टर ट्रेनर सुश्री अनिता चारभे के मार्गदर्शन में महिलाएं निर्माण कार्य की बारीकियां सीख रही हैं और आत्मविश्वास के साथ इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की तैयारी कर रही हैं। प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क ड्रेस, टूल किट और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

स्थानीय रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
         मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बनने वाले घरों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास आधारित ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी मजबूत होगी।  यह पहल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रही है। आज ग्राम बठेना की महिलाएं केवल ईंट और सीमेंट से घर नहीं बना रहीं, बल्कि अपने सपनों, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव भी रख रही हैं। ।
 

राष्ट्रपति मुर्मु को ग्वालियर विमानतल पर दी भावभीनी विदाई

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भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मध्यप्रदेश के 5 दिवसीयभ्रमण के बाद22 जून को सुबह वायुसेना के विमान से ग्वालियर से दिल्ली रवाना हुईं। राष्ट्रपति मुर्मु श्योपुर जिले के कूनों से हैलीकॉप्टर से वायुसेना के विमानतल महाराजपुरा ग्वालियर पधारीं। उनके साथ मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी थे।

ग्वालियर विमानतल पर राज्यपाल पटेल, प्रदेश के जल संसाधन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह एवं महापौर शोभा सिकरवार ने विदाई दी।

विमानतल पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, डीजी होमगार्ड सुप्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव, संभागीय आयुक्त मनोज खत्री, आईजी अरविंद कुमार सक्सेना, डीआईजी असित यादव, कलेक्टर रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय एवं वायु सेना के अधिकारी उपस्थित रहे।
 

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में विकसित की जाए एक हैचरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एकीकृत मत्स्योघोग नीति : 2026 के कारण प्रदेश में मछली पालन सेक्टर में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ रहा है। प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 9 सौ 38 केज के प्रस्तावों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। प्रदेश में मोती उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाये, इसके लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस का अध्ययन कर उनका क्रियान्वयन प्रदेश में सुनिश्चित किया जायें। प्रदेश को मछली उत्पादन में आत्म निर्भर बनाना जरूरी है। अगले ढाई साल में हमें मछली बीज अन्य स्थानों से नहीं खरीदना पड़े, इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर विभाग कार्य करे। हर जिले में एक हेचरी आवश्यक रूप से विकसित की जाये। जिलों में मछली बीज आसानी से मिलने से प्रदेश में मछली उत्पादन में और बढ़ोत्तरी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मछुआ कल्याण तथा मत्यस्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह पवार, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, विभाग के सचिव श्री स्वतंत्र कुमार सिंह तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मछुआ क्रेडिट कार्ड में मध्यप्रदेश, देश में दूसरे स्थान पर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बढ़ रहे मछली उत्पादन को दृष्टिगत रखते हुए कोल्ड चेन तथा अन्य आवश्यक इंफ्रास्टक्चर विकसित किया जाये। ब्रांडिंग और निर्यात के लिए आवश्यक नेटवर्किंग को भी प्रोत्साहित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन, जलीय जीवों के संरक्षण के लिए सभी संबंधित विभाग परस्पर समन्वय से कार्य करें। जलीय ईको सिस्टम को विकसित करने और जल सम्पदा पर आधारित पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के लिए भी कार्य योजना बनाई जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत अन्तर्देशीय जल क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। राष्ट्रीय स्तर पर अन्तर्देशीय मत्स्य पालन में सिवनी जिले को वर्ष 2023-24 के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

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